ढूंढते रह जाओगे: अरुण जैमिनी

ढूंढते रह जाओगे: अरुण जैमिनी

चीजों में कुछ चीजें
बातों में कुछ बातें वो होंगी
जिन्हें कभी देख न पाओगे
इक्कीसवीं सदी में
ढूंढते रह जाओगे

बच्चों में बचपन
जवानी में यौवन
शीशों में दरपन
जीवन में सावन
गाँव में अखाड़ा
शहर में सिंघाड़ा
टेबल की जगह पहाड़ा
और पायजामें में नाड़ा
ढूंढते रह जाओगे

चूड़ी भरी कलाई
शादी में शहनाई
आंखों में पानी
दादी की कहानी
प्यार के दो पल
नल ­नल में जल
तराजू में बट्टा
और लड़कियों का दुपट्टा
ढूंढते रह जाओगे

गाता हुआ गाँव
बरगद की छाँव
किसान का हल
मेहनत का फल
चहकता हुआ पनघट
लम्बा लम्बा घूंघट
लज्जा से थरथराते होंठ
और पहलवान का लंगोट
ढूंढते रह जाओगे

आपस में प्यार
भरा पूरा परिवार
नेता ईमानदार
दो रुपए उधार
सड़क किनारे प्याऊ
संबेधन में चाचा ताऊ
परोपकारी बंदे
और अरथी को कंधे
ढूंढते रह जाओगे

~ अरुण जैमिनी

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