Hindi Wisdom Story about A Suspicious Soldier: असलियत यों खुली

असलियत यों खुली: बॉर्डर पर जासूस की अनूठी कहानी

भारत, पाकिस्तान में घमासान युद्ध छिड़ा हुआ था। सीमा के निकट पड़ने वाले सभी गांव फौज ने खाली करवा लिए थे। पश्चिमी सीमा के निकट कलाणी नामक गांव था। उसे अभी खाली नहीं करवाया गया था; क्योंकि उस सीमा क्षेत्र में अभी युद्ध नहीं भड़का था। भारतीय फौज ने गांव वालों को चेतवानी दे रखी थी कि आदेश होने पर एक घंटे के अंदर उन्हें गांव खाली करने के लिए तैयार रहना। 14 वर्षीय राजबीर भी बात को जानता था।

असलियत यों खुली: बॉर्डर पर जासूस की अनूठी कहानी

कलाणी ग्रामवासियों को पिछले भारत पाक युद्ध का अनुभव था। इसलिए वे पूरी तरह तैयार थे। वे पकी फसल को फटाफट काटने में लगे थे ताकि ऐसी सिथति आने से पहले ही फसल खलिहान में पहुंच जाए। स्कूल बंद थे और बच्चों को हिदायत थी कि गांव की सीमा के अंदर ही रहें।

राजबीर अपने दोस्तों के साथ गांव में ही खेलता रहा। खाली समय में बच्चे, बूढ़े और जवान, सभी चौपाल के पास के मैदान में घने पेड़ों के नीचे बैठे रहते।

एक शाम झुटपुटा हो चला था। सभी चौपाल पर बैठे थे कि अचानक कोई चिल्लाया, “वह देखो, आसमान में…”

सब की आंखें ऊपर उठ गई। आकाश से एक सफेद धब्बा सा नीचे उतर रहा था।

“यह तो पैराशूट है”, भीड़ में एक अन्य स्वर उभरा।

सभी खड़े हो गए। गांव प्रधान बोले, “कहीं कोई दुश्मन का जासुस न हो, पैराशूट की दिशा देख कर लग रहा है, यह स्कूल के पास वाले मैदान में उतरेगा। घेराबंदी कर लो वहां की।”

सारे लोग उठ कर भागे और मैदान में इधरउधर छितरा गए। किसी के हाथ में लाठी थी तो किसी के बल्लम। प्रधानजी तो अपनी बंदूक ही उठा लाए थे। दरअसल, पिछले युद्ध के अनुभव ने उन्हें काफी कुछ सिखा दिया था।

कलाणी गांव सीमा के पास था, इसलिए कई बार उन्होंने छाताधारी सैनिकों को उतरते देखा था। कभी-कभी ये सैनिक आपातकाल में उतरने के लिए बाध्य होते थे क्योंकि उनके लड़ाकू विमानों को दुश्मन की विमानभेदी तोपें नष्ट कर देती थीं। पिछले युद्ध में तो एक पाकिस्तानी भी यहां उतरा था।

पैराशूट अब काफी नीचे आ गया था और शीघ्र ही तैरता हुआ वह धरती से आ लगा। पैराशूट की डोरियों से स्वयं को आजाद कर फौजी ने प्रधानजी की बंदूक की दिशा में मुंह किया और दोनों हाथ ऊपर कर बोला, “मैं भारतीय फौज का जवान हूं। विमान नष्ट हो जाने से मुझे यहां उतरना पड़ा।”

राजबीर भी ध्यान से उस फौजी को देख रहा था। उसकी वर्दी का रंग उसे अजीब सा लगा। फौजी अकसर इस गांव में आते रहते थे। उसने तो किसी को ऐसी वर्दी पहने नहीं देखा था। वह प्रधानजी के पास जा कर बोला, “मुझे तो यह अपनी फौज का जवान नहीं लग रहा, चाचा जी जरा इसकी वर्दी का रंग तो देखो, सिर की टोपी भी अजीब सी है।”

“मुझे भी यह अपना फौजी जवान नहीं लग रहा,” प्रधानजी बोले।

गांव के 8-10 अन्य युवक भी बोले कि यह भारतीय फौज की वर्दी नहीं है।

इतने लोगों के विरोधी स्वर सुन कर सैनिक बोला, “आप लोगों ने ठीक पहचाना, यह भारतीय फौज की वर्दी नहीं है बल्कि पाकिस्तानी फौज की वर्दी है। दरअसल, मैं एक भारतीय जासूस हूं। मुझे पाकिस्तानी सैनिक के रूप में ही उनके सीमा क्षेत्र में उतर कर एक विशेष गोपनीय काम को अंजाम देना था। पर हमारा लड़ाकू विमान दुश्मन की विमानभेदी तोप से नष्ट हो गया। चालक तो मर गया पर मैं पैराशूट से उतरने में सफल हो गया। आप लोग कृपया मुझे जाने दें। अगर मैंने अपना काम कल सुबह तक पूरा न किया तो बड़ी गड़बड़ हो जाएगी”।

“मुझे तो पक्का विश्वास है कि यह पाकिस्तानी जासूस है…। पकड़ा गया तो मनघढ़ंत कहानियां गढ़ रहा है” एक व्यक्ति बोला।

“परंतु यह शुद्ध हिंदी बोल रहा है” दूसरे ने कहा।

“जासूस में ये सब खूबियां होती ही हैं। देश की भाषा, रीतिरिवाज, भूगोल आदि हर चीज की उसको बखूबी जानकारी होती है” राजबीर बोला।

“देखिए” सैनिक बेचैन हो उठा, “मैं कैसे आप को विश्वास दिलाऊं कि मैं भारतीय फौजी ही हूं? यहां एक एक मिनट की देरी हमारे फौजी अभियान पर प्रभाव डालेगी, आप मुझे छोड़ दें।”

गांव वाले उलझन में थे, कुछ को लग रहा था कि यह पाकिस्तानी जासूस है जबकि कुछ का विचार था कि यह भारतीय फौजी है और जो कुछ कह रहा है, सच कह रहा है।

Check Also

A Father And A Patriot: Ramendra Kumar

A Father And A Patriot: Heart Rending Story of The Kargil Warriors

A Father And A Patriot: “Abba, how come Nanaji does Puja while Ammi and you …