Poems In Hindi

बच्चों की हिन्दी कविताएं — 4to40 का हिन्दी कविताओ का संग्रह | Hindi Poems for Kids — A collection of Hindi poems for children. पढ़िए कुछ मजेदार, चुलबुली, नन्ही और बड़ी हिंदी कविताएँ. इस संग्रह में आप को बच्चो और बड़ो के लिए ढेर सारी कविताएँ मिलेंगी.

मास्टरजी की आ गयी चिट्ठी: गुलज़ार

मास्टरजी की आ गयी चिट्ठी - गुलज़ार

दिन ताका ताका दिन अ आ इ ई, अ आ इ ई मास्टरजी की आ गई चिट्ठी चिट्ठी में से निकली बिल्ली चिट्ठी में से निकली बिल्ली बिल्ली खाय ज़र्दा पान काला चश्मा पीली कान आहा अ आ इ ई, अ आ इ ई मास्टरजी की आ गई चिट्ठी चिट्ठी में से निकली बिल्ली चिट्ठी में से निकली बिल्ली दिन …

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मैं कभी बतलाता नहीं, पर अँधेरे से डरता हूँ मैं माँ: प्रसून जोशी

मैं कभी बतलाता नहीं, पर अँधेरे से डरता हूँ मैं माँ: प्रसून जोशी

मैं कभी बतलाता नहीं, पर अँधेरे से डरता हूँ मैं माँ यूँ तो मैं दिखलाता नहीं, तेरी परवाह करता हूँ मैं माँ तुझे सब हैं पता, हैं ना माँ तुझे सब हैं पता, मेरी माँ भीड़ में यूँ ना छोड़ो मुझे, घर लौट के भी आ ना पाऊँ माँ भेजना इतना दूर मुझको तू, याद भी तुझको आ ना पाऊँ …

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इचक दाना बीचक दाना दाने ऊपर दाना: शैलेन्द्र

इचक दाना बीचक दाना दाने ऊपर दाना - शैलेन्द्र

इचक दाना बीचक दाना दाने ऊपर दाना, इचक दाना… छज्जे ऊपर लड़की नाचे लड़का है दीवाना, इचक दाना… बोलो क्या? प्रनाम, इचक दाना बीचक दाना दाने ऊपर दाना इचक दाना छोटी सी छोकरी लालबाई नाम है… पहने वोह घाघरा एक पैसा दाम है… मुह मे सबके आग लगाए आता है रुलाना, इचक दाना… बोलो क्या? मिच्री!!, इचक दाना बीचक दाना …

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तारे ज़मीन पर: प्रसून जोशी

तारे ज़मीन पर - प्रसून जोशी Contemplation Poem in Hindi

देखो इन्हे यह है ओस की बूंदे, पत्तों की गोद मे आसमान से कूदे अंगड़ाई ले के फिर करवट बदल कर, नाज़ुक से मोती हंस दे फिसल कर खो न जाए ये… तारे ज़मीन पर यह तो है सर्दी मे धुप की किरणे उतरे जो आंगन को सुन्हेरा सा करने मन के अंधेरो को रोशन सा कर दे ठिठुरती हथेली …

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नन्हे मुन्ने बच्चे तेरी मुट्ठी में क्या है: शैलेन्द्र

नन्हे मुन्ने बच्चे तेरी मुट्ठी में क्या है – शैलेन्द्र

र: (नन्हे मुन्ने बच्चे तेरी मुट्ठी में क्या है) –२ आ: मुट्ठी में है तक़दीर हमारी को: मुट्ठी में है तक़दीर हमारी आ: हम ने क़िस्मत को बस में किया है को: हम ने क़िस्मत को बस में किया है र: (भोली भली मतवाली आँखों में क्या है) –२ आ: आँखोन में झूमे उम्मीदों की दिवाली को: आँखोन में झूमें उम्मीदों की …

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ये तारा वो तारा हर तारा: जावेद अख्तर

Shahrukh Khan

ये तारा वो तारा हर तारा, देखो जिसे भी लगे प्यारा ये सब साथ में, जो हैं रात में, तो झगमगाया आसमान सारा झगमग तारें, दो तारें, नौ तारें, सौं तारें, झगमग सारे, हर तारा हैं शरारा तुमने देखी है धनक तो, बोलो रंग कितने हैं सात रंग कहने को, फिर भी संग कितने हैं समझो सबसे पहले तो, रंग …

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आलू: ओम प्रकाश बजाज

Aloo - Om Prakash Bajaj

आलू की महिमा है न्यारी सर्वाधिक लोकप्रिय यह तरकारी! भूनो तलो पकाओ खाओ आलू की पराठों का आनंद उठाओ! आलू-गोभी आलू-बैंगन आलू-परवल, आलू से मिलकर बनते ढेरो व्यंजन! आलू के बिना समोसा नहीं बनता पोटैटो चिप्स का हर कोई दीवाना! पानी-पूरी कहो या कहो गोलगप्पा, उस में भी मसाला आलू का पड़ता! बंगला कोठी हो या निम्नवर्गीय झुग्गी, आलू की …

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वर्षा के मेघ कटे: गोपी कृष्ण ‘गोपेश’

वर्षा के मेघ कटे - गोपी कृष्ण 'गोपेश' शब्द चित्र

वर्षा के मेघ कटे – रहे–रहे आसमान बहुत साफ़ हो गया है, वर्षा के मेघ कटे! पेड़ों की छाँव ज़रा और हरी हो गई है, बाग़ में बग़ीचों में और तरी हो गई है – राहों पर मेंढक अब सदा नहीं मिलते हैं पौधों की शाखों पर काँटे तक खिलते हैं चन्दा मुस्काता है; मधुर गीत गाता है – घटे–घटे, …

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दीवाली आने वाली है: राजीव कृष्ण सक्सेना

दीवाली आने वाली है - राजीव कृष्ण सक्सेना

मानसून काफूर हो गया रावण का भी दहन हो गया ठंडी–ठंडी हवा चली है मतवाली अब गली–गली है पापा, मम्मी, भैय्या, भाभी बूआ, चाचा, दादा, दादी राह सभी तकते हैं मिल कर हर मन को भाने वाली है दीवाली आने वाली है चॉकलेट को छोड़ो भाई देसी है दमदार मिठाई लड्डू, पेड़ा, कलाकंद है बरफी दानेदार नरम है गरम जलेबी, …

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रूप के बादल: गोपी कृष्ण ‘गोपेश’

रूप के बादल यहाँ बरसे, कि यह मन हो गया गीला! चाँद–बदली में छिपा तो बहुत भाया ज्यों किसी को फिर किसी का ख्याल आया और, पेड़ों की सघन–छाया हुई काली और, साँस काँपी, प्यार के डर से रूप के बादल यहाँ बरसे… सामने का ताल, जैसे खो गया है दर्द को यह क्या अचानक हो गया है? विहग ने …

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