बैसाखी का त्यौहार और पवित्र स्नान

बैसाखी का त्यौहार और पवित्र स्नान – बैसाखी के त्यौहार से हमारे धार्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक और ऐतिहासिक प्रसंग जुड़े हुए हैं। पंजाब में बैसाखी पर प्रांतीय स्तर के लगभग 1100 बड़े और छोटे मेले और त्यौहार मनाए जाते हैं। अमृतसर की बैसाखी का तो आनंद लेने के लिए देश-विदेश से बड़ी संख्या में लोग आते हैं।

बैसाखी का त्यौहार:

सिख भाईचारे में बैसाखी का त्यौहार मनाने की परम्परा तीसरे गुरु श्री गुरु अमरदास जी के आदेश से आरंभ हुई थी। अमृतसर में 1589 ई. में पहली बार यह पर्व मनाया गया। उस समय श्री हरमंदिर साहिब अमृतसर में पवित्र सरोवर का कार्य सम्पूर्ण हुआ था।

पवित्र सरोवरों, तालाबों और नदियों में स्नान करके श्रद्धालु गुरुवाणी का कीर्तन श्रवण करते हैं। बैसाखी पर सरोवरों में स्नान करने के पीछे एक वैदिक धारणा भी छिपी हुई है। कहा जाता है कि सूर्य के मेष राशि में प्रवेश करने से सूर्य की किरणें मनुष्य के लाल रक्त अणुओं  में एकदम तापमान (गर्मी) बढ़ा देती हैं। इस दृष्टि से सूर्योदय से पंद्रह मिनट पूर्व और पंद्रह मिनट पश्चात यानि आधे घंटे के समय के लिए निरंतर बहते साफ पानी में स्नान करने से शारीरिक आरोग्यता प्राप्त होती है। यही कारण है कि बैसाखी के दिन धार्मिक स्थानों के सरोवरों या नदियों में स्नान करना लाभप्रद माना गया है।

बैसाखी पर गंगा स्नान, दान और सूर्य उपासना का विशेष महत्व है। जो लोग धार्मिक स्थानों के सरोवरों या नदियों में स्नान करने में असर्मथ हों वो घर पर ही किसी पवित्र नदी अथवा सरोवर के जल को स्नान करने वाले जल में मिला कर नहाने से तीर्थों के समान पुण्य अर्जित कर सकते हैं।

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