महिलाओं में मोटापा और यौगिक उपचार: Obesity in Women and Yoga

महिलाओं में मोटापा और यौगिक उपचार: Obesity in Women and Yoga

वर्तमान में महिलाओं में मोटापा तेजी से बढ़ रहा है। अकेले भारत में मोटापे से ग्रस्त महिलाओं की संख्या अनुमानत: 5 करोड़ है, जो कुल महिलाओं की संख्या का 10 प्रतिशत है। महिलाओं में मोटापे के मुख्य कारण उनके हार्मोन में परिवर्तन होना, चयापचय का ठीक न होना, गलत जीवन-शैली तथा गर्भावस्था आदि हैं।

महिलाओं में मोटापे के कारण:

1. भोजन

जो महिलाएं तला-भुना, तेज मसालेदार, बाजार में बना हुआ या मैदा युक्त भोजन करती हैं, बार-बार खाती हैं, या भूख से अधिक खाने की आदत से ग्रस्त रहती हैं, उनके शरीर में मोटापा तेजी से बढ़ता है।

2. निष्क्रियता

जो महिलाएं घर का कार्य स्वयं नहीं करतीं, दिन के समय बिस्तर में विश्राम करती रहती हैं, सामान्य से अधिक सोती हैं, तथा कोई शारीरिक कार्य नहीं करतीं, उनका वजन तेजी से बढ़ता है और वे मोटापे का शिकार होने लगती हैं।

3. हाइपोथायरॉइडिज्म

महिलाओं में थायरॉइड ग्रंथि का दोष होना आम समस्या है। जब थायरॉइड ग्रंथि कम सक्रिय होती है, तो उससे बनने वाले हार्मोन रक्त में सामान्य से कम प्रवाहित होते हैं। इससे शरीर का चयापचय कमजोर हो जाता है, जिसके कारण शरीर में मोटापा बढ़ने की समस्या बढ़ जाती है।

4. पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS)

जिन महिलाओं में PCOS का दोष पाया जाता है, वे तेजी से मोटापे का शिकार होने लगती हैं, क्योंकि PCOS का रोग होने पर शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस का दोष भी आ जाता है। इससे रक्त में इंसुलिन की मात्रा बढ़ जाती है और पेट के आस-पास के क्षेत्र में चर्बी जमा होने से मोटापा बढ़ता है।

5. पुरुष हार्मोन का असंतुलन होना

कई बार महिलाओं में एंड्रोजन नामक पुरुष हार्मोन बढ़ने तथा महिला हार्मोन, जैसे कि एस्ट्रोजन व प्रोजेस्टेरोन के असंतुलित होने पर शरीर का चयापचय कमजोर होने लगता है। इससे शरीर का मोटापा बढ़ने लगता है।

6. तनाव व अनिद्रा का रोग होना

जो महिलाएं तनाव, चिंता, अनिद्रा आदि दोषों से ग्रसित होती हैं, उनके शरीर में कॉर्टिसोल नामक हार्मोन का स्तर बढ़ने लगता है, जो मोटापे को बढ़ाने में सहायक है।

7. गर्भकाल से गुजरना

गर्भकाल में अधिकांशतः महिलाएं भोजन अधिक मात्रा में खाती हैं, लेकिन कोई शारीरिक श्रम नहीं करतीं और व्यायाम न करने के कारण शरीर का वजन बढ़ने लगता है।

8. प्रसव के बाद

महिलाएं कई बार प्रसव के कई महीनों तक विश्राम अधिक करती हैं। वे भोजन अधिक मात्रा में ग्रहण करती हैं, जो उनके मोटापे का कारण बनता है।

9. मधुमेह का रोग

मधुमेह का रोग होने पर शरीर ऊर्जा के लिए चर्बी पर निर्भर हो जाता है, जिससे शरीर अधिक चर्बी का निर्माण करने लगता है। इससे भी महिलाओं में मोटापा बढ़ता चला जाता है।

10. रजस्वला निवृत्ति

रजोनिवृत्ति के बाद महिलाओं में मोटापा बढ़ना सामान्य बात है। इसके मुख्य कारण हार्मोन का असंतुलन, चयापचय का धीमा होना व शरीर में कैलोरी को जलाने की गति कम होना है, जिनके कारण शरीर में अधिक चर्बी संचित होने लगती है।

महिलाओं में मोटापे के दुष्परिणाम:

महिलाओं में मोटापा होने के केवल सामान्य कारण ही नहीं होते, बल्कि महिला हार्मोन में होने वाले परिवर्तन भी होते हैं, जिनका उनके शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है। महिलाओं में मोटापे के दुष्परिणाम निम्नलिखित हो सकते हैं:

