Tag Archives: Compromise Poems for Students

हरिवंश राय बच्चन वीर रस देश प्रेम कविता: रुके न तू

हरिवंश राय बच्चन वीर रस देश प्रेम कविता: रुके न तू

Here is an exhortation from Harivansh Rai Bachchan to leave inaction and to work with full enthusiasm and vigor. A good poem for children to recite. धरा हिला, गगन गुँजा नदी बहा, पवन चला विजय तेरी, विजय तेरीे ज्योति सी जल, जला भुजा–भुजा, फड़क–फड़क रक्त में धड़क–धड़क धनुष उठा, प्रहार कर तू सबसे पहला वार कर अग्नि सी धधक–धधक हिरन …

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वीर सिपाही: श्याम नारायण पाण्डेय की वीर रस कविता

Maharana Pratap Jayanti

Here is another excerpt from “” the great Veer-Ras Maha-kavya penned by Shyam Narayan Pandey. Here is a description of a soldier fighting for the Motherland. वीर सिपाही: वीर रस कविता भारत-जननी का मान किया, बलिवेदी पर बलिदान किया अपना पूरा अरमान किया, अपने को भी कुर्बान किया रक्खी गर्दन तलवारों पर थे कूद पड़े अंगारों पर, उर ताने शर-बौछारों पर …

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जब इस धरती पर राजपूत आया: राजपूतों का शौर्य गान

जब इस धरती पर राजपूत आया: राजपूतों का शौर्य गान

राजपूत भारतीय उपमहाद्वीप की बहुत ही प्रभावशाली जाति है, जो शासन और सत्ता के सदैव निकट रही है। अपनी युद्ध-कुशलता और शासन-क्षमता के कारण राजपूतों ने पर्याप्त ख्याति अर्जित की। राजपूत उत्तर भारत का एक क्षत्रिय कुल माना जाता है जो कि ‘राजपुत्र’ का अपभ्रंश है। राजस्थान को ब्रिटिशकाल में ‘राजपुताना’ भी कहा गया है। ‘Rajput’ is derivative of a …

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पन्ना दाई: सत्य नारायण गोयनका की वीर रस कविता

पन्ना दाई - सत्य नारायण गोयंका

Panna Dhai (also spelled Panna Dai “पन्ना दाई“) was a 16th-century nursemaid to Udai Singh II, the fourth son of Maharana Sangram Singh (12 April 1484 – 17 March 1527). Her name, Panna means emerald, and dai means a nurse in Hindi language. She had been given charge of young Udai Singh, breastfeeding him virtually from his birth in 1522, along …

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गोरा बादल: पंडित नरेंद्र मिश्र की वीर रस हिंदी कविता

गोरा-बादल: पंडित नरेंद्र मिश्र की वीर रस हिंदी कविता

दोहराता हूँ सुनो रक्त से लिखी हुई क़ुरबानी। जिसके कारन मिट्टी भी चन्दन है राजस्थानी।। रावल रत्न सिंह को छल से कैद किया खिलजी ने काल गई मित्रों से मिलकर दाग किया खिलजी ने खिलजी का चित्तोड़ दुर्ग में एक संदेशा आया जिसको सुनकर शक्ति शौर्य पर फिर अँधियारा छाया दस दिन के भीतर न पद्मिनी का डोला यदि आया …

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माँ की ममता: मातृ दिवस पर कविता

माँ की ममता: मातृ दिवस पर कविता

मातृ-दिवस हर बच्चे और विद्यार्थी के लिये वर्ष का अत्यधिक यादगार और खुशी का दिन होता है। मदर्स डे साल का खास दिन होता है जो भारत की सभी माताओं के लिये समर्पित होता है। मातृ-दिवस हर साल मई महीने के दूसरे रविवार को मनाया जाता है। बच्चे इस दिन पर बहुत खुश होते है और अपनी माँ को सम्मान …

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Earth Day Poetry For Students And Children

Earth Day - Jane Yolen

Earth Day was first celebrated on April 22, 1970 throughout the United States. Then to increase the awareness of the clean environment, the Earth Day was celebrated every year in the whole world. This year, the global theme of the 45th anniversary of ‘Prithvi Dill’ is inspiring everyone to come forward for environmental protection. On the occasion of Earth Day …

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जलियाँवाला बाग में बसंत: सुभद्रा कुमारी चौहान कविता

जलियाँवाला बाग में बसंत - सुभद्रा कुमारी चौहान

Jallianwala Bagh (जलियांवाला बाग़) is a public garden in Amritsar, and houses a memorial of national importance, established in 1951 by the Government of India, to commemorate the massacre of peaceful celebrators including unarmed women and children by British occupying forces, on the occasion of the Punjabi New Year (Baisakhi) on 13 April 1919 in the Jallianwala Bagh Massacre. Colonial …

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Naqsh Faryadi: Mirza Ghalib Urdu Ghazal Lyrics

Naqsh Faryadi - Mirza Ghalib

Naqsh Faryadi: Mirza Ghalib – Urdu Script نقش فریادی ہے کس کی شوخیِ تحریر کا کاغذی ہے پیرہن ہر پیکرِ تصویر کا کاو کاوِ سخت جانیہاۓ تنہائی نہ پوچھ صبح کرنا شام کا لانا ہے جوۓ شیر کا جذبۂ بے اختیارِ شوق دیکھا چاہیے سینۂ شمشیر سے باہر ہے دم شمشیر کا آگہی دامِ شنیدن جس قدر چاہے بچھائے مدّعا …

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युगावतार गांधी: सोहनलाल द्विवेदी

Hindi Poem about Father of the Nation - Mahatma Gandhi युगावतार गांधी

चल पड़े जिधर दो डग, मग में चल पड़े कोटि पग उसी ओर, पड़ गई जिधर भी एक दृष्टि पड़ गए कोटि दृग उसी ओर। जिसके शिर पर निज धरा हाथ उसके शिर-रक्षक कोटि हाथ, जिस पर निज मस्तक झुका दिया झुक गए उसी पर कोटि माथ॥ हे कोटिचरण, हे कोटिबाहु, हे कोटिरूप, हे कोटिनाम, तुम एकमूर्ति, प्रतिमूर्ति कोटि हे …

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