अपना हाथ जगन्नाथ: दर्शन सिंह आशट की शिक्षाप्रद बाल कहानी

अपना हाथ जगन्नाथ: दर्शन सिंह आशट की शिक्षाप्रद बाल कहानी

अपना हाथ जगन्नाथ: बल्‍लू के पास काफी जमीन-जायदाद थी लेकिन काम करने से वह मन चुराता था। अक्सर गलियों में डंडे बजाता नजर आता। वास्तव में यह सारी जमीन जायदाद उसके पिता और दादा ने अपनी कड़ी मेहनत से बनाई थी। उनकी मौत के पश्चात अब वह उस जायदाद को कौडियों के भाव बेचने लगा। नतीजा यह निकला कि नौकरों-चाकरों ने मौके का फायदा उठाया और कुछ हिस्सा हड़प लिया। वह नशे करने लगा। कई बार तो उसे गलियों में गिरा हुआ पाया जाता। घर वाले उसे मुश्किल से उठा कर घर ले जाते।

बल्‍लू के नशेड़ी होने कौ आदत ने घर की इज्जत को बर्बादी की ओर धकेलना शुरू कर दिया। रिश्तेदार व अन्य संबंधी समझाते कि वह अपने बाप-दादा की कौमती जायदाद रूपी धरोहर को ऐसे मिट॒टी में न मिलाए लेकिन उसने किसी की एक न मानी।

अपना हाथ जगन्नाथ: स्वयं का काम स्वयं करना अच्छा होता हैं

समय गुजरता गया। कहते हैं कि निठल्ला बैठ कर खाने से तो कुएं भी खाली हो जाते हैं। जब बल्‍लू का नशा उतरा तब तक उसकी काफी आयु गुजर चुकी थी। उसे मन ही मन दु:ख होने लगा कि उसने अपने पूर्वजों कौ मेहनत से कमाई हुई कौमती सम्पत्ति को क्यों बर्बाद किया? वह खोई हुई जमीन-जायदाद को वापस लेने के लिए सोचने लगा।

एक बार उसके गांव में एक मदारी आया जिसने जादू के विभिन्न तमाशे दिखाए। “काश! मेरे पास भी कोई ऐसा जादू हो जिससे मैं अपनी खोई हुई सम्पत्ति प्राप्त कर सकूं लेकिन…।” बल्‍लू सोचने लगा। उसने खेल समाप्ति पर मदारी के साथ तन्‍्हाई में इस संबंध में बात की। मदारी हंसने लगा और उसे समझाने लगा कि यह सब हाथ कौ सफाई है लेकिन गुल्लू कब मानने वाला था। उसने सोचा कि चलो मदारी से नहीं तो किसी और जादूगर से वह ऐसा जादू प्राप्त करेगा, जिससे वह अपनी जायदाद प्राप्त कर सके।

इस आशा की पूर्ति के लिए वह गांव-गांव भटकने लगा। कई बार लोग उसका मजाक उड़ाते। इसी तरह घूमता-घूमता वह एक दिन एक गांव में आया। उस गांव में एक कुआं था। उसने उस कुएं के पास पड़े डोल से पानी निकाल कर पिया और फिर पास के एक वृक्ष के नीचे बैठ कर सुस्ताने लगा।

अभी बल्‍लू को सुस्ताते हुए थोड़ा समय ही हुआ था कि वहां एक अधेड़ आयु का आदमी अपने घोड़े पर आया। वास्तव में वह भी कुएं से पानी पीने के लिए आया था। बल्लू ने उसे कुएं से पानी निकाल कर पिलाया और फिर सोचा, “शायद इनके पास कोई जादू हो। मैं इनसे बात करके देखता हूं।”

बल्‍लू उस व्यक्ति से पूछने लगा, “बाबा, क्या आपके पास कोई ऐसा जादू है या आप ऐसे जादू के बारे में जानते हो जिसकी सहायता से मैं अपनी ही गलतियों से खोई हुई जमीन-जायदाद वापस प्राप्त कर सकूं?”

पहले तो उस बूढ़े बाबा ने सोचा कि शायद बल्‍लू मजाक से पूछ रहा है लेकिन जब उन्हें विश्वास हो गया तो वह बोला, “हां, मैं सबसे बड़े जादू के बारे में जानता हूं जो तेरी खोई हुई जमीन को वापस दिलवा सकता है।”

बल्‍लू ने एकदम कहा, “तो जल्दी बताइए बाबा जी, मैं उसके लिए काफी समय से भटक रहा हूं।”

आदमी ने उसे प्यार से समझाया, “बेटा, वह जादू कहीं और नहीं, बल्कि तुम्हारे अपने पास है।”

“क्या मेरे अपने पास?” बल्‍लू ने हैरानी से पूछा।

“हां, तेरे अपने पास। यह देखो” उसने बल्‍लू के हाथ अपने हाथ में पकड़ कर कहा “तुम्हारे हाथ ही सबसे बड़ा जादू हैं। इन हाथों से की मेहनत से तुम अपनी खोई हुई जायदाद और खोया हुआ सम्मान फिर से प्राप्त कर सकते हो।”

यह कह कर बूढ़ा बाबा अपने घोड़े पर सवार होकर चला गया।

अचानक जैसे बल्‍लू के दिमाग में कोई रौशनी फैल गई। उसने तुरंत निर्णय किया कि वह अब सारे नशे छोड़ कर अपनी मंजिल प्राप्त करेगा। कड़ी मेहनत और आत्म-बल से बल्‍लू ने फिर से अपनी खोई हुई जायदाद प्राप्त कर ली।

एक दिन बल्लू अपने आंगन में कुर्सी पर बैठा था। अचानक उसी वृद्ध व्यक्ति ने अंदर प्रवेश किया। बल्‍लू तुरंत उस बूढ़े बाबा के चरणों पर झुक गया और बोला, “आपकी उस पहेली को मैंने हल कर लिया हे और लोगों को दिखा दिया है कि अगर मन में विश्वास और निश्चय हो तो असंभव को संभव बनाया जा सकता है।”

“देखा हाथ के जादू का कमाल” मुस्कुराते हुए उस सज्जन ने बल्‍लू से फिर कभी मिलने का वादा किया और उसे आशीर्वाद देकर आगे बढ गया।

~ ‘अपना हाथ जगन्नाथ‘ story by ‘दर्शन सिंह आशट

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