माँ तो माँ होती है - ओम प्रकाश बजाज

माँ तो माँ होती है: मातृ दिवस पर कविता

मातृ दिवस माता को सम्मान देने के लिए मनाया जाता है। एक मां का आँचल अपनी संतान के लिए कभी छोटा नहीं पड़ता। माँ का प्रेम अपनी संतान के लिए इतना गहरा और अटूट होता है कि माँ अपने बच्चे की खुशी के लिए सारी दुनिया से लड़ लेती है। एक मां का हमारे जीवन में बहुत बड़ा महत्व है, एक मां बिना ये दुनियां अधूरी है। मातृ दिवस मनाने का प्रमुख उद्देश्य मां के प्रति सम्मान और प्रेम को प्रदर्शित करना है भी है।

माँ तो माँ होती है: मातृ दिवस पर ओम प्रकाश बजाज जी की बाल-कविता

मम्मी – अम्मी – अम्मा – माता – माम्,
कुछ भी बुलाओ माँ तो माँ होती है।

अपने बच्चों पर जान देती है,
उनके लिए हर कष्ट सहती है।

अपनी कोख से जन्म देती है,
उन पर वारी – वारी जाती है।

पाल पोस कर बड़ा करती है,
गीले में सो कर सूखे में सुलाती है।

माँ का आदर सदा करना,
माँ का कहना हमेशा मानना।

माँ का दिल न कभी दुखाना,
माँ की आँख में आंसू न लाना।

~ “माँ तो माँ होती है” बाल-कविता – ओम प्रकाश बजाज

मदर्स डे (Mothers Day) या मातृ दिवस हर साल मई के दूसरे रविवार को मनाया जाता है, यह दिन परिवार कि माँ के साथ – साथ मातृत मातृत्व, मातृ बंधन और समाज की माताओ के प्रभाव के सम्मान में मनाया जाता है। दुनिया में लगभग 50 से ज्यादा देशो में मदर्स डे मनाया जाता है, जैसे की भारत, ऑस्ट्रेलिया, डेन्मार्क, फ़िनलैंड, इटली, बेल्जियम आदि देशो में मई के दूसरे रविवार को मनाया जाता है। कुछ देश ऐसे भी है, जहाँ यह 10 मई को मनाया जाता है, जैसे के मेक्सिको, लैटिन अमेरिका के कुछ जगहों पर, और थाईलैंड में तो 12 अगस्त को अपनी रानी के जन्मदिवस के अवसर पर मानते है। भले ही ये सारे देश अलग-अलग दिन को क्यों ना मानते हो, लेकिन इन सब का मक्सद एक ही है, और वो है, माँ का सम्मान करना।

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