Hindi Shayari

Hindi Shayari

मोहब्बत

तुझे फुर्सत ही न मिली पढ़ने की और हम
तेरे शहर मे बिकते रहे किताबों की तरह

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हमारे बगैर भी आबाद है उनकी महफ़िलें,
और हम समझते रहे कि उनकी रौनकें हमसे है

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चराग-ए-ज़िंदगी होती है ये मोहब्बत..
रोशन तो करती है… मगर जला जला कर

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ज़र्रा ज़र्रा जल जाने को हाज़िर हूँ,
बस शर्त है कि वो आँच तुम्हारी हो

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झुठी बात है कि आत्मा नही मरती
मैने देखा है कि कुछ लोगो के शरीर जिंदा होते हैँ
और आत्मा मर चुकी होती है

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मज़हब, दौलत, ज़ात, घराना, सरहद, ग़ैरत, खुद्दारी
एक मुहब्बत की चादर को, कितने चूहे कुतर गए

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दुआ कौन सी थी हमे याद नही बस इतना याद है,
दो हथेलियाँ जुड़ी थी एक तेरी थी एक मेरी थी

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