Heart Touching Humorous Short Story in Hindi - Rakhi राखी

राखी: मंजरी शुक्ला की रक्षाबंधन पर हिंदी बाल-कहानी

राखी: जब भी टूटू आस पड़ोस के दोस्तों के हाथों में रंगबिरंगी राखियाँ सजी हुई देखता तो अचानक ही उदास हो जाता। उसका रुँआसा चेहरा देखकर उसकी मम्मी भी दुखी हो जाती और हर साल की तरह उसे समझाती – “मुझे पता हैं कि तुझे कोई राखी बाँधने वाला नहीं हैं पर तू इस तरह से त्यौहार के दिन उदास बैठा रहता हैं तो मुझे बिलकुल अच्छा नहीं लगता।

“हाँ हाँ… आपको भला क्यों अच्छा लगेगा मेरा उदास चेहरा। मामा तो हर साल राखी के एक दिन पहले ही आ जाते हैं आपसे राखी बँधवाने के लिए और पापा को तो देखो जरा, बुआ से कितने चाव से तीन-तीन राखी बँधवाते हैं और एक मैं ही हूँ जिसके हाथ में राखी तो क्या एक धागा तक नहीं होता।”

उसकी माँ यह सुनकर भावुक हो गई और बड़े ही प्यार से बोली – “तो आ मैं ही बाँध देती हूँ ना तुझे राखी जितनी तू कहेगा, उतनी सारी, ढेर सारी।”

राखी: मंजरी शुक्ला

“नहीं आप तो मेरी माँ हो। राखी तो बहने बाँधती हैं ना।” और यह कहते हुए गोलमटोल सा नन्हा टूटू जोरो से रो पड़ा और भागते हुए अपने कमरे में चला गया।

थोड़ी ही देर के बाद जब खीर की सुगंध से घर कमरा महक उठा तो टूटू खुद को रोक नहीं सका और दौड़कर किचन में गया जहाँ उसकी माँ खीर बना रही थी।

टूटू को देखते ही माँ खुश हो गई – आखिर उन्होंने आज स्पेशल खीर टूटू का मूड ठीक करने के लिए ही तो खीर बनाई थी।

उन्होंने मुस्कुराते हुए बड़े प्यार से टूटू को गोदी में उठा लिया।

टूटू मुस्कुराते हुए बोला – “वाह… खीर आज तो मजा आ गया माँ, पर फिर वो खीर के भगोने को ध्यान से देखते हुए बोला – “पर माँ आपको तो पता हैं मैं बिना किशमिश के खीर खाता ही नहीं हूँ।”

“अरे, किशमिश तो खत्म हो गई हैं चलो हम लोग बाज़ार से जाकर ले आते है…” माँ दुलार से उसका माथा चूमते हुए बोली।

बाहर जाकर माँ ने एक रिक्शा किया और टूटू को अपनी गोदी में बैठा लिया।

आज बाज़ार में त्यौहार की वजह से बहुत चहल- पहल थी। सब तरफ मिठाइयों की दुकानों में एक से बढ़कर एक मिठाई सजी हुई थी जिन्हें देखकर टूटू के मुँह में पानी आ गया। टूटू ने अपने कई दोस्तों को भी देखा जो माथे पर चावल रोली का लाल तिलक लगाये हुए अपने हाथों की सुनहरी चमकीली राखियों को बहुत खुश होकर देख रहे थे और अपने मम्मी पापा और बहनों के साथ खिलौने और गुब्बारे खरीद रहे थे।

टीटू को अब अपनी कोई बहन नहीं होने का दुःख और भी ज्यादा सताने लगा। जब उसका रिक्शा वो थोड़ा ओर आगे बढ़ा तो अचानक रिख्शे वाले ने इतनी जोर से ब्रेक लगाये कि टूटू गिरते-गिरते बचा।

