हुए गुलाबी लाल सुनहरे
रंग दल बादल के
ज्योति कलश छलके।
घर आंगन बन उपवन उपवन
करती ज्योति अमृत से सिंचन
मंगल घट ढलके
ज्योति कलश छलके।
पात पात बिरवा हरियाला
धरती का मुख हुआ उजाला
सच सपने कल के
ज्योति कलश छलके।
ऊषा ने आंचल फैलाया
फैली सुख की शीतल छाया
नीचे आंगन के
ज्योति कलश छलके।
ज्याति यशोधा धरती मैय्या
नील गगन गोपाल कन्हैय्या
श्यामल छवि झलके
ज्योति कलश छलके।
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