1. मासिक रोग

महिलाओं में मोटापे के कारण मासिक धर्म की अनियमितता, PCOS, PCOD, चेहरे पर बाल आना, चेहरे पर कील-मुंहासे होना, गर्भधारण में कठिनाई होना व गर्भाशय में गांठ का होना आदि रोगों की संभावना बढ़ जाती है।

2. गर्भकाल में होने वाले रोग

महिलाओं में मोटापे के कारण गर्भकाल में जेस्टेशनल डायबिटीज, उच्च रक्तचाप का रोग, श्वास फूलना, दमे का रोग, कमर दर्द तथा प्रसव के समय विभिन्न कठिनाइयां आदि रोगों के अवसर अधिक होते हैं।

3. उच्च रक्तचाप व हृदय रोग

महिलाओं में शरीर में मोटापा होने पर उच्च रक्तचाप व हृदय रोग होने की संभावना बढ़ जाती है।

4. हड्डी रोग

जब वजन अधिक होने पर शरीर में घुटने का दर्द, एड़ी का दर्द, कमर के निचले भाग व कूल्हों में दर्द की संभावना अधिक हो जाती है, जिसके कारण रोगी का चलना, घूमना व घर से बाहर निकलना प्रभावित होता है।

5. मधुमेह रोग

जब शरीर का भार अधिक होता है तो जानकारी अधिक दबाव तथा कोशिकाओं में संवेदीकरण कमजोर होता है, जिसके कारण भोजन में शर्करा वाले भाग को ऊर्जा में बदलने के लिए अधिक इंसुलिन की आवश्यकता होती है। परिणामस्वरूप, अग्न्याशय को अधिक कार्य करना पड़ता है, जिसके कारण मधुमेह टाइप-2 होने की संभावना बढ़ जाती है।

6. पाचन व श्वसन संबंधी रोग

जिन महिलाओं में मोटापा अधिक होता है, उन्हें तला हुआ भोजन व गरिष्ठ भोजन अधिक प्रिय होता है। भूख से अधिक खाना, बार-बार खाना तथा गैर समय खाना उनकी आदत भी बन जाती है, जिससे अम्ल-पित्त का रोग, गैस्ट्रिक रोग, पित्ताशय की पथरी, लिवर का मोटापा, अल्सर, पेट व श्वसन संबंधी रोग होने का खतरा बढ़ जाता है।

महिलाओं में मोटापा घटाने के लिए उपचार:

नियमित योगाभ्यास, सुपाच्य भोजन एवं स्वस्थ दिनचर्या को अपनाकर महिलाओं में मोटापे को नियंत्रित किया जा सकता है।

यौगिक उपचार:

शुद्धि क्रियाएं:

कुंजल और एनीमा का अभ्यास निपुण शिक्षक के मार्ग-दर्शन में करें।

आसन:

चक्कीचालनासन, नौका संचालनासन, लुढ़कना सर्पासन, गतात्मक नौकासन, उत्तानपादासन, शलभासन, उदियानबन्धासन, पवनमुक्तासन (Pawanmuktasana – Wind Relieving Pose), बालक्रीड़ासन व शवासन (Shavasana) का अभ्यास मोटापा कम करने के लिए प्रभावकारी है।

प्राणायाम:

बाह्य कुम्भक, उदियान बंध (Uddiyana Bandha), अग्निसार प्राणायाम (Agnisar Pranayama) एवं कपालभाति प्राणायाम (Kapalbhati Pranayama) का अभ्यास महिलाओं में मोटापे को दूर करने में लाभकारी है।

आहार नियंत्रण:

भोजन ग्रहण करने से 15 मिनट पूर्व एक गिलास खट्टा नींबू गुनगुने व साधिक आहार भूख से कम लें। भोजन से वसा व शर्करा को कम कर दें। प्रोटीन, विटामिन व खनिज लवण की भोजन में कमी न करें। अंकुरित अनाज, दलिया, खिचड़ी व उबली हुई सब्जियों को भोजन का हिस्सा बना लें।

अन्य सुझाव:

  • प्रातःकाल गुनगुने पानी में नींबू व शहद मिलाकर उसका सेवन करें।
  • थायरॉइड ग्रंथि को स्वस्थ रखने के लिए गले की मालिश, सिंहगर्जन व उज्जायी प्राणायाम का नियमित अभ्यास करें।
  • प्रसन्नचित रहें। सेवा का कार्य अवश्य करते रहें।

Check Also

Environment Quotes in Hindi पर्यावरण पर अनमोल विचार

पर्यावरण पर अनमोल विचार विद्यार्थियों के लिए

पर्यावरण पर अनमोल विचार विद्यार्थियों और बच्चों के लिए: एक स्वच्छ वातावरण एक शांतिपूर्ण और …

Leave a Reply