दोस्ती पर शायरी
“कोई दोस्त कभी पुराना नहीं होता,
कुछ दिन बात न करने से बेगाना नहीं होता,
दोस्ती में दुरी तो आती रहती हैं,
पर दुरी का मतलब भुलाना नहीं होता.”
कमबख्त होली
कौन कमबख्त होली के रंग लगाता है आजकल!
अपनों का प्रेम है जो दिल के रास्ते चहरे पे आ गया!
होली स्पेशल
वो रंग-ऐ-गुलाल की शोखियाँ ख़त्म हुई
चलो यारो फिर बेरंग दुनिया में लौट चले…
होली स्पेशल
दोस्तों ने ऐसा पहचाना कि खुद को ही पहचान पाये ना हम!
गये थे घर से साफ सुथरे, ये क्या हो आये हम!
चाँद
में उसे चाँद कहे दू ये मूमकिन तो है!
मगर लॉग उसे रातभर देखे ये गवारा नहीं!
फर्क पड़ता है
मैं “किसी से” बेहतर करुं
क्या फर्क पड़ता है..!
मै “किसी का” बेहतर करूं
बहुत फर्क पड़ता है..!
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