चिंकी गिलहरी बहुत शैतान थी। कभी वह पलटू खरगोश की गाजर कुतर कर फेंक देती तो कभी नन्हू कछुहे के ऊपर बैठकर जंगल की सैर कर आती। एक बार तो उसने निफ़्टी गौरैया से शर्त लगाते हुए, जंगल के राजा शेरसिंह की पूँछ ही कुतर दी थी, जब वह झपकी ले रहा था। निफ़्टी को शर्त हारने के कारण कई …
Read More »माँ: गरीब विधवा माँ और उसके दृढ़ निश्चय की कहानी
अरे, मम्मी… आप क्यों पैरेंट टीचर मीटिंग में चल रही है और फिर से वही पुरानी हरी साड़ी पहनकर। दस साल का चिंटू चिढ़चिढ़ाता हुआ बोला। पर उसकी मम्मी तो ख़ुशी के मारे फूली ही नहीं समा रही थी। शहर के सबसे बड़े स्कूल में एक-एक पाई इकठ्ठा करके उसने अपने इकलौते बेटे का एडमिशन बड़ी मुश्किलों से करवाया था। …
Read More »पढ़ाकू शेर: एक तोतले शेर की कहानी जो पढना चाहता है
पढ़ाकू शेर: लेखिका ‘मंजरी शुक्ला’ चिड़ियाघर घूमते-घामते अचानक बबलू का सामना शेर से हो जाता है। डर के मारे बबलू के हाथ पैर काँपने लगते है। शेर हँसते हुए बोला – “डलो मत, मै सिर्फ़ तमातल और दाजल थाता हूँ”। “तुम… तुम तो तोतले हो!” बबलू ने आश्चर्य से कहा। “हाँ… थई पहचाना” शेर ने जवाब दिया। “मै परना चाहता …
Read More »सूरज की सर्दी: मंजरी शुक्ला की बच्चों के लिए कहानी
चारों ओर धुंध छाई हुई थी लोग आश्चर्य कर रहे थे कि सूरज क्यों नहीं निकला। पर बेचारा सूरज निकलता भी तो कैसे… वह तो आसमान में उकड़ूँ बैठा ठंड से काँप रहा था। सुबह से ही सूरज को बहुत ठंड लग रही थी। पर सूरज को इस तरह सर्दी में काँपते देख चाँद बहुत खुश था क्योंकि चाँद को …
Read More »अप्रैल फूल: मूर्ख दिवस की रोचक बाल-कहानी
आज शैतान मोंटू बन्दर को सुबह से ही बहुत मजा आ रहा था। आखिर 1 अप्रैल जो आने वाला था। वह हर साल इस दिन का बेसब्री से इंतज़ार करता था। आखिर इस दिन लोगों को मूर्ख बनाने में कोई ज्यादा डांट भी नहीं पड़ती थी, वरना वो तो पूरे साल किसी ना किसी को तंग करने के चक्कर में हमेशा …
Read More »नन्हे दोस्त: पक्षियों के लिए दाना-पानी की बाल-कहानी
“पूरी कॉलोनी में बस एक यही पेड़ बचा है हमारे लिए” नीतू गौरिया ने चुलबुल तोते से कहा। “मुझे तो समझ ही नहीं आ रहा है कि सब लोग पेड़ कटवा क्यों रहे है” चुलबुल ने दुखी होते हुए कहा। “अरे, तुम दोनों कहाँ चले गए थे?” पेड़ के झुरमुट से टिन्नू गिलहरी की आवाज़ आई। नीतू चहकते हुए बोली …
Read More »गब्बू का हैप्पी न्यू ईयर: नव वर्ष के उपलक्ष में हिंदी कहानी
गब्बू भालू बेच तो गुब्बारे रहा था पर उसका पूरा ध्यान, पेड़ पर लगे शहद के छत्ते पर था। मधुमक्खियाँ भी कम शैतान नहीं थी। वे भी अपने छत्ते में आराम से बैठकर गब्बू को देख रही थी और हँस रही थी। उन्होंने टॉमी कुत्ते को थोड़ा सा शहद देकर अपनी तरफ़ मिला लिया था। टॉमी को शहद इतना पसँद …
Read More »नई सुबह: साक्षरता प्रेरक प्रेरणादायक बाल कहानी
“काँच के अंदर झाँकने से किताब पढ़ने को नहीं मिल जाएगा” चाय की गुमटी से बापू गुस्से से चीखे जो लाइब्रेरी के पास ही बनी हुई थी। छोटू पर इस बात का कोई असर नहीं हुआ। वह चेहरे से बारिश की बूँदें पोंछता हुआ शीशे के अंदर देखता रहा। अंदर का दृश्य उसके लिए किसी स्वप्न लोक से कम नहीं …
Read More »सौदा: लालची बाप के बिकाऊ बेटे की हास्य कहानी
मेरे पिताजी से ज्यादा दरियादिल और महान इंसान मैंने आज तक नहीं देखा। दरियादिल इसलिए क्योंकि उनके दिल में कंजूसी और कृपणता दोनों का दरिया पूरे वेग के साथ बहता है और महान इसलिए क्योंकि वह कंजूसी के साम्राज्य के वो महान सम्राट है जिनकी टक्कर में कोई खड़ा ही नहीं हो सकता। घर हो या बाहर, वो जहाँ भी …
Read More »अंशु की बा: कस्तूरबा गांधी के जीवन से प्रेरित कहानी
“मुझे तो समझ ही नहीं आता कि तुम इतनी दब्बू क्यों हो?” मनीषा ने गुस्से से कहा। “हाँ, जो भी आता है, तुम्हें चार बातें सुना कर चला जाता है” अंकुर ने तुरंत कहा। अंशू सिर झुकाये अपने दोस्तों की बातें चुपचाप सुन रही थी। “अब कुछ बोलोगी भी या नहीं?” मनीषा ने तेज आवाज़ में कहा। “मुझे लगता है …
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