इस मोड़ से जाते हैं: गुलज़ार

इस मोड़ से जाते हैं: गुलज़ार

इस मोड़ से जाते हैं
कुछ सुस्त कदम रस्ते
कुछ तेज कदम राहें।

पत्थर की हवेली को
शीशे के घरौंदों में
तिनकों के नशेमन तक
इस मोड़ से जाते हैं।

आंधी की तरह उड़ कर
इक राह गुजरती है
शरमाती हुई कोई
कदमों से उतरती है।

इन रेशमी राहों में
इक राह तो वह होगी
तुम तक जो पहुंचती है
इस मोड़ से जाती है।

इक दूर से आती है
पास आ के पलटती है
इक राह अकेली सी
रुकती है न चलती है।

ये सोच के बैठी हूं
इक राह तो वो होगी
तुम तक जो पहुंचती है
इस मोड़ से जाती है।

इस मोड़ से जाते हैं
कुछ सुस्त कदम रस्ते
कुछ तेज कदम राहें।

पत्थर की हवेली को
शीशे के घरौंदों में
तिनकों के नशेमन तक
इस मोड़ से जाते हैं।

गुलज़ार

चित्रपट: आंधी (1975)
लेखक: गुलज़ार
गीतकार: गुलज़ार
संगीतकार: आर. डी. बर्मन
गायक: किशोर कुमार, लता मंगेशकर
सितारे: संजीव कुमार, सुचित्रा सेन

आपको गुलज़ार जी की यह गीत “इस मोड़ से जाते हैं” कैसी लगी – आप से अनुरोध है की अपने विचार comments के जरिये प्रस्तुत करें। अगर आप को यह कविता अच्छी लगी है तो Share या Like अवश्य करें।

यदि आपके पास Hindi / English में कोई poem, article, story या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें। हमारी Id है: submission@sh035.global.temp.domains. पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ publish करेंगे। धन्यवाद!

Check Also

भारत की आन, बान और शान का प्रतीक 'तिरंगा': 22 जुलाई को 'राष्ट्रीय ध्वज दिवस' पर विशेष

भारत की आन, बान और शान का प्रतीक ‘तिरंगा’: 22 जुलाई को ‘राष्ट्रीय ध्वज दिवस’ पर विशेष

प्रत्येक स्वतंत्र राष्ट्र का अपना एक विशिष्ट ध्वज होता है, जो उसकी सम्प्रभुता, अखंडता और …