होली आती याद दिलाती: पिछली होली की याद में हिंदी कविता

होली आती याद दिलाती: पिछली होली की याद में

होली आती याद दिलाती: भारत में होली का त्यौहारोत्सव सभी के जीवन मे बहुत सारी खुशियॉ और रंग भरता है, लोगों के जीवन को रंगीन बनाने के कारण इसे आमतौर पर ‘रंग महोत्सव’ कहा गया है। यह लोगो के बीच एकता और प्यार लाता है। इसे “प्यार का त्यौहार” भी कहा जाता है। यह एक पारंपरिक और सांस्कृतिक हिंदू त्यौहार है, जो प्राचीन समय से पुरानी पीढियों द्वारा मनाया जाता रहा है और प्रत्येक वर्ष नयी पीढी द्वारा इसका अनुकरण किया जा रहा है।

यह एक प्यार और रंगो का त्यौहार है जो प्रत्येक वर्ष हिन्दू धर्म के लोगों द्वारा आनन्द और उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह मन को तरोताज़ा करने का त्यौहार है,जो न केवल मन को तरोताजा करता है बल्कि रिश्तों को भी करता है। यह ऐसा त्यौहार है जिसे लोग अपने परिवार के सदस्यो और रिश्तेदारों के साथ प्यार और स्नेह वितरित करके मनातें हैं जो उनके रिश्तों को भी मजबूती प्रदान करता हैं। यह एक ऐसा त्यौहार हैं जो लोगों को उनके पुराने बुरे व्यवहार को भुला कर रिश्तों की एक डोर मे बॉधता हैं।

होली आती याद दिलाती: नीलकमल वैष्णव ‘अनिश’ की होली स्पेशल हिंदी कविता

होली आती याद दिलाती,
पिछली कितनी होली।

वो बचपन वाली होली,
वो गुब्बारों वाली होली,
वो सखियों वाली होली,
वो गुझियों वाली होली,
वो ठुमको वाली होली,
होली आती याद दिलाती,
पिछली कितनी होली।

हर होली अलबेली होती,
होली आती हमें बताती,
जाने कितने राज दिखाती,
होली आती रंग लगाती,
होली आती गले लगाती,
आकर सबको नहलाती,
तन मन की वो मैल हटाती…

होली आती याद दिलाती,
रंगों से तन-मन सहलाती,
भीगे-भीगे गीत सुनाती,
पिचकारी से रंग बरसाती,
भाभी, साली से रंग डलवाती,
होली आती याद दिलाती,
पिछली कितनी होली।

इस दिन लोग लाल रंग और लाल गुलाल का प्रयोग करते है जो केवल लाल रंग नही है बल्कि एक दूसरे से प्यार और स्नेह का भी प्रतीक हैं। वास्तव मे यह न केवल लोगों को बाहर से रंगता हैं, बल्कि उनकी आत्मा को भी विभिन्न रंगों मे रंग देता हैं। इसे साधारण त्यौहार कहना उचित नही है क्योंकि यह बिना रंगे व्यक्तियों को रंग देता हैं। यह लोगों के व्यस्त जीवन की सामान्य दिनचर्या मे एक अल्पविराम लाता हैं।

यह भारतीय मूल के हिंदुओं द्वारा हर जगह मनाया जाता है हालांकि, यह मुख्य रूप से भारत और नेपाल के लोगों द्वारा मनाया जाता है। यह एक त्यौहारी रस्म है, जिसमे सब एक साथ होलिका के आलाव को जलाते है, गाना गाते है और नाचते है, इस मिथक के साथ कि सभी बुरी आदतें और बुरी शक्तियॉ होलिका के साथ जल गयी और नई ऊर्जा और अच्छी आदतों से अपने जीवन में उपलब्धियों को प्राप्त करेंगें। अगली सुबह उनके लिये बहुत खुशियॉ लेकर आती है जिसे वे पूरे दिन रंग और जुआ खेलकर व्यक्त करते हैं।

∼ नीलकमल वैष्णव ‘अनिश’

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