बापू ने सिखलाया था - महात्मा गाँधी पर बाल-कविता

बापू ने सिखलाया था: महात्मा गाँधी पर बाल-कविता

त्याग और अहिंसा का मार्ग
बापू ने सिखलाया था,
जाति-धर्म का भेद भुलाकर
सबको गले लगाया था।

संन्यासी का वस्त्र पहनकर
स्वच्छ जीवन बिताया था,
कड़ी-कड़ी कठिनाइयों को
बापू ने पार लगाया था।

सच्चाई की राहों पर चलकर
ज्ञान का दीप जलाया था,
अंग्रेजों से लोहा लेकर
देश को आजाद कराया था।

साहस और कर्तव्य निष्ठा का
सबको पाठ पढ़ाया था,
प्रेम-भाव से रहने का संदेश
बापू ने समझाया था।

त्याग और अहिंसा का मार्ग
बापू ने सिखलाया था।

~ अम्बरीष कुमार दुबे (लखनऊ)

आपको अम्बरीष कुमार दुबे जी की यह कविता “बापू ने सिखलाया था” कैसी लगी – आप से अनुरोध है की अपने विचार comments के जरिये प्रस्तुत करें। अगर आप को यह कविता अच्छी लगी है तो Share या Like अवश्य करें।

यदि आपके पास Hindi / English में कोई poem, article, story या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें। हमारी Id है: submission@4to40.com. पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ publish करेंगे। धन्यवाद!

Check Also

Weekly Bhavishyafal

साप्ताहिक भविष्यफल जुलाई 2022

साप्ताहिक भविष्यफल 03 – 09 जुलाई, 2022 Weekly Bhavishyafal साप्ताहिक भविष्यफल जुलाई 2022: पंडित असुरारी …

One comment

  1. Dr. Sangeeta Saxena

    Bahut sundar kavita. Sargarbhit.