डॉक्टर की लिखाई पर हास्य कहानी

डॉक्टर की लिखाई पर हास्य कहानी

डॉक्टर ने साफ़ हैंडराइटिंग में दवा लिखी; मेडिकल काउंसिल ने एमबीबीएस की डिग्री वापस ली

डॉक्टर की लिखाई पर हास्य कहानी – मेरठ शहर के एक नामी-गिरामी अस्पताल के डाक्टर को आज एक मरीज के परिजनों ने पीट-पीटकर अधमरा कर दिया। डॉक्टर का कसूर सिर्फ़ इतना था कि उसने दवाई का पर्चा बहुत साफ़ हैंडराइटिंग में लिखा था।

हुआ यूं कि शास्त्री नगर में रहने वाली सोमवती पेट में गैस का दर्द होने पर आनंद अस्पताल पहुंची थी। वहां ओपीडी में बैठे डॉक्टर कुंवर विश्वास ने उसके पेट की जांच करने के बाद दवाई का पर्चा लिखकर दे दिया।

सोमवती ने घर लौटकर वो पर्चा अपने पति सोमपाल को थमा दिया। पर्चा देखते ही सोमपाल के पैरों तले से ज़मीन खिसक गयी। पर्चे में दवाइयों के नाम बिल्कुल साफ़ हैंडराइटिंग में लिखे हुए थे। इतने साफ़ कि कोई बच्चा भी पढ़ ले। दवा कब-कब और कितनी लेनी है, यह भी साफ़ समझ में आ रहा था।

डॉक्टर की लिखाई: हास्य कहानी

सोमपाल को शक हो गया कि उसकी पत्नी अस्पताल के बजाय कहीं और गयी थी। उसने बच्चों के सर पे उसका हाथ रखवाकर पूछा, “सच बता, कहां गयी थी? किससे लिखवाकर लायी है ये पर्चा?” सोमवती ने बच्चों की क़सम खाकर कहा कि वो डॉक्टर के पास ही गयी थी।

इसके बाद सोमपाल ने अपने आस-पड़ोस के लोगों को बुलाकर वो पर्चा दिखाया। किसी को भी भरोसा नहीं हुआ कि यह किसी डॉक्टर के हाथ का लिखा हुआ पर्चा है। सभी एक स्वर में चिल्लाये, “वो डॉक्टर नहीं कोई ढोंगी है। मारो साले को!”

इसके बाद उन सभी ने अस्पताल पर धावा बोल दिया और डॉक्टर को कमरे में बंद करके पीटना शुरु कर दिया। अस्पताल के सफ़ाई कर्मचारियों ने आधे घंटे बाद उन्हें बड़ी मुश्किल से छुड़ाया।

अस्पताल में तोड़फोड़ करने वाले एक ग़ुस्सैल युवक ने हमारे संवाददाता को वो पर्चा दिखाते हुए कहा, “कोई एमबीबीएस डॉक्टर ऐसे लिखता है क्या? साला झोलाछाप!”

“असली डॉक्टर का लिखा पर्चा दुनिया में आज तक कोई पढ़ पाया है क्या!” – कहकर उसने संवाददाता का माइक भी छीन लिया।

इस घटना के बाद, इंडियन मेडिकल काउंसिल (आईएमसी) ने डॉक्टर विश्वास का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया है और उनकी एमबीबीएस की डिग्री की जांच के आदेश दे दिये हैं।

आईएमसी के अध्यक्ष सुखचैन ‘सुईवाला’ ने कहा, “मेडिकल की पांच साल की पढ़ाई के दौरान डॉक्टरों को एक साल तक सिर्फ़ ख़राब हैंडराइटिंग की प्रैक्टिस करायी जाती है। अगर फिर भी कोई डॉक्टर साफ़ लिखता है तो इसका मतलब है या तो उसने अपना कोर्स पूरा नहीं किया या कहीं से फ़र्ज़ी डिग्री ली है।”

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