प्यार की अभिलाषा - सुरेन्द्र कुमार अरोड़ा

प्यार की अभिलाषा – सुरेन्द्र कुमार अरोड़ा

होती जो देह प्यार की परिभाषा,
तो कोठों की कहानी कुछ और होती।

बनते जो अधर ह्रदय की अभिलाषा,
तो घर की रवानी कुछ और होती।

होता जो प्यार कोई भौतिक चमचमाहट,
तो ऊँची मीनारे न कभी धूल में मिलतीं।

होता जो प्यार ऐश्वर्य कि तमतमाहट,
तो महलों कि दीवारें खण्डहर न बनतीं।

देह से अलग प्यार तो नैसर्गिक आराधना है,
प्यार ईश्वरीय कर्म है और विनम्र साधना है।

प्यार संवेदनाओं का उच्चतम आकर्षण है,
प्यार मधुर उमंगों का स्वाभाविक दर्पण है।

प्यार नफ़रत को जड़ – मूल से नष्ट करवाता है,
प्यार आडंबरों से मुक्ति का मार्ग बन जाता है।

प्यार तो बसता है भावनाओं के समुन्दर में,
निःस्वार्थ समर्पण और परस्पर स्पन्दन में।

बसता है प्यार मीरा की स्वर रचना में,
बसता है प्यार कान्हा की सुर बांसुरी में।

∼ सुरेन्द्र कुमार अरोड़ा

About Surinder Kumar Arora

हरियाणा स्थित जगाधरी में जन्मे सुरेन्द्र कुमार अरोड़ा 32 वर्ष तक दिल्ली में जीव-विज्ञान के प्रवक्ता के रूप में कार्यरत रहने के उपरांत सेवानिवृत हुए हैं तथा वर्तमान में स्वतंत्र रूप से लघुकथा, कहानी, बाल - साहित्य, कविता व सामयिक विषयों पर लेखन में संलग्न हैं। आपकी कई पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, यथा “आज़ादी”, “विष-कन्या”, “तीसरा पैग” (सभी लघुकथा संग्रह), “बन्धन-मुक्त तथा अन्य कहानियाँ” (कहानी संग्रह), “मेरे देश की बात” (कविता संग्रह), “बर्थ-डे, नन्हे चाचा का” (बाल-कथा संग्रह) आदि। इसके अतिरिक्त कई पत्र-पत्रिकाओं में भी आपकी रचनाएं निरंतर प्रकाशित होती रही हैं तथा आपने कुछ पुस्तकों का सम्पादन भी किया है। साहित्य-अकादमी (दिल्ली) सहित कई संस्थाओं द्वारा आपकी कई रचनाओं को पुरुस्कृत भी किया गया है। डी - 184 , श्याम पार्क एक्स्टेनशन, साहिबाबाद - 201005 ( ऊ . प्र.) मो.न. 09911127277 (arorask1951@yahoo.com)

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