[6]: हीरा और मोती
सहसा दोनों को ऐसा मालूम हुआ कि परिचित राह है। हां, इसी रास्ते से गया उन्हें ले गया था। वही खेत, वही बाग, वही गांव मिलने लगे, प्रतिक्षण उनकी चाल तेज होने लगी। सारी थकान, सारी दुर्बलता गायब हो गई। आह! यह लो! अपना ही हार आ गया। इसी कुएं पर हम पुर चलाने आया करते थे, यही कुआं है।
मोती ने कहा – “हमारा घर नजदीक आ गया है”।
हीरा बोला – “भगवान की दया है”।
“मैं तो अब घर भागता हूँ”।
“यह जाने देगा”?
“इसे मैं मार गिराता हूँ”।
“नहीं-नहीं, दौड़कर थान पर चलो। वहां से आगे हम न जाएंगे”।
दोनों उन्मत्त होकर बछड़ों की भांति कुलेलें करते हुए घर की ओर दौड़े। वह हमारा थान है। दोनों दौड़कर अपने थान पर आए और खड़े हो गए। दढ़ियल भी पीछे-पीछे दौड़ा चला आता था।
झूरी द्वार पर बैठा धूप खा रहा था। बैलों को देखते ही दौड़ा और उन्हें बारी-बारी से गले लगाने लगा। मित्रों की आंखों से आनन्द के आंसू बहने लगे। एक झूरी का हाथ चाट रहा था।
दढ़ियल ने जाकर बैलों की रस्सियां पकड़ लीं। झूरी ने कहा – “मेरे बैल हैं”।
“तुम्हारे बैल कैसे हैं? मैं मवेसीखाने से नीलाम लिए आता हूँ”।
“मैं तो समझता हूँ, चुराए लिए जाते हो! चुपके से चले जाओ, मेरे बैल हैं। मैं बेचूंगा तो बिकेंगे। किसी को मेरे बैल नीलाम करने का क्या अख्तियार हैं?”
“जाकर थाने में रपट कर दूँगा”।
“मेरे बैल हैं। इसका सबूत यह है कि मेरे द्वार पर खड़े हैं”।
दढ़ियल झल्लाकर बैलों को जबरदस्ती पकड़ ले जाने के लिए बढ़ा। उसी वक्त मोती ने सींग चलाया। दढ़ियल पीछे हटा। मोती ने पीछा किया। दढ़ियल भागा। मोती पीछे दौड़ा, गांव के बाहर निकल जाने पर वह रुका, पर खड़ा दढ़ियल का रास्ता वह देख रहा था, दढ़ियल दूर खड़ा धमकियां दे रहा था, गालियां निकाल रहा था, पत्थर फेंक रहा था और मोती विजयी शूर की भांति उसका रास्ता रोके खड़ा था। गांव के लोग यह तमाशा देखते थे और हँसते थे। जब दढ़ियल हारकर चला गया तो मोती अकड़ता हुआ लौटा। हीरा ने कहा – “मैं तो डर गया था कि कहीं तुम गुस्से में आकर मार न बैठो”।
“अब न आएगा”।
“आएगा तो दूर से ही खबर लूंगा। देखूं, कैसे ले जाता है”।
“जो गोली मरवा दे”?
“मर जाऊंगा, पर उसके काम न आऊंगा”।
“हमारी जान को कोई जान ही नहीं समझता”।
“इसलिए कि हम इतने सीधे हैं”।
जरा देर में नाँदों में खली भूसा, चोकर और दाना भर दिया गया और दोनों मित्र खाने लगे। झूरी खड़ा दोनों को सहला रहा था। वह उनसे लिपट गया।
झूरी की पत्नी भी भीतर से दौड़ी-दौड़ी आई। उसने ने आकर दोनों बैलों के माथे चूम लिए।
Kids Portal For Parents India Kids Network