प्रताप की प्रतिज्ञा - श्याम नारायण पांडेय

प्रताप की प्रतिज्ञा: श्याम नारायण पांडेय की वीर रस हिंदी कविता

प्रताप की प्रतिज्ञा: श्याम नारायण पांडेय – Man Singh, a Rajput, ( “Maan” in first line of third stanza) had aligned with Emperor Akbar of Delhi and had attacked Rana Pratap’s kingdom of Mewar. Rana Pratap kept fighting and resisting this assault. His velour and that of his legendary horse “Chetak” has been immortalized by famous poet Shyam Narayan Pandey in the famous epic “Haldighati“. Here is a small excerpt where Rana exhorts his solders To fight and defeat. Please also read other poems from Haldighati in this collection.

प्रताप की प्रतिज्ञा: श्याम नारायण पांडेय

गिरि अरावली के तरु के थे
पत्ते–पत्ते निष्कंप अचल
बन बेलि–लता–लतिकाएं भी
सहसा कुछ सुनने को निश्चल

वह बोल रहा था गरज–गरज
रह–रह कर में असि चमक रही
रव वलित गरजते बादल में
मानो बिजली थी दमक रही

वह ‘मान’ महा–अभिमनी है
बदला लेगा, ले बल अपार
कटि कस लो अब मेरे वीरो
मेरी भी उठती है कटार

संदेश यही, उपदेश यही
कहता है अपना देश यही
वीरो दिखला दो आत्म त्याग
राणा का है आदेश यही

जब तक स्वतंत्र यह देश नहीं
कट सकते हैं नख–केश नहीं
मरने, कटने का क्लेश नहीं
कम हो सकता आवेश नहीं

परवाह नहीं, परवाह नहीं
मैं हूं फकीर, अब शाह नहीं
मुझको दुनियाँ की चाह नहीं
सह सकता मन की आह नहीं

यह तो जननी की ममता है
जननी भी सिर पर हाथ न दे
मुझको इसकी परवाह नहीं
चाहे कोई भी साथ न दे

विष बीज न मैं बोने दूंगा
अरि को न कभी सोने दूंगा
पर कभी कलंकित माता का
मैं दूध नहीं होने दूंगा

~ ‘प्रताप की प्रतिज्ञा’ poem by ‘श्याम नारायण पांडेय

The battle fought at the Haldighati mountain pass on 18th June 1576 is one of the most famous battles ever fought in Indian history. It was a bloody contestation of power between the all powerful Mughals and local Rajput rulers. A tale of great bravery, loyalty, ingenuity and of winning against all odds. For although there was a greater number of casualties amongst the Rajput army, who were also significantly smaller in manpower and weaker in weaponry, the Mughals failed to capture or overthrow the Rajputs. The Haldighati pass takes its name from the turmeric (haldi) hue of the soil. The shrine erected by Maharana Pratap of the Rajputs in honour of his beloved steed: Chetak can be seen near Haldighati. Haldighati also prides itself on its cottage industries; its rose products and mud art make particularly interesting souvenirs.

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One comment

  1. आपका पोस्ट पढ़ने में बहुत दिलचस्प है। यह बहुत जानकारी पूर्ण और सहायक है। आमतौर पर, मैं कभी भी ब्लॉग पर टिप्पणी नहीं करती हूं लेकिन आपका लेख इतना आश्वस्त करता है कि मैं खुद को इसके बारे में कहने के लिए नहीं रोक पाई । आप बहुत अच्छा काम कर रहे हैं, इसे बनाए रखें।