जौ का सत्तू (Jau / Barley Sattu): गर्मी के मौसम में जब तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है तो शरीर में पसीना अधिक आने से शरीर में पानी व लवणों की कमी होने लगती है। शरीर में पानी की कमी के कारण निर्जलीकरण (डीहाइड्रेशन) की संभावना अधिक हो जाती है। शरीर में ऊर्जा का स्तर गिरना, थकान होना, कमजोरी आना, चक्कर व सिर दर्द जैसे दोष आने लगते हैं। इसलिए गर्मी के मौसम में शीतल पेय का सेवन अधिक लाभकारी है।
जौ का सत्तू: शीतल पेय – Jau (Barley) Sattu: लू से बचाए – शरीर को रखें ठंडा
आधुनिक कृत्रिम पेय जैसे कोल्ड ड्रिंक, एनर्जी ड्रिंक, अधिक मीठे वाले पैकेट जूस इस मौसम में बाजार में आसानी से उपलब्ध रहते हैं। इन आधुनिक पेयों में चीनी व अम्ल की मात्रा व अन्य कई प्रकार के रसायन मिलाकर उन्हें कृत्रिम स्वाद वाले पेय के रूप में उपलब्ध कराया जाता है। इनके सेवन से शरीर में मोटापा बढ़ता है। मधुमेह के रोग होने की संभावना अधिक होती है। दाँतों को नुकसान पहुँचता है। पाचन पर बुरा प्रभाव पड़ता है। इनके सेवन से शरीर को आवश्यक पोषक तत्व प्राप्त नहीं होते। इन बनावटी मीठे व स्वादयुक्त पेयों को बार-बार पीने से कई बार इनका सेवन करने की आदत बन जाती है, जिससे शरीर के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है।
पारंपरिक प्राकृतिक शीतल पेय:
पारंपरिक प्राकृतिक पेय लागत की दृष्टि से सस्ते होते हैं। उन्हें घर पर ही तैयार किया जा सकता है। भारतीय संस्कृति के अनुसार घर पर ही गर्मी के मौसम में भिन्न-भिन्न प्रकार के पारंपरिक शीतल पेय तैयार किए जा सकते हैं। इनमें छाछ, लस्सी, बेल शरबत, जलजीरा, आम पन्ना, नींबू पानी, ठंडाई, कांजी, नारियल पानी व सत्तू आदि हैं। यदि हम अपनी रसोई में ही तैयार शीतल पेय का सेवन करते हैं तो वे सब गर्मी के प्रभाव को कम करके शरीर को ऊर्जावान बनाते हैं तथा शरीर को निर्जलीकरण के रोग से भी बचाते हैं। भारत में अधिकांश माताएँ इन सभी शीतल पेयों को तैयार करने की विधि जानती हैं। फिर भी आज हम जौ के सत्तू को बनाने की विधि के बारे में जानेंगे।
जौ का सत्तू बनाने की विधि:
- जौ को अंग्रेजी में बार्ली (Barley) कहते हैं। एक किलो जौ के दानों को पहले अच्छे से साफ कर लें।
- उसे पानी में अच्छी तरह धो लें। पश्चात उसे छाया में सुखा लें।
- सुखाने के बाद कढ़ाई में धीमी गैस पर जौ को भून लें। भूनते समय उन्हें लगातार चलाते रहें। जब वे सुनहरे हो जाएँ तथा उनमें से भुनने की खुशबू आने लगे तो गैस बंद कर दें।
- अब भूने हुए जौ को ठंडा कर लें।
- उसके बाद ग्राइंडर में जौ को बारीक पीस लें। यदि आवश्यकता हो तो उसे आप छन भी सकते हैं।
- अब उसे एक डिब्बे में बंद करके रख लें।
सत्तू को उपयोग में लाने की विधि:
एक गिलास पानी में दो से तीन चम्मच सत्तू मिलाएँ। स्वाद के अनुसार गुड़/देसी खांड या नमक मिलाएँ। एक चौथाई भुना हुआ व पिसा हुआ जीरा तथा आधा नींबू का रस मिलाकर उसे अच्छी तरह घोलें, पश्चात उसका सेवन करें।
सावधानी: जिन्हें ग्लूटेन की समस्या रहती है, उन्हें जौ के सत्तू का सेवन नहीं करना चाहिए।
सत्तू पेय के लाभ:
- जौ में जटिल कार्बोहाइड्रेट पाया जाता है, जिसके सेवन से ऊर्जा प्राप्त होती है।
- जौ में रेशा अधिक मात्रा में होने से आँतें स्वस्थ रहती हैं। कब्ज का रोग ठीक होता है।
- मधुमेह के रोगियों के लिए यह पेय नमक मिलाकर लाभकारी है। अन्यथा बिना नमक व बिना मीठे के उसका सेवन किया जा सकता है।
- गर्मी के मौसम में जौ से बना सत्तू पेय शरीर व मन को शीतलता देता है।
- जौ के सत्तू के सेवन से शरीर का वजन कम करने में मदद मिलती है।
- इसके सेवन से विटामिन बी, आयरन, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस जैसे खनिज व विटामिन शरीर को प्रचुर मात्रा में प्राप्त होते हैं।
- शरीर में रक्त प्रवाह को सामान्य रखने में सहायक है।
- शरीर को गर्मी के मौसम में निर्जलीकरण से बचाव करने में लाभकारी है।
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