शेर-चिड़िया की दोस्ती: ताकत पर घमंड नहीं करना चाहिए

शेर-चिड़िया की दोस्ती: ताकत पर घमंड नहीं करना चाहिए

शेर-चिड़िया की दोस्ती: एक जंगल में शेर की गुफा के पास ही पेड़ पर चिड़िया का घोंसला था। शेर और चिड़िया दोनों पड़ोसी। दोनों सुबह-सुबह अपने काम पर निकल जाते।

एक दिन शेर जल्दी वापस आ गया। उसने देखा पेड़ पर बहुत-सी चिड़िया बैठी आपस में चीं-चीं यानी बातें कर रही हैं। उसे यह अच्छा नहीं लगा। उसने कहा, “तुम चिड़िया सारा दिन चीं-चीं करती रहती हो।  इससे दूसरे जानवरों को परेशानी होती है। तुम इतना क्यों बोलती हो?”

चिड़िया बोली, “वाह! हम तो बोलती ही हैं, जो एक पेड़ से दूसरे पेड़ तक सुनाई नहीं देता। तुम तो दहाड़ते रहते हो। तुम्हारी दहाड़ से जंगल में भूचाल-सा आ जाता है। जानवर डरकर, परेशान होकर इधर-उधर भागने लगते हैं।”

शेर-चिड़िया की दोस्ती: गोविंद शर्मा

“मैं जंगल का राजा हूं। दूसरे जानवरों को डराकर रखना मेरा काम है।”

“अपने को राजा कहते हो और डराते भी हो। ताकत का ज्यादा घमंड नहीं करना चाहिए। ताकत का इस्तेमाल दूसरों का भला करने में करना चाहिए।”

“चिड़िया की बच्ची मुझे उपदेश देती है। तेरी चीं-चीं बंद कर। वरना … ।”

“वरना क्या कर लोगे? मेरे घर तक आकर तो दिखाओ। मैं तो कई बार उड़ते-उड़ते तुम्हारी गुफा में गई हूं।”

शेर पेड़ की सबसे ऊंची डाली पर बने घोंसले तक नहीं जा सकता था। वह गुस्से में गुर्राता हुआ अपनी गुफा में चला गया।

अगले दिन सुबह-सुबह ही शेर चिड़िया की तरफ गुस्से से देखता हुआ अपने काम पर चला गया। चिड़िया अपनी मस्ती में उड़ती रही और दूर चली गई। अचानक तेज तूफान आ गया। तूफान इतना तेज था कि न केवल चिड़िया का घोंसला उड़ गया बल्कि कई पेड़ भी उखड़ गए।

दो पेड़ इस तरह गिरे कि शेर की गुफा का मुंह बंद हो गया। तूफान रुकते ही चिड़िया अपना घर संभालने आ गई। उसने देखा कि
न केवल उसका घर उजड़ गया बल्कि पेड़ भी उखड़ गया है। यह देखकर वह अफसोस करने नहीं बैठी, बल्कि इधर-उधर से तिनके
इकट्ठे कर पास के दूसरे पेड़ पर घोंसला बनाने में जुट गई।

इतने में भी वहां शेर आ गया। उसने चिड़िया को नया घोंसला बनाते देखकर कहा, “न केवल मैं बल्कि मेरा घर भी ताकतवर है। वह ऐसे तूफानों में उड़ता नहीं है।”

चिड़िया ने कहा, “देखना अभी थोड़ी देर में मेरा नया घर बन जाता है। फिर तुमसे बात करूंगी। हम लोग काम करने वाले होते हैं। बातों में समय नष्ट नहीं करते।”

चिड़िया का नया घोंसला बन गया। तभी उसने देखा कि शेर परेशानी में घूम रहा है।

“क्या हुआ? क्या तुम्हारी गुफा भी तूफान में उड़ गई?”

“नहीं, पर दो पेड़ टूट कर वहां ऐसे गिरे हैं कि गुफा में जाने का रास्ता बंद हो गया।”

चिड़िया उड़कर वहां गई। थोड़ी सी जगह थी। चिड़िया तो उसमें से गुफा में घुस गई। बाहर आकर बोली, “भीतर तो सब ठीक
है। तुम तो बहुत ताकत वाले हो। पेड़ हटाकर भीतर चले जाओ। लगता है थोड़ी देर में बरसात आएगी। तूफान भी आ सकता है।”

“लेकिन मैं उन पेड़ों को वहां से नहीं हटा सकता।”

“क्यों तुम्हें तो बड़ा घमंड है न अपनी ताकत का। मुझे देखो, मेरा घर तो टूट कर उड़ गया था। फिर भी मैंने अपना नया घर बना
लिया। तुम्हारा तो घर सही-सलामत है, फिर भी तुम उसका दरवाजा नहीं खोल सकते।”

चिड़िया की बात पर शेर को गुस्सा नहीं, थोड़ी शर्म आई। बोला, “तुम ठीक कहती हो। जानवरों को डराने-मारने वाली ताकत
आज किसी काम नहीं आ रही है। तुम ही बताओ यह दरवाजा कैसे खुलेगा?”

चिड़िया जिद्दी नहीं थी। मुसीबत में फंसे  शेर की मदद के लिए वह तैयार हो गई।

दो हाथियों ने मिलकर उन पेड़ों को उठाकर दूर फैंक दिया
दो हाथियों ने मिलकर उन पेड़ों को उठाकर दूर फैंक दिया

बोली, “ताकत का घमंड किए बिना हाथी के पास जाओ। उसे दोस्त के रूप में कहना कि वह पेड़ हटा दे। जंगल में यह काम हाथी ही कर सकता है।”

यही हुआ दो हाथियों ने मिलकर उन पेड़ों को उठाकर दूर फैंक दिया। शेर आराम से अपनी गुफा में चला गया। तत्काल वापस आया और हाथियों को धन्यवाद कहा।

फिर चिड़िया से बोला, “आज से हम दोनों अच्छे पड़ोसी और अच्छे दोस्त। रात को यदि तूफान आए तो तुरंत मेरी गुफा में चली आना। अब वह तुम्हारा भी घर है।”

चिड़िया ने जवाब में जोरों से चीं-चीं ही किया।

~ ‘शेर-चिड़िया की दोस्ती’ Hindi story by ‘गोविंद शर्मा

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