धमनी विकार: कारण व योगिक उपचार - Arterial Disorders

धमनी विकार: कारण व योगिक उपचार – Arterial Disorders

धमनियाँ (Arteries) वे रक्त वाहिकाएँ हैं, जो हृदय से ऑक्सीजन युक्त रक्त को शरीर के विभिन्न भागों तक पहुँचाती हैं। इन धमनियों में किसी प्रकार की रुकावट, संकुचन, कठोरता या लचीलापन कम हो जाने से रक्त ही धमनी विकार कहा जाता है। धमनियों का यह विकार शरीर के रक्त संचार तंत्र (Circulatory System) को प्रभावित करता है, जिसके परिणामस्वरूप हृदय, मस्तिष्क, गुर्दे और पैरों में रक्त की आपूर्ति कम हो जाती है। यदि इसका उपचार समय पर न किया जाए तो यह दिल का दौरा (Heart Attack), ब्रेन स्ट्रोक (Brain Stroke) या गैंग्रीन (Gangrene) जैसी गंभीर स्थितियों का कारण बन सकता है।

मुख्य प्रकार:

1. एथेरोस्क्लेरोसिस (Atherosclerosis)

धमनियों में कोलेस्ट्रॉल, वसा, कैल्शियम तत्व, कोशिकीय अवशेष और फाइब्रिन जमा होकर प्लाक (Plaque) बनाते हैं। इस प्लाक के कारण धमनियाँ संकरी हो जाती हैं। परिणामस्वरूप हृदय, मस्तिष्क और शरीर के अन्य अंगों में रक्त का प्रवाह धीमा व बाधित हो जाता है। अंगों तक पर्याप्त मात्रा में पोषक तत्व व ऑक्सीजन नहीं पहुँच पाते।

2. आर्टिरियोस्क्लेरोसिस (Arteriosclerosis)

दो शब्दों से मिलकर बना है। आर्टिरी+स्क्लेरोसिस, आर्टरी अर्थात धमनी और स्क्लेरोसिस का मतलब कठोर होना। उम्र बढ़ने अथवा धमनियों जीर्ण-शीर्ण के कारण धमनियाँ कम लचीली, कठोर व मोटी हो जाती हैं, जिससे रक्त का प्रवाह धीमा हो जाता है। परिणामस्वरूप, प्रभावित धमनियों से आपूर्ति करने वाले अंगों को पर्याप्त रक्त नहीं मिल पाता और हृदय पर दबाव बढ़ जाता है।

3. पेरिफेरल आर्टरी डिजीज (PAD)

जब हृदय से दूर के अंग जैसे पैर, टाँगें, बाँहें या शरीर के अंगों को रक्त की आपूर्ति करने वाली धमनियों में प्लाक जमा होने लगे तो रक्त में रुकावट व धमनियाँ संकुचित होने से पैरों में सुन्नता, दर्द और कमजोरी हो जाती है।

4. कोरोनरी आर्टरी डिजीज (CAD)

हृदय को रक्त ले जाने वाली धमनियों में प्लाक जमा होने से उनमें रक्त प्रवाह कम हो जाता है और वे संकुचित तथा कठोर हो जाती हैं। हृदय को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन न मिलने से हृदय रोग हो सकते हैं।

5. थ्रोंबोएम्बोलिज्म (Thromboembolism)

धमनी में बना खून का थक्का (Blood Clot) टूटकर रक्त में बहता हुआ शरीर के किसी अन्य हिस्से में जाकर किसी संकरी रक्त वाहिका में फँस जाता है। रक्त प्रवाह को रोक कर हृदय, मस्तिष्क, फेफड़ों या अन्य अंगों में रक्त की आपूर्ति बंद कर सकता है।

6. धमनीविस्फार (Aneurysm)

जब धमनी की दीवार किसी स्थान पर कमजोर होने पर प्रवाहित रक्त में दबाव के कारण फूल जाती है या गुब्बारे जैसी सूजन बनाती है तो उसे एन्यूरिज्म कहते हैं।

7. रेनॉड की समस्या (Raynaud’s disease)

यह एक धमनी और रक्त संचार संबंधी विकार है, जिसमें अधिक ठंड, तनाव या भावनात्मक उत्तेजना के कारण शरीर के कुछ हिस्सों, विशेषकर, हाथ और पैरों की उंगलियों, नाक, होंठ और कान की छोटी रक्त धमनियों में अचानक सिकुड़न आ जाती है। परिणामस्वरूप, उन हिस्सों में रक्त का प्रवाह कम होने से त्वचा का रंग सफेद व पीला हो जाता है। वहाँ सुन्नपन, झुनझुनी और दर्द जैसी स्थिति बन जाती है। लंबे समय तक यह स्थिति बने रहने पर अंगुलियों में अल्सर जैसी समस्या का खतरा हो सकता है।

