‘जोधपुर के मेहरानगढ़ किले में’ माता ‘श्री चामुंडा देवी’ का 500 वर्ष प्राचीन मंदिर
राजस्थान की भव्यता का प्रतीक जोधपुर शहर अपनी बेमिसाल हवेलियों की भवन निर्माण कला, मूर्ति कला तथा वास्तु शैली के लिए दूर-दूर तक विख्यात है। इसी शहर के लगभग 400 फुट ऊंचे शैल के पठार पर स्थित है भारत के सबसे विशाल किलों में से एक मेहरानगढ़ का भव्य किला।
Chamunda Mata Temple, Mehrangarh Fort, Jodhpur
| Name: | चामुंडा माता मंदिर, जोधपुर (Chamunda Mata Temple, Mehrangarh Fort, Jodhpur) |
| Location: | मेहरों को बास, गुलाब सागर, जोधपुर, राजस्थान, 342001 India |
| Deities: | Goddess Chamunda Devi |
| Affiliation: | Hinduism |
| Festival: | Navratri, Dussehra |
| Architecture: | – |
| www: | tourism.rajasthan.gov.in/jodhpur.html#chamunda-mataji-temple |
| Elevation: | 400 feet |
| Built By: | 1459 by Rao Jodha, founder of Jodhpur |
यह किला वर्तमान नरेश महाराजा गज सिंह के राज परिवार का निवास स्थान तो है ही, इसी किले में एक भव्यता का प्रतीक उत्कृष्ट म्यूजियम तथा मां जगदम्बा चामुंडा का मंदिर भी है जो किले के दक्षिणी भाग में सबसे ऊंचे प्राचीर पर स्थित है।
श्री चामुंडा देवी का यह मंदिर जोधपुर राज परिवार का इष्ट देवी मंदिर तो है ही बल्कि लगभग सारा जोधपुर ही इस मंदिर की देवी को अपनी इष्ट अथवा कुल देवी मानता है। इस मंदिर में देवी की मूर्ति 1460 ई. में चामुंडा देवी के एक परमभक्त मंडोर के तत्कालीन राजपूत शासक राव जोधा द्वारा अपनी नवनिर्मित राजधानी जोधपुर में बनाए गए किले में ही स्थापित की गई।

किले की छत पर विराजमान यह मंदिर अपनी मूर्तिकला तथा उत्तम भवन निर्माण कला की एक अनूठी मिसाल है जहां से सारे शहर का विहंगम दृश्य साफ नजर आता है।
सूर्य की आभा का आभास देते श्री चामुंडा देवी मंदिर में प्रवेश करने का मार्ग आसपास बनी आकर्षक मूर्तियों से सुसज्जित है। मंदिर में स्थापित मां भवानी की मूर्ति मगन बैठी मुद्रा की बजाय चलने की मुद्रा में नजर आती है।
शत्रुओं से अपने भक्तों की रक्षा करने वाली देवी का यह रौद्र रूप है जो सांसारिक शत्रुओं से उनकी रक्षा के साथ-साथ उनके भौतिक, (शारीरिक) दुखों तथा मानसिक त्रासदियों को दूर करके उनमें आत्मविश्वास एवं वीरता का संचार कर जीवन को एक गति प्रदान करता है। नवरात्रों में तो सारे प्रदेश से यहां भक्तों का आवागमन होता है।
श्री मत्स्य पुराण तथा श्री मार्कंडेय पुराण में विशेष तौर पर भगवती चामुंडा देवी के प्रताप व वैभव का वर्णन है। महाभारत के वन पर्व तथा श्री विष्णु पुराण के धर्मोत्तर में भी आदिशक्ति की स्तुति की गई है।
एक पौराणिक मान्यता के अनुसार देवासुर संग्राम में जब शिवा (मां शक्ति) ने राक्षस सेनापति चंड तथा मुंड नामक दो शक्तिशाली असुरों का वध कर दिया तो मां दुर्गा द्वारा देवी के इस शत्रु नाशिनी रूप को चामुंडा का नाम दिया गया।
जैन धर्म में भी देवी मां चामुंडा को मान्यता प्राप्त हैतथा मां देवी का यह रूप पूर्णत सात्विक रूप में पूजा जाता है।
Kids Portal For Parents India Kids Network