World is run by people who live a life full of actions. Geeta teaches Karma-yoga to us. The same thought prevails in this poem by Dinkar. It is one of those poems that fill us with enthusiasm and a will to achieve some thing in life. Only Ramdhari Singh Dinkar can exhort like this. A lovely poem indeed. दिनकर जी …
Read More »हरिवंश राय बच्चन वीर रस देश प्रेम कविता: रुके न तू
Here is an exhortation from Harivansh Rai Bachchan to leave inaction and to work with full enthusiasm and vigor. A good poem for children to recite. धरा हिला, गगन गुँजा नदी बहा, पवन चला विजय तेरी, विजय तेरीे ज्योति सी जल, जला भुजा–भुजा, फड़क–फड़क रक्त में धड़क–धड़क धनुष उठा, प्रहार कर तू सबसे पहला वार कर अग्नि सी धधक–धधक हिरन …
Read More »Teej Festival Poem For Students And Children
Teej festival is a generic name for a number of festivals that are celebrated by women mainly in Nepal and some parts of India. Hartalika Teej welcomes the monsoon season and is celebrated primarily by girls and women, with songs, dancing and prayer rituals. The monsoon festivals of Teej are primarily dedicated to Goddess Parvati and her union with Lord …
Read More »घर की याद: भवानी प्रसाद मिश्र की प्रसिद्ध हिंदी कविता
भवानी प्रसाद मिश्र हिन्दी के प्रसिद्ध कवि तथा गांधीवादी विचारक थे। वह ‘दूसरा सप्तक’ के प्रथम कवि हैं। गांंधी-दर्शन का प्रभाव तथा उसकी झलक उनकी कविताओं में साफ़ देखी जा सकती है। उनका प्रथम संग्रह ‘गीत-फ़रोश’ अपनी नई शैली, नई उद्भावनाओं और नये पाठ-प्रवाह के कारण अत्यंत लोकप्रिय हुआ। प्यार से लोग उन्हें भवानी भाई कहकर सम्बोधित किया करते थे। …
Read More »भीग रहा है गाँव: अखिलेश कुमार सिंह
मुखिया के टपरे हरियाये बनवारी के घाव सावन की झांसी में गुमसुम भीग रहा है गाँव धन्नो के टोले का तो हर छप्पर छलनी है सब की सब रातें अब तो आँखों में कटनी हैं चुवने घर में कहीं नहीं खटिया भर सूखी ठाँव निंदियारी आँखें लेकर खेतों में जाना है रोपाई करते करते भी कजली गाना है कीचड़ में …
Read More »पुरबा जो डोल गई: शिवबहादुर सिंह भदौरिया
भदौरिया जी का जन्म 15 जुलाई सन 1927 को ग्राम धन्नीपुर रायबरेली उत्तर प्रदेश में हुआ था। ‘हिंदी उपन्यास सृजन और प्रक्रिया’ पर कानपुर विश्व विद्यालय ने उन्हें पीएच.डी. की उपाधि से अलंकृत किया था। 1967 से 1972 तक बैसवाड़ा स्नातकोत्तर महाविद्यालय में हिंदी प्रवक्ता से लेकर विभागाध्यक्ष तक के पदों पर रहे। 1988 में कमला नेहरु स्नातकोत्तर महाविद्यालय के …
Read More »मजबूर भारतीय प्रवासी पर हिंदी कविता: विवशता
जो लोग भारत छोड़कर विश्व के दूसरे देशों में जा बसे हैं उन्हे प्रवासी भारतीय कहते हैं । ये विश्व के अनेक देशों में फैले हुए हैं। 48 देशों में रह रहे प्रवासियों की जनसंख्या करीब 2 करोड़ है। इनमें से 11 देशों में 5 लाख से ज्यादा प्रवासी भारतीय वहां की औसत जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करते हैं और वहां …
Read More »बूँद टपकी एक नभ से: भवानी प्रसाद मिश्र
भवानी प्रसाद मिश्र हिन्दी के प्रसिद्ध कवि तथा गांधीवादी विचारक थे। वह ‘दूसरा सप्तक’ के प्रथम कवि हैं। गांंधी-दर्शन का प्रभाव तथा उसकी झलक उनकी कविताओं में साफ़ देखी जा सकती है। उनका प्रथम संग्रह ‘गीत-फ़रोश’ अपनी नई शैली, नई उद्भावनाओं और नये पाठ-प्रवाह के कारण अत्यंत लोकप्रिय हुआ। प्यार से लोग उन्हें भवानी भाई कहकर सम्बोधित किया करते थे। …
Read More »रिम झिम बरस रहा है पानी: मानसून बारिश पर कविता
वैज्ञानिकों का कहना है कि उत्तरी गोलार्द्ध में जो अतिआक्रामक प्रदूषण हो रहा है, उससे दक्षिणी गोलार्द्ध प्रभावित हुए बिना कैसे रह सकता है? थर्मल पॉवर प्लांट्स से निकलने वाली कार्बन डाई-ऑक्साइड और सल्फर डाई-ऑक्साइड दुनिया के कई-कई देशों सहित भारत में भी तबाही मचा रही है। इंपीरियल कॉलेज, लंदन के एक शोध में बताया गया है कि यूरोप में …
Read More »लक्ष्य: योगी सारस्वत – हौसला बढ़ाने वाली प्रेरक कविता
डॉ. कलाम कहते थे – जिंदगी बदलनी है तो बड़े लक्ष्य रखो, छोटे लक्ष्य तो अपराध हैं लक्ष्य: योगी सारस्वत लक्ष्य हमेशा बड़े रखो, लक्ष्य पर हमेशा चले-चलो। संभव है इसमें बाधाएं भी आएं, पर बाधाओं से लड़ते चलो॥ लक्ष्य हमेशा बड़े रखो॥ कोई गरीब है तो कोई अमीर, पर सबकी अपनी-अपनी तकदीर। हर मंजिल तुमको अपनी मिल जायेगी, गर …
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