भीगी पलकें - सुरेन्द्र कुमार अरोड़ा

भीगी पलकें – सुरेन्द्र कुमार अरोड़ा

सलवटों के सवंरने का जरिया होतीं हैं भीगी पलकें
रुके हुए पानी को तीव्र धारा में बदल देतीं  हैं भीगी पलकें

अमावस की रात में पूनम का चाँद बनतीं  हैं भीगी पलकें
उतर आई  उदासी को, निकल जाने देती हैं  भीगी पलकें

बिखरी हुई घटाओं को घने बादलों में बदलती हैं भीगी पलकें
रुकी हुई हवाओं को समीर की गति देती हैं भीगी पलकें

पत्थर में शिव के दर्शन करवाती हैं भीगी पलकें
मनुष्य को मानवता के करीब ले आती हैं भीगी पलकें

दर्द में जब दवा का रूप पा जातीं हैं भीगी पलकें
तो गंगा की निर्मल धारा में बदल जातीं हैं भीगी पलकें

पलकों को भीगने से पहले जो भांप लेती हैं भीगी पलकें
आदमी को भगवान का दर्जा दे जातीं हैं भीगी पलकें

About Surinder Kumar Arora

हरियाणा स्थित जगाधरी में जन्मे सुरेन्द्र कुमार अरोड़ा 32 वर्ष तक दिल्ली में जीव-विज्ञान के प्रवक्ता के रूप में कार्यरत रहने के उपरांत सेवानिवृत हुए हैं तथा वर्तमान में स्वतंत्र रूप से लघुकथा, कहानी, बाल - साहित्य, कविता व सामयिक विषयों पर लेखन में संलग्न हैं। आपकी कई पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, यथा “आज़ादी”, “विष-कन्या”, “तीसरा पैग” (सभी लघुकथा संग्रह), “बन्धन-मुक्त तथा अन्य कहानियाँ” (कहानी संग्रह), “मेरे देश की बात” (कविता संग्रह), “बर्थ-डे, नन्हे चाचा का” (बाल-कथा संग्रह) आदि। इसके अतिरिक्त कई पत्र-पत्रिकाओं में भी आपकी रचनाएं निरंतर प्रकाशित होती रही हैं तथा आपने कुछ पुस्तकों का सम्पादन भी किया है। साहित्य-अकादमी (दिल्ली) सहित कई संस्थाओं द्वारा आपकी कई रचनाओं को पुरुस्कृत भी किया गया है। डी - 184 , श्याम पार्क एक्स्टेनशन, साहिबाबाद - 201005 ( ऊ . प्र.) मो.न. 09911127277 (arorask1951@yahoo.com)

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