Poems In Hindi

बच्चों की हिन्दी कविताएं — 4to40 का हिन्दी कविताओ का संग्रह | Hindi Poems for Kids — A collection of Hindi poems for children. पढ़िए कुछ मजेदार, चुलबुली, नन्ही और बड़ी हिंदी कविताएँ. इस संग्रह में आप को बच्चो और बड़ो के लिए ढेर सारी कविताएँ मिलेंगी.

बरसों के बाद – गिरिजा कुमार माथुर

बरसों के बाद - गिरिजा कुमार माथुर

बरसों के बाद कभी हम–तुम यदि मिलें कहीं देखें कुछ परिचित–से लेकिन पहिचाने ना। याद भी न आये नाम रूप, रंग, काम, धाम सोचें यह संभव है पर, मन में माने ना। हो न याद, एक बार आया तूफान ज्वार बंद, मिटे पृष्ठों को पढ़ने की ठाने ना। बातें जो साथ हुईं बातों के साथ गईं आँखें जो मिली रहीं उनको भी जानें ना। ∼ गिरिजा …

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बांसुरी दिन की – माहेश्वर तिवारी

बांसुरी दिन की - माहेश्वर तिवारी

होंठ पर रख लो उठा कर बांसुरी दिन की देर तक बजते रहें ये नदी, जंगल, खेत कंपकपी पहने खड़े हों दूब, नरकुल, बेंत पहाड़ों की हथेली पर धूप हो मन की। धूप का वातावरण हो नयी कोंपल–सा गति बन कर गुनगुनाये ख़ुरदुरी भाषा खुले वत्सल हवाओं की दूधिया खिड़की। ∼ माहेश्वर तिवारी

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बाढ़ की संभावनाएं सामने हैं – दुष्यंत कुमार

बाढ़ की संभावनाएं सामने हैं - दुष्यंत कुमार

बाढ़ की संभावनाएं सामने हैं, और नदियों के किनारे घर बने हैं। चीड़-वन में आंधियों की बात मत कर, इन दरख्तों के बहुत नाज़ुक तने हैं। इस तरह टूटे हुए चेहरे नहीं हैं, जिस तरह टूटे हुए ये आइने हैं। आपके क़ालीन देखेंगे किसी दिन, इस समय तो पांव कीचड़ में सने हैं। जिस तरह चाहो बजाओ इस सभा में, …

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बातें – धर्मवीर भारती

बातें - धर्मवीर भारती

सपनों में डूब–से स्वर में जब तुम कुछ भी कहती हो मन जैसे ताज़े फूलों के झरनों में घुल सा जाता है जैसे गंधर्वों की नगरी में गीतों से चंदन का जादू–दरवाज़ा खुल जाता है बातों पर बातें, ज्यों जूही के फूलों पर जूही के फूलों की परतें जम जाती हैं मंत्रों में बंध जाती हैं ज्यों दोनों उम्रें दिन …

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बात बात में – शिवमंगल सिंह ‘सुमन’

बात बात में - शिवमंगल सिंह ‘सुमन’

इस जीवन में बैठे ठाले ऐसे क्षण भी आ जाते हैं जब हम अपने से ही अपनी–बीती कहने लग जाते हैं। तन खोया–खोया–सा लगता‚ मन उर्वर–सा हो जाता है कुछ खोया–सा मिल जाता है‚ कुछ मिला हुआ खो जाता है। लगता‚ सुख दुख की स्मृतियों के कुछ बिखरे तार बुना डालूं यों ही सूने में अंतर के कुछ भाव–अभाव सुना …

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बाल पत्रिकाएं – ओम प्रकाश बजाज

बाल पत्रिकाएं – ओम प्रकाश बजाज

बाल पत्रिकाओं में भी रूचि दिखाओ, खाली समय में इनका लाभ उठाओ। अपनी पसंद की बाल पत्रिकाएं, बुकस्टाल से लो या सीधे मंगाओं। कविताएं, कहानियां, लेखों, चुटकलों से, ज्ञान बढ़ाओ, मनोरंजन पाओ। इनमें छुपी रचनाएं देख – समझ कर, तुम भी साहस करो और कलम उठाओ। अपने मित्रों से अदला – बदली करके, कम खर्च में अधिक पत्रिकाएं जुटाओ। ज्ञान …

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बाँधो न नाव इस ठाँव, बन्धु – सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’

बाँधो न नाव इस ठाँव, बन्धु - सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’

बाँधो न नाव इस ठाँव, बन्धु! पूछेगा सारा गाँव, बन्धु! यह घाट वही जिस पर हँसकर, वह कभी नहाती थी धँसकर, आँखें रह जाती थीं फँसकर, कँपते थे दोनों पाँव बन्धु! बाँधो न नाव इस ठाँव, बन्धु! पूछेगा सारा गाँव, बन्धु! वह हँसी बहुत कुछ कहती थी, फिर भी अपने में रहती थी, सबकी सुनती थी, सहती थी, देती थी …

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बाज़ लोग – अनामिका

बाज़ लोग By Anamika

बाज़ लोग जिनका कोई नहीं होता‚ और जो कोई नहीं होते‚ कहीं के नहीं होते– झुण्ड बना कर बैठ जाते हैं कभी–कभी बुझते अलावों के चारो तरफ । फिर अपनी बेडौल‚ खुरदुरी‚ अश्वस्त हथेलियां पसार कर वे सिर्फ आग नहीं तापते‚ आग को देते हैं आशीष कि आग जिये‚ जहां भी बची है‚ वह जीती रहे और खूब जिये! बाज़ …

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भौंचक – ओम प्रकाश बजाज

भौंचक - ओम प्रकाश बजाज

मुन्ना – मुन्नी भौंचक हो कर, ताकते ही रह जाते हैं। दादा जी अपने बचपन की, जब बातें उन्हें सुनाते हैं। घी दूध आनाज फल सब्जियां, कितने सस्ते मिलते थे। कितनी कम आय में तब, परिवार के खर्चें चलते थे। टि. वी. कंप्यूटर, मोबाइल का तो, नाम सुनने में नहीं आया था। बिग बाज़ार और मॉल नहीं थे, भीड़ भाड़ …

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नारियल – ओम प्रकाश बजाज

नारियल - ओम प्रकाश बजाज

पूजा में यह काम आता हैं, शगुन में भी दिया जाता है। कच्चे हरे नारियल का पानी, पी कर मन तृप्त हो जाता है। कच्चे नारियल की मीठी गिरी, बड़े शौंक से सब चबाते है। सूखे नारियल की गिरी से, अनेक व्यंजन बनाए जाते हैं। सूखे मेवों की श्रेणी में नारियल, का भी नाम आता है। नारियल का तेल तलने-पकाने, …

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