गुरुद्वारा नानक लामा चुंगथांग (Gurudwara Chungthang): जिसे गुरु नानक देव जी ने कहा था 'चंगी थां'

गुरुद्वारा नानक लामा चुंगथांग (Gurudwara Chungthang): जिसे गुरु नानक देव जी ने कहा था ‘चंगी थां’

चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन से रेलगाड़ी चली, जिसने उत्तर प्रदेश, बिहार से होते हुए दूसरे दिन हमें पश्चिम बंगाल के रेलवे जंक्शन न्यू जलपाईगुड़ी पहुंचा दिया।

आगे श्री गुरु नानक देव जी की चरण छोह धरती चुंगथांग पहुंचना था। सिक्किम के चुंगथांग में प्रवेश और रहने की मंजूरी लेनी पड़ती है, जो मिल गई थी।

न्यू जलपाईगुड़ी रेलवे स्टेशन से ऑटो लेकर गुरुद्वारा सिंह सभा सिलीगुड़ी पहुंचे। यहां हमें रात रुकना था।

चुंगथांग जाने वाले यात्रियों का पहला पड़ाव यहीं होता है। भरे बाजार में गुरुद्वारा साहिब की विशाल इमारत में AC / Non-AC कमरों में ठहरने और लंगर के सुचारु प्रबंध हैं। यह स्थान पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले के अंतर्गत पड़ता है। प्रबंधकों के अनुसार यहां पहली  और दसवीं पातशाही के प्रकाश पर्व श्रद्धापूर्वक मनाए जाते हैं।

गुरुद्वारा नानक लामा चुंगथांग – Gurudwara Chungthang, Siliguri, West Bengal

Name: गुरुद्वारा नानक लामा चुंगथांग (Gurudwara Chungthang)
Location: Chungthang, Sikkim, West Bengal 737120 India
Associated with: Guru Nanak Dev Ji
Affiliation: Sikhism
Festivals: Baisakhi, Lohri, Guru Nanak Dev Festival
Architecture: Sikh architecture
Brief History
(Wikipedia):
In 1969 Assam Rifles, with the help of Tasa Tangey Lepcha, the then MLA of the region, built a small gurudwara in remembrance of the first Sikh Guru, Guru Nanak, who visited this place in his Third Udasi. Now management the gurudwara path rattan baba harbans singh ji baba bachan singh ji baba surinder singh ji dera kar sewa gurudwara bangla sahib gurudwara built near Chungthang, Sikkim by members of the Assam Rifles Battalion under Subedar Major Bhullar.

नगर कीर्तन और प्रभात फेरियां निकलती हैं। बाकी समुदायों के लोग गुरु-घर का बहुत सम्मान करते हैं। यहां से टैक्सी द्वारा चुंगथांग पहुंचना पड़ता है। हवाई रास्ते से जाने वाले यात्रियों के लिए बागडोगरा हवाई अड्डा नजदीक है।

चुंगथांग उत्तरी सिक्किम का बहुत खूबसूरत कस्बा है। यह मंगन जिले के अंतर्गत पड़ता है। यह सिक्किम की राजधानी गंगटोक से करीब 100 किलोमीटर दूर है और समुद्र तल से ऊंचाई 5780 फुट है।

The Chungthang gurdwara
The Chungthang gurdwara

यह कस्बा लाचेन और लाचुंग नदियों के संगम पर बसा हुआ है।

इस स्थान से तीस्ता नदी शुरू होती है, जहां बांध निर्माणाधीन था। यहां ऐतिहासिक गुरुद्वारा नानक लामा साहिब सुशोभित है।

श्री गुरु नानक देव जी ने अपनी तिब्बत-चीन यात्रा के दौरान अपने मुबारक चरण इस धरती पर रखे थे। मरदाना जी उनके साथ थे। गुरु जी ने इस रमणीक स्थान को देखकर ‘चंगी थां’ (अच्छी जगह) कहा था, जो बाद में चुंगथांग नाम से प्रसिद्ध हो गया।

प्राप्त इतिहास अनुसार जब गुरु जी यहां पहुंचे तो राक्षस ने ईर्ष्यावश एक विशाल पत्थर उनकी ओर धकेल दिया और गुरु जी ने उसे रोक दिया।

गुरु जी की चरण छोह वाला विशाल पवित्र पत्थर यहां मौजूद है। उनके द्वारा गाड़ी गई ‘सोटी’ अब बड़े पेड़ के रूप में मौजूद है। इस पेड़ की शाखाएं खुंडी के आकार की हैं।

इस धरती पर चावल नहीं होते थे। लोगों की प्रार्थना पर गुरु जी ने धरती पर चावल बिखेरे और कहा कि यहां चावल की फसल हुआ करेगी।

आज भी यहां चावल की फसल होती है। गुरु-घर में संगतों के रहने और लंगर के सुचारु प्रबंध हैं। मुख्य सेवादार बाबा यादविंदर सिंह जी हैं। गुरुद्वारा साहिब के पास बौद्ध धर्म का पवित्र स्थान है।

यहां हम 5 दिन रहे। इस कस्बे में बड़े प्रशासनिक कार्यालय, थाना, सीनियर सैकेंडरी स्कूल और अस्पताल जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं। यहां का रमणीक वातावरण और सुहावना मौसम मन को सुकून प्रदान करता है। यात्रियों को यहां आने के लिए प्रमाणों के आधार पर अग्रिम परमिट लेना पड़ता है।

Partially frozen Gurudongmar Lake
Partially frozen Gurudongmar Lake

यहां से गुरु जी गुरुदंबा झील (गुरुडोंगमार) गए। यहां चरवाहों ने गुरु जी से पानी की कमी दूर करने के लिए प्रार्थना की और बताया कि झील का पानी जमा रहता है। गुरु जी ने अपने हाथ में पकड़ी लाठी को पानी से छुआया। अब यहां माइनस तापमान होने के बावजूद बर्फ नहीं जमती। इसके उपरांत इस झील का नाम गुरुडोंगमार झील प्रचलित हो गया।

A panoramic view of the Gurudongmar lake and the Buddhist shrine
A panoramic view of the Gurudongmar lake and the Buddhist shrine
Gurudongmar Lake is one of the highest lakes in the world and in India, at an elevation of 5,430 m (17,800 ft) according to the Government of Sikkim. It is located in the Great Himalayas in the Mangan district in Indian state of Sikkim, and considered sacred by Buddhists. The lake is named after Padmasambhava, who visited it in the 8th century.

इस क्षेत्र का वातावरण रमणीक और रूह को सुकून प्रदान करने वाला है। इसकी समुद्र तल से ऊंचाई 17800 फुट है। सिलीगुड़ी से चुंगथांग तक का टैक्सी का सफर प्राकृतिक दृश्यों से भरपूर है। जगह-जगह पहाड़ों की गोद से झरने फूटते देखकर यात्री प्रकृति के करीब महसूस करते हैं। यहां मौसम सुहावना रहता है।

~ अमरीक सिंह दियाल, गढ़शंकर

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