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मंहगाई मार गई - Inflation & Labour Day Filmi Song

मंहगाई मार गई – Inflation & Labour Day Filmi Song

उसने कहा तू कौन है, मैंने कहा उल्फ़त तेरी
उसने कहा तकता है क्या, मैंने कहा सूरत तेरी
उसने कहा चाहता है क्या, मैंने कहा चाहत तेरी
मैंने कहा समझा नहीं, उसने कहा क़िस्मत तेरी

Roti Kapda Aur Makanएक हमें आँख की लड़ाई मार गई
दूसरी तो यार की जुदाई मार गई
तीसरी हमेशा की तन्हाई मार गई
चौथी ये खुदा की खुदाई मार गई
बाकी कुछ बचा तो मंहगाई मार गई

तबीयत ठीक थी और दिल भी बेक़रार ना था
ये तब की बात है जब किसी से प्यार ना था
जब से प्रीत सपनों में समाई मार गई
मन के मीठे दर्द की गहराई मार गई
नैनों से नैनों की सगाई मार गई
सोच सोच में जो सोच आई मार गई,
बाकी कुछ बचा…

कैसे वक़्त में आ के दिल को दिल की लगी बीमारी
मंहगाई की दौर में हो गई मंहगी यार की यारी
दिल की लगी दिल को जब लगाई मार गई
दिल ने की जो प्यार तो दुहाई मार गई
दिल की बात दुनिया को बताई मार गई
दिल की बात दिल में जो छुपाई मार गई,
बाकी कुछ बचा…

पहले मुट्ठी विच पैसे लेकर
पहले मुट्ठी में पैसे लेकर थैला भर शक्कर लाते थे
अब थैले में पैसे जाते हैं मुट्ठी में शक्कर आती है
हाय मंहगाई मंहगाई…
दुहाई है दुहाई मंहगाई मंहगाई…
तू कहाँ से आई, तुझे क्यों मौत ना आई, हाय मंहगाई…
शक्कर में ये आटे की मिलाई मार गई
पौडर वाले दुद्ध दी मलाई मार गई
राशन वाली लैन दी लम्बाई मार गई
जनता जो चीखी चिल्लाई मार गई,
बाकी कुछ बचा…

गरीब को तो बच्चों की पढ़ाई मार गई
बेटी की शादी और सगाई मार गई
किसी को तो रोटी की कमाई मार गई
कपड़े की किसी को सिलाई मार गई
किसी को मकान की बनवाई मार गई
जीवन दे बस तिन्न निसान – रोटी कपड़ा और मकान
?????? के हर इन्सान
खो बैठा है अपनी जान
जो सच सच बोला तो सच्चाई मार गई
और बाकी कुछ बचा तो मंहगाई मार गई…

∼ वर्मा  मलिक

चित्रपट : रोटी कपड़ा और मकान (१९७४)
निर्माता, निर्देशक, लेखक : मनोज कुमार
गीतकार : वर्मा  मलिक
संगीतकार : लक्ष्मीकांत प्यारेलाल
गायक : लता मंगेशकर, मुकेश, नरेंद्र चंचल, जानी बाबू क़व्वाल
सितारे : मनोज कुमार, शशि कपूर, अमिताभ बच्चन, ज़ीनत अमान, मौसमी चटर्जी, प्रेमनाथ

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