Poems For Kids

Poetry for children: Our large assortment of poems for children include evergreen classics as well as new poems on a variety of themes. You will find original juvenile poetry about trees, animals, parties, school, friendship and many more subjects. We have short poems, long poems, funny poems, inspirational poems, poems about environment, poems you can recite

श्री सरस्वती चालीसा

॥दोहा॥ जनक जननि पद्मरज, निज मस्तक पर धरि। बन्दौं मातु सरस्वती, बुद्धि बल दे दातारि॥ पूर्ण जगत में व्याप्त तव, महिमा अमित अनंतु। दुष्जनों के पाप को, मातु तु ही अब हन्तु॥ जय श्री सकल बुद्धि बलरासी। जय सर्वज्ञ अमर अविनाशी॥ जय जय जय वीणाकर धारी। करती सदा सुहंस सवारी॥ रूप चतुर्भुज धारी माता। सकल विश्व अन्दर विख्याता॥ जग में …

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नए वर्ष में नयी पहल हो – सजीवन मयंक

नए वर्ष में नई पहल हो। कठिन ज़िंदगी और सरल हो॥ अनसुलझी जो रही पहेली। अब शायद उसका भी हल हो॥ जो चलता है वक्त देखकर। आगे जाकर वही सफल हो॥ नए वर्ष का उगता सूरज। सबके लिए सुनहरा पल हो॥ समय हमारा साथ सदा दे। कुछ ऐसी आगे हलचल हो॥ सुख के चौक पुरें हर द्वारे। सुखमय आँगन का …

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नए वर्ष पर – देवराज

नए वर्ष की पहली रात में तुमने अपनी डायरी में मेरे लिए शुभकामनाएँ लिखीं: कि मुझे दुनिया में वह सब मिले जो अभीष्ट और काम्य है सब तरह का सुख, लंबी उम्र देश-विदेश में नाम और ख्याति यानि विस्तृत विशाल सर्जन कर्म। मैं तुम्हारी शुभकामनाओं के लिए हृदय से कृतज्ञ हूँ लेकिन मेरे दूरवासी दोस्त तुम एक चीज़ की कामना करना भूल …

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नया वर्ष मंगलमय सबको – डॉ. यशोधरा राठौर

नया वर्ष मंगलमय सबको नई किरण-सा हो यह वर्ष ऋद्धि-सिद्धि दे हमें गणपति भैरवी दे नूतन उत्कर्ष नए वर्ष का नया सुमन मुसकाए सबके जीवन में भरी रहे माता की गोदी खिले सभी का भाग्य सुमन वनिता का सिंदूर अमर हो पुलकित हो जन-जन का मन जुड़ा रहे भाई भाई से नहीं किसी में हो अनबन ∼ डॉ. यशोधरा राठौर

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जो तुम आ जाते एक बार – महादेवी वर्मा

जो तुम आ जाते एक बार। कितनी करूणा कितने संदेश, पथ में बिछ जाते बन पराग, गाता प्राणों का तार तार, अनुराग भरा उन्माद राग, आँसू लेते वे पथ पखार। जो तुम आ जाते एक बार। हँस उठते पल में आर्द्र नयन, धुल जाता होठों से विषाद, छा जाता जीवन में बसंत, लुट जाता चिर संचित विराग, आँखें देतीं सर्वस्व …

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प्रिय कैसे, फिर तुम्हें मनाऊँ – सुरेन्द्र कुमार अरोड़ा

ह्रदय ने हर छण पीर सही है श्वासों की तुम संग प्रीत लगी है तुमको लेकर बात बढ़ी है तुम बिन चॆन कहां से पाऊँ प्रिय कैसे, फिर तुम्हें मनाऊँ। चितवन ऐसी खिली कली सी स्वर लहरी है जल – तरंग सी नयनों की झपकी, साझं ढली सी बिछड़ा सावन कहाँ से लाऊँ प्रिय कैसे, फिर तुम्हें मनाऊँ। नेह मधुर …

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पहला नशा, पहला खुमार – मजरूह सुल्तानपुरी

चाहे तुम कुछ ना कहो, मैने सुन लिया के साथी प्यार का मुझे चुन लिया, चुन लिया, मैने सुन लिया पहला नशा, पहला खुमार नया प्यार है, नया इंतज़ार कर लू मैं क्या अपना हाल, ऐ दिल-ए-बेकरार, मेरे दिल-ए-बेकरार, तू ही बता उड़ता ही फिरूँ इन हवाओं में कहीं या मैं झूल जाऊँ इन घटाओं में कहीं एक कर दूँ …

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चलो हम दोनों चलें वहां – नरेंद्र शर्मा

भरे जंगल के बीचो बीच, न कोई आया गया जहां, चलो हम दोनों चलें वहां। जहां दिन भर महुआ पर झूल, रात को चू पड़ते हैं फूल, बांस के झुरमुट में चुपचाप, जहां सोये नदियों के कूल; हरे जंगल के बीचो बीच, न कोई आया गया जहां, चलो हम दोनों चलें वहां। विहंग मृग का ही जहां निवास, जहां अपने …

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बबम बम बबम बम बम लहरी – कैलाश खेर

Haath jod ke bolee kawarja – (2) tino lok basaaye bastee me – (2) aap base viraane me ji, aafate viraane me ajee raam bhajo jee, raam bhajo jee raam bhajo jee, raam bhajo jee shiv ka vandan kiya karo ajee shiv ka vandan kiya karo jee bagad bam, babam bam babam bam bamleharee – (4) Meree ek suno antaryaamee, …

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