चश्मा उतारने की विधियाँ: Methods for removing glasses

चश्मा उतारने की विधियाँ: Methods for removing glasses

चश्मा उतारने की विधियाँ: आँख की तुलना कैमरे से की जाती है। दूर से आने वाली प्रकाश किरणें आँखों के पर्दे पर पड़ती हैं तो हमें वस्तु दिखाई देती है। यदि वे किरणें पर्दे से कुछ पहले ही केंद्रित हो जाती हैं तो उस व्यक्ति को दूर की चीजें साफ दिखाई नहीं देतीं। इस दोष से मुक्ति के लिए डॉक्टर दूर की नजर (-) का चश्मा पहनने को देते हैं।

चश्मा उतारने की विधियाँ: Methods for removing glasses

पढ़ने-लिखने में कठिनाई महसूस होने पर या नजदीक की छोटी-छोटी चीजें दिखाई नहीं देतीं तो उसके लिए (+) का चश्मा लगाया जाता है। धूप व तेज प्रकाश से बचने के लिए भी चश्मे की आवश्यकता पड़ती है। आज का दैनिक जीवन इतना व्यस्त व प्रदूषित हो गया है कि छोटे-छोटे बच्चों को भी कम उम्र में ही चश्मा लग जाता है।

चश्मा लगने के कारण:

कुपोषण, कम रोशनी या तेज रोशनी में काम करना, विटामिन-ए की कमी, गर्मी के मौसम में सड़क पर नंगे पैर या धूप में चलना, लगातार पढ़ना, लेटकर पढ़ना, कब्ज रहना, ज्यादा तली-भुनी चीजों व चाय-कॉफी, उत्तेजक पदार्थों का सेवन करना, व्यायाम का अभाव, नेत्र साफ न करना, नशीले पदार्थों का सेवन करना, शौकिया चश्मा लगाना, बहुत जोर लगाकर देखना, ब्रह्मचर्य का पालन न करना, प्रदूषित वातावरण में अधिक देर तक रहना, मधुमेह आदि कारणों से नेत्रों की ज्योति कमजोर पड़ जाती है, जिसके कारण चश्मा लगाना पड़ता है।

नेत्र-ज्योति बढ़ाने की विधियाँ:

जब नेत्र-ज्योति बढ़ जाएगी तो चश्मा भी उतर जाएगा। यहाँ कुछ उपाय दिए जा रहे हैं। ये उपाय व्यक्तिगत अनुभव के आधार पर सुझाए जा रहे हैं।

यौगिक उपचार:

1. आँखें धोना: प्रातः-सायं ठंडे जल से छींटे मारकर आँखें धोना या आँखें धोने वाली प्यालियों (eye wash cups) में ठंडे जल से नेत्र सुरक्षा क्रियाएँ करना। जागने पर व सोने से पूर्व अवश्य आँखें धोकर धूल साफ कर लेनी चाहिए।

2. ओस पड़ी घास पर नंगे पैर चलना: पार्क में मुलायम घास पर टहलें। सर्दी के दिनों में 8–9 बजे टहलना चाहिए।

3. मालिश करना:

(क) दोनों हथेलियों को कानों के पास लगाकर आँखों की बगल में तेजी के साथ मालिश करें।
(ख) भौंहों से लेकर मस्तक की ओर ऊपर को 30 बार तेल की मालिश करें।
(ग) सोते समय सरसों के तेल की पैर के तलवों में मालिश नित्य करें।
(घ) नहाते समय जल से स्नान करके पानी को घर्षण करके ही सुखाएँ।
(ड) कान के आगे से लेकर कान के पीछे तक की मालिश करें।

4. पामिंग:

आँखों से हम काम ज्यादा लेते हैं, परंतु उन्हें आराम नहीं देते। दो-तीन मिनट के लिए हथेली का कप बनाकर बायीं आँख पर तथा दाईं हथेली का कप बनाकर दायीं आँख पर रखें। दाएँ हाथ की उँगलियाँ बाएँ हाथ की उँगलियों पर हों। नेत्र बंद हों और कालेपन का ध्यान हो। आँखें शिथिल हों।

5. नेति (सूत्र, जल व दुग्ध):

आँखों की नाड़ियों का मल दूर करने के लिए सूत्र नेति, जल नेति तथा दुग्ध पान नाक से करना चाहिए। यह जल नेति के लोटे से भी पी सकते हैं और कटोरी से भी नाक द्वारा पी सकते हैं।

6. आसन:

त्रिकोण, सूर्य नमस्कार, ताड़, गत्यात्मक पश्चिमोत्तान, उष्ट्र, सिंहगर्जनासन, भुजंग, शलभ, उत्थान पादहस्त, मर्कट, शवासन आदि।

7. प्राणायाम:

सर्दी में-भस्त्रिका, कपालभाति, नाड़ी शोधन। गर्मी में-शीतली, दीर्घश्वास, नाड़ी शोधन, उज्जायी प्राणायाम आदि।

8. आँखों की पलकें झपकना:

पढ़ते समय, टी.वी. देखते समय बीच-बीच में पलकें झपकाते रहनी चाहिएँ। बिल्ली की तरह जोर से भी भींचनी चाहिएँ। दोनों क्रियाएँ 30-30 बार करें।

9. नेत्र सुरक्षा क्रिया:

पुतलियों को पाँच-पाँच बार ऊपर-नीचे, दाएँ-बाएँ गोलाई में घुमाएँ। पलकें झपकाना यानी तेज गति से आँखों को खोलें और बंद करें। पामिंग के बारे में बता ही दिया।

10. आहार:

विटामिन ए, बी, सी, डी युक्त आहार करें। पालक, शलगम, गाय का दूध, पत्तागोभी, टमाटर बथुआ, गाजर, ककड़ी, संतरा, चना, चौलाई, सोयाबीन, मटर, किशमिश, अनानास, फूलगोभी, नींबू का रस, सरसों का साग, पपीता, चुकंदर, आम, आँवला, अमरूद आदि का सेवन करें। चबा-चबाकर खाएँ। हरी सब्जियों, फल आदि का सेवन अधिक करें। मिर्च-मसालों, तली-भुनी चीजों का परहेज करें।

11. सूर्य का सेवन:

कुछ मिनट उगते सूर्य अर्थात् बाल सूर्य की तरफ देखकर त्राटक करें।

12. कुंजल क्रिया:

सप्ताह में एक बार कुंजल करें। अंत में ठंडे पानी से नेत्र धोएँ।

योगाभ्यास करने से पूर्व शुद्धि क्रियाएँ कर लेनी चाहिएँ। योगाभ्यास में नियमितता रहनी चाहिए। भोजन में विटामिन-ए का प्रयोग अत्यंत आवश्यक है। कोई ऐसा कार्य न किया जाए जिससे आँखों पर अधिक जोर पड़े। टी.वी. को बहुत नजदीक से न देखें।

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