मजदूर दिवस पर हिंदी कविता - मैं एक मजदूर हूं

मजदूर दिवस पर हिंदी कविता: मैं एक मजदूर हूं

विश्व भर में अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस “1 मई” के दिन मनाया जाता है। किसी भी देश की तरक्की उस देश के किसानों तथा कामगारों (मजदूर / कारीगर) पर निर्भर होती है। एक मकान को खड़ा करने और सहारा देने के लिये जिस तरह मजबूत “नीव” की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, ठीक वैसे ही किसी समाज, देश, उद्योग, संस्था, व्यवसाय को खड़ा करने के लिये कामगारों (कर्मचारीयों) की विशेष भूमिका होती है।

इसे दुनिया के लगभग 80 देशों में राष्ट्रीय अवकाश के रुप में भी घोषित किया गया है जबकि बहुत सारे देशों में इसे अनाधिकारिक तौर पर मनाया जाता है। ये USA और कैनेडा है, विभिन्न क्षेत्रों में काम करने वाले मजदूरों की महान उपलब्धियों को मनाने के लिये वार्षिक अवकाश के रुप में सितंबर महीने के पहले सोमवार को इसे (श्रमिक दिवस) मनाया जाता है।

मैं एक मजदूर हूं
भगवान की आंखों से मैं दूर हूं

छत खुला आकाश है
हो रहा वज्रपात है
फिर भी नित दिन मैं
गाता राम धुन हूं
गुरु हथौड़ा हाथ में
कर रहा प्रहार है
सामने पड़ा हुआ
बच्चा कराह रहा है
फिर भी अपने में मगन
कर्म में तल्लीन हूं
मैं एक मजदूर हूं
भगवान की आंखों से मैं दूर हूं।

आत्मसंतोष को मैंने
जीवन का लक्ष्य बनाया
चिथड़े-फटे कपड़ों में
सूट पहनने का सुख पाया
मानवता जीवन को
सुख-दुख का संगीत है
मैं एक मजदूर हूं
भगवान की आंखों से मैं दूर हूं।

राकेशधर द्विवेदी

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