Outside, snow is slowly, softly Falling through the wintry night. In the house, the brass menorah Sparkles with the candlelight. Children in a circle listen To the wondrous stories told, Of the daring Maccabeans And the miracles of old. In the kitchen, pancakes sizzle, Turning brown, they’ll soon be done. Gifts are waiting to be opened, Happy Hanukkah’s begun. ∼ Eva …
Read More »पता ही नहीं: कृष्ण बिहारी ‘नूर’ की चुनिन्दा शायरी
२९ अगस्त १९५४ को पूर्वी उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले की बांसगाँव तहसील (अब खजनी) अन्तर्गत ग्राम कुण्डाभरथ में जन्म। कानपुर विश्वविद्यालय से हिन्दी साहित्य में एम. ए. किया। सन १९६८-६९ से लेखन की शुरुआत हुई। पहली कहानी सन १९७१ में प्रकाशित। तबसे सैकड़ों रचनाएँ हिन्दुस्तान के प्रमुख समाचार पत्रों एवं पत्रिकाओं में प्रकाशित। अनेक प्रकार की साहित्यिक सांस्कृतिक संस्थाओं …
Read More »मेरा नया बचपन: सुभद्रा कुमारी चौहान की हिंदी कविता
मेरा नया बचपन: सुभद्रा कुमारी चौहान की हिंदी कविता – We all miss our childhood. That carefree time of fun without worries never returns. We are for ever stuck with the grown up world of endless worries, apprehensions and ambitions. Here is a very famous poem of Subhadra Kumari Chauhan about that lovely childhood. सुभद्रा कुमारी चौहान हिन्दी की सुप्रसिद्ध …
Read More »बचपन: Short Hindi Poetry about Childhood
बचपन जीवन का बहुत ही महत्वपूर्ण समय होता है। इसमें इतनी चंचलता और मिठास भरी होती है कि हर कोई फिर से इसे जीना चाहता है। बचपन में वह धीरे-धीरे चलना, गिर पड़ना और फिर से उठकर दौड़ लगाना बहुत याद आता है। पिताजी के कंधे पर बैठकर मेला देखने का जो मजा होता था वह अब नहीं आता है। …
Read More »बचपन ही अच्छा था: WhatsApp से ली गयी कविता
हम अक़सर कहते हैं, बचपन ही अच्छा था। कोई बड़ी परेशानी आती है और हमें किसी कारणवश उसका समाधान नहीं मिलता, तो यही भावना आती है, ‘बचपन ही अच्छा था’। अगर मैं अपनी बात करूं, तो मुझे तो कभी-कभी बच्चों से जलन भी होने लगती है। बचपन ही अच्छा था: WhatsApp से ली गयी कविता पूरी स्कूल लाईफ में सुबह˗सुबह …
Read More »बचपन: बाल दिवस स्पेशल नटखट हिंदी कविता
बचपन के दिन किसी भी व्यक्ति के जीवन के बड़े महत्वपूर्ण दिन होते हैं। बचपन में सभी व्यक्ति चिंतामुक्त जीवन जीते हैं। खेलने उछलने-कूदने, खाने-पीने में बड़ा आनंद आता है। माता-पिता, दादा-दादी तथा अन्य बड़े लोगों का प्यार और दुलार बड़ा अच्छा लगता हैं। हमउम्र बच्चों के साथ खेलना-कूदना परिवार के लोगों के साथ घूमना-फिरना बस ये ही प्रमुख काम …
Read More »नानक दुखिया सब संसार: जैमिनी हरियाणवी की हास्य कविता
Gautam Buddha said that this world is a world of sorrows. Here Guru Nanak is saying the same. Except for few illusory moments of mirth, rest of the life is a struggle and frustration. नानक दुखिया सब संसार बूढ़ा बाप पड़ा बीमार माँ की बेटे से तकरार इस का रुठ गया है यार नानक दुखिया सब संसार गुंडा लेकर हुआ …
Read More »सयानी बिटिया – हिंदी कविता: बेटियां होती है पराया धन
जबसे हुई सयानी बिटिया भूली राजा-रानी बिटिया बाज़ारों में आते-जाते होती पानी-पानी बिटिया जाना तुझे पराये घर को मत कर यों मनमानी बिटिया किस घर को अपना घर समझे जीवन-भर कब जानी बिटिया चॉकलेट भैया को भाये पाती है गुड़धानी बिटिया सारा जीवन इच्छाओं की देती है कुर्बानी बिटिया चौका, चूल्हा, झाडू, बर्तन भूल गई शैतानी बिटिया हल्दी, बिछूए, कंगल …
Read More »मेघ आये बड़े बन ठन के, सँवर के: सर्वेश्वर दयाल सक्सेना
भारत में मॉनसून हिन्द महासागर व अरब सागर की ओर से हिमालय की ओर आने वाली हवाओं पर निर्भर करता है। जब ये हवाएं भारत के दक्षिण पश्चिम तट पर पश्चिमी घाट से टकराती हैं तो भारत तथा आसपास के देशों में भारी वर्षा होती है। ये हवाएं दक्षिण एशिया में जून से सितंबर तक सक्रिय रहती हैं। वैसे किसी …
Read More »इन्साफ़ की डगर पे बच्चों दिखाओ चल के: शकील बदायूंनी
आसान अल्फाज के जरिए सीधे दिल में उतरने वाले मशहूर शायर और गीतकार शकील बदायूंनी के बगैर रूमानी फिल्मों की कहानियां अधूरी हैं। मगर, मकबूल शायर होने के बावजूद उन्हें वह जगह नहीं मिली जिसके वह हकदार थे। ‘मुगल-ए-आजम’ और ‘मदर इंडिया‘ जैसी कालजयी फिल्मों और ‘मेरे महबूब’, ‘गंगा-जमुना’ और ‘घराना’ जैसी अपने दौर की सुपरहिट फिल्मों को अपने नग्मों …
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