मम्मी रिक्शेवाले पर चिल्लाते हुए गुस्से से बोली – “ऐसे चलाते हैं रिक्शा, अभी मेरा बच्चा सड़क पर गिर जाता।”

“जरा सामने तो देखिये बहनजी, ये छोटी सी बच्ची ही अचानक सामने आ गई।”

मम्मी ने झाँककर देखा तो एक बहुत प्यारी सी गोल – मटोल बच्ची हाथों में बहुत ही खूबसूरत सी राखी पकड़े डरी सहमी सी खड़ी हुई थी।

मम्मी यह देखकर बहुत घबरा गई और तुरंत रिक्शे से उतारकर उसे गोद में उठा लिया।

अब तक वो बच्ची डर के मारे जोर-जोर से रोने लगी थी।

टूटू बोला – “मम्मी, इसकी मम्मी कहाँ हैं?”

यह सुनकर जैसे उसकी मम्मी जैसे नींद से जागी और उन्होंने उस बच्ची के आँसूं पोंछते हुए पूछा – “बेटा तुम्हारा घर कहाँ हैं?”

यह सुनकर उसने सड़क के किनारे एक ओर इशारा किया।

तब तक उस घर से एक औरत बदहवास सी भागती हुई बहर आई और उसने दौड़ते हुए टूटू की मम्मी के हाथ से उस बच्ची को ले लिया।

टूटू की मम्मी कुछ पूछती इससे पहले ही वह बोली – “सुबह से रुनझुन ना जाने कितनी बार राखी ले लेकर दरवाजे से बाहर की तरफ़ दौड़ रही हैं कि शायद इससे कोई राखी बंधवा ले। इसका कोई भाई नहीं हैं ना।”

यह सुनकर टूटू ने उस बच्ची की तरफ देखा जो सुनहरी राखी को कस कर पकड़े हुए टूटू की ओर ही अपनी भूरी आँखों से ताक रही थी।
टूटू कुछ बोलता इससे पहले ही वो बच्ची तुतलाते हुए बोली – “बैया, मुझसे लाखी बंदवा लो ना।”

यह सुनकर टूटू की मम्मी ने मुस्कुराते हुए टूटू की ओर देखा।

और टूटू को उसकी तोतली आवाज़ में भैया सुनकर इतनी ख़ुशी हुई कि वो ख़ुशी के मारे रिक्शे से कूद पड़ा और बोला – “हाँ, मैं हूँ ना तुम्हारा भाई ओर अब तुम हर साल मुझे राखी बाँधा करोगी।”

यह सुनकर रुनझुन जोरो से खिलखिलाकर हँसने लगी।

टूटू बोला – “पर मैं तुमसे राखी तभी बँधवाऊंगा जब तुम मेरी एक बात मानोगी।”

रुनझुन की मम्मी मुस्कुराते हुए बोली – “अब तो तुम इसके भाई हो यह तुम्हारी हर बात मानेगी।”

टूटू बोला – “रुनझुन, तुम्हें मुझे सिर्फ़ एक नहीं बल्कि ढेर सारी राखी बांधनी पड़ेगी।”

रुनझुन यह सुनकर बहुत खुश हुई और तुतलाते हुए बोली – “अले मम्मी, पेले मुझे गोदी छे तो उतालो, वलना भैया को कैछे लाखी बाँधूगी?”

उसकी बात सुनकर सभी जोरो से हँस पड़े और टूटू ने सावधानी से रुनझुन का हाथ पकड़कर कहा – “अब मैं तुम्हें सड़क पार कराऊंगा आखिर मैं तुम्हारा बड़ा भाई हूँ ना।”

“हाँ भैया…” रुनझुन एक हाथ में राखी और दूसरे हाथ से टूटू का हाथ पकड़ कर मीठी सी आवाज़ में बोली।

और टूटू की मम्मी ने धीरे से साड़ी के पल्ले से अपने ख़ुशी के आँसूं पोंछ लिए…

डॉ. मंजरी  शुक्ला

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