Prabhudayal Shrivastav

बाल-कविताओं का संग्रह: प्रभुदयाल श्रीवास्तव

अगर पेड़ में रुपए फलते: प्रभुदयाल श्रीवास्तव

टप् टप् टप् टप् रोज टपकते।
अगर पेड़ में रुपए फलते।

सुबह पेड़ के नीचे जाते
ढ़ेर पड़े रुपए मिल जाते।

अगर पेड़ में रुपए फलते

थैलों में भर-भर कर रुपए
हम अपने घर में ले आते।

मूंछों पर दे ताव रोज हम‌
सीना तान अकड़के चलते।

कभी पेड़ पर हम चढ़ जाते
जोर-जोर से डाल हिलाते।

पलक झपकते ढेरों रुपए
तरुवर के नीचे पुर जाते।

थक जाते हम मित्रों के संग‌
रुपए एकत्रित करते-करते।

एक बड़ा वाहन ले आते
उसको रुपयों से भरवाते।

गली-गली में टोकनियों से
हम रुपए भरपूर लुटाते।

वृद्ध गरीबों भिखमंगों की
रोज रुपयों से झोली भरते।

अगर पेड़ में रुपए फलते

निर्धन कोई नहीं रह पाते
अरबों के मालिक बन जाते।

होते सबके पास बगीचे
बड़े-बड़े बंगले बन जाते।

खाते-पीते धूम मचाते
हम सब मिलकर मस्ती करते।

~ प्रभुदयाल श्रीवास्तव

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