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Tag Archives: Emptiness Hindi Poems

कैसे भेंट तुम्हारी ले लूँ: बच्चन जी की निराश प्रेम कविता

Harivansh Rai Bachchan's Poem about Love & Frustration तब रोक न पाया मैं आँसू

Love requires great deal of efforts and full involvement. It exhausts the lovers. Then if one has to go through the whole process again! It is very difficult to revisit the old lanes and by lanes of love. कैसे भेंट तुम्हारी ले लूँ: हरिवंश राय बच्चन कैसे भेंट तुम्हारी ले लूँ क्या तुम लाई हो चितवन में, क्या तुम लाई हो …

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जीवन कट गया: जीवन से रची बसी नीरज की कविता

Gopal Das Neeraj

A life ends, just like millions of lives end. Nothing very important from a wider perspective. One can analyze all one wants, but the basic fact remains that one life ended just as millions do. A lovely poem by Neeraj. जीवन कट गया: गोपाल दास नीरज जीवन कटना था, कट गया अच्छा कटा, बुरा कटा यह तुम जानो मैं तो यह …

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कारवां गुजर गया: मशहूर कवि, गीतकार नीरज की लोकप्रिय कविता

Gopal Das Neeraj

A very powerful poem indeed. When we are young, we have dreams and aspirations. Most of these are never realized. Life passes on and suddenly one day we find ourselves exhausted, past our primes even as our dreams lay shattered. This sentiment is so beautifully captured by Gopal Das Neeraj in this classic poem. The poem was also adopted as …

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माँ तो माँ होती है Mother’s Day Hindi Poem

माँ तो माँ होती है - ओम प्रकाश बजाज

मम्मी – अम्मी – अम्मा – माता – माम्, कुछ भी बुलाओ माँ तो माँ होती है। अपने बच्चों पर जान देती है, उनके लिए हर कष्ट सहती है। अपनी कोख से जन्म देती है, उन पर वारी – वारी जाती है। पाल पोस कर बड़ा करती है, गीले में सो कर सूखे में सुलाती है। माँ का आदर सदा …

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माँ: दिल छू जाने वाली हिंदी कविता

माँ - दिल छू जाने वाली हिंदी कविता

मै तेरा गुनेहगार हूँ माँ मै तुझे भूल गया उन झूठे रिश्तो के लिए जो मैंने बाहर निभाए उन झूठे नातो के लिए जो मेरे काम ना आये मै तेरा गुनेहगार हूँ माँ बॉस के कुत्ते को कई बार डॉक्टर को दिखाना पड़ा पुचकार कर उसे खुद अपना हाथ भी कटवाना पड़ा पर तेरा चश्मा न बनवा पाया तुझे दवा …

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कौन तुम मेरे हृदय में? महादेवी वर्मा की खूबसूरत प्रेम कविता

कौन तुम मेरे हृदय में? - महादेवी वर्मा

Here is excerpt from a famous poem of Mahadevi Verma. Love takes root in the heart and suddenly the world looks so different! कौन मेरी कसक में नित मधुरता भरता अलक्षित? कौन प्यासे लोचनों में घुमड़ घिर झरता अपरिचित? स्वर्ण सपनों का चितेरा नींद के सूने निलय में! कौन तुम मेरे हृदय में? अनुसरण निःश्वास मेरे कर रहे किसका निरंतर? …

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