किसान (भारत–भारती से) – मैथिली शरण गुप्त

हेमन्त में बहुदा घनों से पूर्ण रहता व्योम है।
पावस निशाओं में तथा हँसता शरद का सोम है॥

हो जाये अच्छी भी फसल, पर लाभ कृषकों को कहाँ।
खाते, खवाई, बीज ऋण से हैं रंगे रक्खे जहाँ॥

आता महाजन के यहाँ वह अन्न सारा अंत में।
अधपेट खाकर फिर उन्हें है काँपना हेमंत में॥

बरसा रहा है रवि अनल, भूतल तवा सा जल रहा।
है चल रहा सन सन पवन, तन से पसीना बह रहा॥

देखो कृषक शोषित, सुखाकर हल तथापि चला रहे।
किस लोभ से इस आँच में, वे निज शरीर जला रहे॥

घनघोर वर्षा हो रही, है गगन गर्जन कर रहा।
घर से निकलने को गरज कर, वज्र वर्जन कर रहा॥

तो भी कृषक मैदान में करते निरंतर काम हैं।
किस लोभ से वे आज भी, लेते नहीं विश्राम हैं॥

बाहर निकलना मौत है, आधी अँधेरी रात है।
है शीत कैसा पड़ रहा, औ’ थरथराता गात है॥

तो भी कृषक ईंधन जलाकर, खेत पर हैं जागते।
यह लाभ कैसा है, न जिसका मोह अब भी त्यागते॥

सम्प्रति कहाँ क्या हो रहा है, कुछ न उनको ज्ञान है।
है वायु कैसी चल रही, इसका न कुछ भी ध्यान है॥

मानो भुवन से भिन्न उनका, दूसरा ही लोक है।
शशि सूर्य हैं फिर भी कहीं, उनमें नहीं आलोक है॥

∼ मैथिली शरण गुप्त (राष्ट्र कवि)

About Maithili Sharan Gupt

राष्ट्रकवि मैथिली शरण गुप्त (३ अगस्त १८८६ – १२ दिसम्बर १९६४) हिन्दी के कवि थे। महावीर प्रसाद द्विवेदी जी की प्रेरणा से आपने खड़ी बोली को अपनी रचनाओं का माध्यम बनाया और अपनी कविता के द्वारा खड़ी बोली को एक काव्य-भाषा के रूप में निर्मित करने में अथक प्रयास किया और इस तरह ब्रजभाषा जैसी समृद्ध काव्य-भाषा को छोड़कर समय और संदर्भों के अनुकूल होने के कारण नये कवियों ने इसे ही अपनी काव्य-अभिव्यक्ति का माध्यम बनाया। हिन्दी कविता के इतिहास में गुप्त जी का यह सबसे बड़ा योगदान है। पवित्रता, नैतिकता और परंपरागत मानवीय सम्बन्धों की रक्षा गुप्त जी के काव्य के प्रथम गुण हैं, जो पंचवटी से लेकर जयद्रथ वध, यशोधरा और साकेत तक में प्रतिष्ठित एवं प्रतिफलित हुए हैं। साकेत उनकी रचना का सर्वोच्च शिखर है। मैथिलीशरण गुप्त जी की बहुत-सी रचनाएँ रामायण और महाभारत पर आधारित हैं। १९५४ में पद्म भूषण सहित अनेक प्रतिष्ठित सम्मान और पुरस्कार से सम्मानित। प्रमुख कृतियाँ — • महाकाव्य – साकेत; • खंड काव्य – जयद्रथ वध, भारत-भारती, पंचवटी, यशोधरा, द्वापर, सिद्धराज, नहुष, अंजलि और अर्ध्य, अजित, अर्जन और विसर्जन, काबा और कर्बला, किसान, कुणाल गीत, गुरु तेग बहादुर, गुरुकुल, जय भारत, झंकार, पृथ्वीपुत्र, मेघनाद वध, मैथिलीशरण गुप्त के नाटक, रंग में भंग, राजा-प्रजा, वन वैभव, विकट भट, विरहिणी व्रजांगना, वैतालिक, शक्ति, सैरन्ध्री, स्वदेश संगीत, हिडिम्बा, हिन्दू; • अनूदित – मेघनाथ वध, वीरांगना, स्वप्न वासवदत्ता, रत्नावली, रूबाइयात उमर खय्याम।

Check Also

Dussehra Facebook Covers

Dussehra Facebook Covers: Vijayadashami Social Media Banners & Posters

Dussehra Facebook Covers: Dussehra, also known as Vijayadashami, is a major Indian festival celebrated on …