पर्यावरण पर हिंदी कविताएँ: Environment Related Short Hindi Poems Collection

पर्यावरण पर हिंदी कविताएँ: Environment Related Short Hindi Poems Collection

पर्यावरण पर कविता

पर्यावरण हमारे आस-पास की वह प्राकृतिक और कृत्रिम दुनिया है जिसमें हम रहते हैं। इसमें वायु, जल, भूमि, पेड़-पौधे, जीव-जंतु सभी शामिल हैं। पर्यावरण का हमारे जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है।

पर्यावरण को स्वच्छ और सुरक्षित रखना हम सभी का कर्तव्य है। प्रदूषण और प्राकृतिक संसाधनों की अनियंत्रित निकासी से पर्यावरण प्रभावित होता है, जिससे मानव जीवन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। हमें पेड़ लगाना, कचरा प्रबंधन, जल संरक्षण जैसे कार्यों के माध्यम से पर्यावरण की रक्षा करनी चाहिए।

पर्यावरण पर हिंदी कविताओं की सूची

  1. हमारा प्यार ‘पर्यावरण’ – तेजसवीर सिंह
  2. आज जंगल को मिला ‘ईनाम’ – प्रभा पारीक

पर्यावरण हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा है। इसका संरक्षण हम सबकी जिम्मेदारी है ताकि आने वाली पीढ़ियाँ भी एक स्वस्थ और सुंदर प्रकृति का आनंद उठा सकें।

हमारा प्यार ‘पर्यावरण’: पर्यावरण पर कविता [1]

हमारा प्यार पर्यावरण यह,
धरती मां का है धन।

पेड़-पौधे, नदियां, पर्वत,
इनसे सुंदर सारा जीवन।

नीला-नीला अम्बर ऊपर,
चमके सूरज-चंदा प्यारा।

चिड़िया गाए मीठा गाना,
महके हर इक फूल हमारा।

पेड़ हमें देते हैं छाया,
फल-फूलों का मीठा उपहार।

शुद्ध हवा हमको मिली,
इनसे चलता जीवन संसार।

नदियां कल-कल बहती जाएं,
सबकी प्यास बुझाती हैं।

धरती पर हरियाली लाकर,
खुशियों के रंग सजाती हैं।

आओ मिलकर कसम यह खाएं,
पेड़ नए हम रोज लगाएं।

कूड़ा कभी न इधर-उधर फेंकें,
धरती मां को स्वच्छ बनाएं।

पर्यावरण की रक्षा करके,
भविष्य अपना बचाएंगे।

हरा-भरा जब होगा जग,
तब ही हम मुस्काएंगे।

~ तेजसवीर सिंह, जालंधर

आज जंगल को मिला ‘ईनाम’: पर्यावरण पर कविता [2]

एक अंकुर फूटा जंगल में,
बड़ी आस लिए जीने की।

धरती से जब बाहर आया,
सबसे अलग अपने को पाया।

मीठी खुशबू, आस जीने की,
बड़ी पत्तियां, तना मजबूत।

समय आएगा, तब फल देगा,
इस गुण से ही, वो जी पाया।

कौन कहां कब जन्म लेगा,
ये हमें है कहां मालूम।

कब पनपेगा, कब फल देगा,
इससे भी अनजान हैं हम।

इस बीज ने ये कर दिखाया,
बिन माली, बिन सेवा-पानी।

इस जंगल में स्थान है पाया,
झाड़ियों बीच तरुवर उग आया।

जंगल में अब नई आस है,
पेड़ और घास ही घास है।

छमछम जब पानी बरसेगा,
बड़ा पेड़ छांव घनी देगा।

सभी जीव तुझसे पाएंगे,
छांव घनी में कर आराम।

पक्षी भी नाचेंगे-गाएंगे,
आज जंगल को मिला ईनाम।

~ प्रभा पारीक

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