लक्ष्य: योगी सारस्वत - हौसला बढ़ाने वाली प्रेरक कविता

लक्ष्य: योगी सारस्वत – हौसला बढ़ाने वाली प्रेरक कविता

डॉ. कलाम कहते थे – जिंदगी बदलनी है तो बड़े लक्ष्य रखो, छोटे लक्ष्य तो अपराध हैं

लक्ष्य: योगी सारस्वत

लक्ष्य हमेशा बड़े रखो,
लक्ष्य पर हमेशा चले-चलो।
संभव है इसमें बाधाएं भी आएं,
पर बाधाओं से लड़ते चलो॥

लक्ष्य हमेशा बड़े रखो॥

कोई गरीब है तो कोई अमीर,
पर सबकी अपनी-अपनी तकदीर।
हर मंजिल तुमको अपनी मिल जायेगी,
गर कर्त्तव्य पथ पर बढ़े-चलो॥

लक्ष्य पर हमेशा चले-चलो॥

दौलत के लालच में न फंसना तुम,
गलत राह पे न मुड़ना तुम।
छूलोगे एक दिन पर्वत शिखर को भी,
गर पर्वत के सीने पर चढ़े-चलो॥

लक्ष्य हमेशा बड़े रखो।
लक्ष्य पर हमेशा चले चलो॥

∼ योगी सारस्वत

जीवन में लक्ष्य का होना ज़रूरी क्यों है?

यदि आपसे पूछा जाये कि क्या आपने अपने लिए कुछ लक्ष्य निर्धारित कर रखे हैं तो आपके सिर्फ दो ही जवाब हो सकते हैं: हाँ या ना।

अगर जवाब हाँ है तो ये बहुत ही अच्छी बात है क्योंकि ज्यादातर लोग तो बिना किसी निश्चित लक्ष्य के ही अपनी ज़िन्दगी बिताये जा रहे हैं और आप उनसे कहीं बेहतर स्थिति में हैं। पर यदि जवाब ना है तो ये थोड़ी चिंता का विषय है। थोड़ी इसलिए क्योंकि भले ही अभी आपका कोई लक्ष्य ना हो पर जल्द ही सोच-विचार कर के अपने लिए एक लक्ष्य निर्धारित कर सकते हैं।

लक्ष्य या Goals होते क्या हैं?

लक्ष्य एक ऐसा कार्य है जिसे हम सिद्ध करने की मंशा रखते हैं। Goal is a task which we intend to accomplish.

कुछ उदाहरण लेते हैं: एक student का लक्ष्य हो सकता है: “Final Exams में 80% से ज्यादा marks लाना”। एक employee का लक्ष्य हो सकता है अपने प्रदर्शन के आधार पर पदोन्नति पाना। एक house-wife का लक्ष्य हो सकता है: “Home based business की शुरुआत करना। एक समाजसेवी का लक्ष्य हो सकता है: “किसी गाँव के सभी लोगों को साक्षर बनाना”।

आपको “योगी सारस्वत” जी की यह कविता “लक्ष्य” कैसी लगी – आप से अनुरोध है की अपने विचार comments के जरिये प्रस्तुत करें। अगर आप को यह कविता अच्छी लगी है तो Share या Like अवश्य करें।

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