8. कैरोटिड धमनी रोग (CAD)

गर्दन के दोनों ओर दो कैरोटिड धमनियाँ होती हैं, जो मस्तिष्क और चेहरे तक रक्त पहुँचाती हैं। कैरोटिड धमनियों में प्लाक जमा होने से रक्त व ऑक्सीजन की आपूर्ति घट जाती है, जिससे स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।

धमनी विकार के कारण:

  • अस्वस्थकर जीवन-शैली: अत्यधिक जंक फूड, तले हुए पदार्थ, अधिक कोलेस्ट्रॉल व संतृप्त वसा, धूम्रपान व शराब, व्यायाम की कमी, हाईपरटेंशन, तनाव व अधिकता।
  • शारीरिक कारण: उच्च रक्तचाप, मधुमेह (Diabetes), मोटापा (Obesity), शरीर में सूजन (Inflammation), LDL और ट्राइग्लिसराइड्स का बढ़ना।
  • आयु एवं आनुवांशिक कारण: उम्र बढ़ने के साथ धमनियाँ कठोर हो जाती हैं।
  • अन्य कारण: अधिक नमक का सेवन, शारीरिक श्रम की कमी, अवसाद, क्रोध, मानसिक उत्तेजना।

धमनी विकार के यौगिक उपचार (Yogic Management):

योग धमनियों की लोच (Elasticity), रक्त प्रवाह, हृदय की क्षमता को बढ़ाने में मददगार है। ब्लड प्रेशर को संतुलित करने और तनाव नियंत्रण में अत्यंत प्रभावी है। इसमें सूक्ष्म क्रियाएँ, आसन, प्राणायाम, ध्यान, आहार आदि का संयुक्त प्रभाव आवश्यक है।

सूक्ष्म क्रियाएँ:

ग्रीवा चालन (गर्दन को आगे-पीछे, दाएँ-बाएँ घुमाना, गर्दन को घुमाकर घुमाना)।

स्कैपुला स्ट्रेथनिंग एक्सरसाइज (कंधे के पीछे की चपटी हड्डी अर्थात् शोल्डर ब्लेड) बैठकर या खड़े होकर दोनों हाथों को तीन स्ट्रेच। श्वास भरते हुए कंधों को धीरे-धीरे पीछे खींचें, दोनों स्केपुला को पास लाने का प्रयास करें, छाती को फैलाएँ। श्वास छोड़ते हुए कंधों को ढीला छोड़ दें।

स्कन्ध चिंघाड़, स्कन्ध चक्र, टाँगों व भुजाओं आदि क्रियाओं का प्रतिदिन 10-15 मिनट अभ्यास करें।

आसन:

सूर्य नमस्कार, त्रिकोणासन (Trikonasana – Triangle Pose Asana), भुजंगासन (Bhujangasana – Cobra Pose), सेतुबंधासन (Bridge Pose), अर्धमत्स्येन्द्रासन (Half Lord of the Fishes Pose) व शवासन (Corpse Pose) आदि का अभ्यास पूरे शरीर में रक्त प्रवाह को व्यवस्थित करता है। धमनियों में जमा वसा को कम करने, उन्हें मजबूत, लचीला और अवरोध-मुक्त रखने में मदद करता है।

प्राणायाम:

अनुलोम-विलोम, नाड़ी शोधक श्वास से रक्त में पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन पहुँचती है, जिससे धमनियों की दीवारें लचीली व स्वस्थ रहती हैं। भ्रामरी व उज्जायी प्राणायाम का अभ्यास मानसिक शांति व हृदय की कार्य-क्षमता को बढ़ाने में सहायक है।

ध्यान (Meditation):

मानसिक तनाव कम करता है, जो धमनी विकार का मुख्य कारण है। पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम सक्रिय, रक्तचाप सामान्य, कॉर्टिसोल कम व धमनियों की सूजन घटती है।

आहार:

फाइबर युक्त भोजन (सलाद, फलियाँ, जौ, ओट्स), हरी सब्जियाँ (पालक, मेथी, ब्रोकली), सूखे मेवे (अखरोट, बादाम), अच्छे फैट, लहसुन धमनी साफ करने में उपयोगी, हल्दी (Anti-inflammatory), नींबू पानी व गुनगुना पानी।

परहेज:

डिब्बा बन्द, फ्रिज्ड व तला हुआ भोजन, अधिक चीनी और नमक, कोल्ड ड्रिंक, शराब, धूम्रपान, अधिक घी-तेल आदि।

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