स्नेह निर्झर बह गया है: सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’

स्नेह निर्झर बह गया है: सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’

Love is the essence. As retreating water leaves the sand dry, so does lost love leave a person drained and lifeless. Here is a beautiful expression by Suryakant Tripathi Nirala.

स्नेह निर्झर बह गया है: सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’

स्नेह निर्झर बह गया है,
रेत सा तन रह गया है।

आम की यह डाल जो सूखी दिखी‚
कह रही है – अब यहां पिक या शिखी‚
नहीं आते पंक्ति मैं वह हूं लिखी‚
नहीं जिसका अर्थ –
जीवन दह गया है।

दिये हैं मैंने जगत को फूल–फल‚
किया है अपनी प्रभा से चकित चल‚
पर अनश्वर था सकल पल्लवित पल‚
ठाट जीवन का वही –
जो ढह गया है।

अब नही आती पुलिन पर प्रियतमा‚
श्याम तृण पर बैठने को निरुपमा‚
बह रही है हृदय पर केवल अमाऌ
मैं अलक्षित हूं‚ यही
कवि कह गया है।

स्नेह निर्झर बह गया है‚
रेत सा तन रह गया है।

सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’

शब्दार्थः

निर्झर ∼ झरना
पिक ∼ कोयल
शिखी ∼ मोर
अनश्वर ∼ अविनाशी
दह गया ∼ जल गया
पल्लवित ∼ हरा भरा
पुलिन ∼ नदी किनारे की घास
अमा ∼ अमवस्या

‘निराला’ का जन्म महिषादल स्टेट मेदनीपुर (बंगाल) में माघ शुक्ल पक्ष की एकादशी, संवत् 1953, को हुआ था। इनका अपना घर उन्नाव ज़िले के गढ़ाकोला गाँव में है। निराला जी का जन्म रविवार को हुआ था इसलिए यह सुर्जकुमार कहलाए। 11 जनवरी, 1921 ई. को पं. महावीर प्रसाद को लिखे अपने पत्र में निराला जी ने अपनी उम्र 22 वर्ष बताई है। रामनरेश त्रिपाठी ने कविता कौमुदी के लिए सन् 1926 ई. के अन्त में जन्म सम्बंधी विवरण माँगा तो निराला जी ने माघ शुक्ल 11 सम्वत 1953 (1896) अपनी जन्म तिथि लिखकर भेजी। यह विवरण निराला जी ने स्वयं लिखकर दिया था। बंगाल में बसने का परिणाम यह हुआ कि बांग्ला एक तरह से इनकी मातृभाषा हो गयी।

Check Also

Lord Ganesha Chalisa in Hindi श्री गणेश चालीसा

श्री गणेश चालीसा: Ganesh Chalisa Lyrics

Shri Ganesh Chalisa (श्री गणेश चालीसा): Lord Ganesha is the son of Lord Shiva and …

2 comments

  1. Hello sir es kabita ka prasang vyakhya bata sakte hai

  2. उदय कुमार सिंह

    निराला जी कि कविता को सही रुप नें उधृत करें
    आग शब्द नहीं है वह “आम” है