आस्तीन का सांप

आस्तीन का सांप:

एक जुलाहा बहुत सुंदर गलीचे तैयार करता था। रानी को उसकी कारीगरी बहुत पसंद आई और उसने उसे महल में काम करने के लिए रख लिया।

राजा का मंत्री उससे ईर्ष्या करने लगा। उसने सोचा कि किसी तरह जुलाहे को महल से निकलवा देना चाहिए। एक दिन मंत्री राजा से बोला, “महाराज! जुलाहे के गलीचों में अब पहले जैसा हुनर नहीं झलकता।” राजा मंत्री की बातों में आ गया और उसने जुलाहे को बुलाकर कहा, “अब तुम यहां से चले जाओ।”

आस्तीन का सांप: दर्शन सिंह ‘आशट’

जुलाहा निराश होकर घर लौट गया। मंत्री बड़ा कपटी था। वह चाहता था कि किसी तरह राजकुमार का अपहरण करवाकर अपने बेटे को राजा बनाने की साजिश में सफल हो जाए।

एक दिन जुलाहा रात के समय सुनसान रास्ते से गुजर रहा था। उसे एक पुरानी सराय दिखाई दी, तो वह रात बिताने के लिए वहीं ठहर गया।

सराय के एक कोने में चादर बिछाकर वह सोने की तैयारी कर ही रहा था कि उसे चार-पांच लोगों के आने की आहट सुनाई दी। वे आपस में बातें करते हुए भीतर आए। जुलाहा तुरंत सतर्क हो गया और उनकी बातें ध्यान से सुनने लगा। उन लोगों ने जुलाहे को सोया हुआ समझकर अपनी बातचीत जारी रखी।

एक आदमी धीरे-धीरे कह रहा था, “राजा के मंत्री ने मुझे पचास हजार रुपए तो दे दिए हैं। बाकी पचास हजार रुपए वह राजकुमार के अपहरण के बाद देगा। इसलिए हम अपनी योजना के अनुसार आने वाले रविवार को राजकुमार का अपहरण करके ले जाएंगे।

इस काम में मंत्री हमारी पूरी मदद करेगा।” सराय की एक खिड़की से आती चांदनी में जुलाहे ने उनमें से दो लोगों को पहचान लिया। ये वही लोग थे, जो अक्सर मंत्री के पास आया करते थे और आपस में कानाफूसी करते रहते थे।

सुबह होते ही जुलाहा तुरंत अपने घर लौट आया। उसने पहुंचते ही एक अनोखा गलीचा तैयार किया। फिर वह महल के दरवाजे पर पहुंचा। उसने मंत्री से बचते हुए अपने परिचित एक पहरेदार के हाथों वह गलीचा रानी के पास भिजवा दिया और स्वयं वहां से चला गया।

राजा ने गलीचा रानी को दिखाया। रानी को कुछ गड़बड़ लगी। उसने राजा से कहा, “राज्य के विद्वान को बुलाइए। इस गलीचे में कोई गहरा भेद छिपा हुआ लगता है। इस पर कोई लिपि उलटे ढंग से लिखी हुई दिखाई दे रही है। इसे समझने वाले किसी विद्वान की आवश्यकता है।”

राज्य के विद्वान को तुरंत बुलाया गया। उसने अपनी बुद्धि लगाकर गलीचे की लिपि को समझा और बताया कि कोई अनहोनी होने वाली है। हालांकि उसने इस रहस्य की बात केवल राजा और रानी को ही बताई।

राज्य के विद्वान ने जुलाहे द्वारा उलटे अक्षरों में लिखी लिपि पढ़कर सुनाई तो राजा और रानी के होश उड़ गए। गलीचे पर लिखा था, “आने वाले रविवार की रात आपके मंत्री की साजिश से आपके राजकुमार का अपहरण किया जाना है। सावधान!”

नीचे लिखाथा, “आपका सेवक, वही जुलाहा।”

रविवार की रात जब वही लोग महल के बाहर सैर कर रहे राजकुमार पर झपटे, तो पहले से सतर्क राजा के वफादार सैनिकों ने उन्हें तुरंत दबोच लिया।

मंत्री, उसका बेटा और उनके साथ आए अन्य लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया। मंत्री के बेटे ने भेष बदल रखा था, ताकि उसे कोई पहचान न सके। राजा ने तुरंत आदेश दिया कि जुलाहा जहां भी हो, उसे ढूंढकर महल में पेश किया जाए। जुलाहे को खोजकर महल में लाया गया।

राजा ने जुलाहे को गले लगाते हुए कहा, “मेरे प्यारे कलाकार! तुमने तो कमाल कर दिया। अगर तुम अपने गलीचे पर यह रहस्य लिखकर मेरे पास न पहुंचाते, तो मेरे राजकुमार का सचमुच अपहरण हो सकता था। मैं तुम्हारा ऋणी हूं। अपने धोखेबाज मंत्री की कपटपूर्ण बातों में आकर मैंने तुम्हें महल से निकाल दिया था। उसे उसके अपराध की उचित सजा मिलेगी। तुम्हारे साथ किए गए अन्याय के लिए मुझे बहुत पछतावा है।”

इसके बाद जुलाहा फिर आदरपूर्वक महल में काम करने लगा।

~ दर्शन सिंह ‘आशट’ (डॉ.)

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