Salutation To The Father of The Nation: Mahatma Gandhi had to face a lot of discrimination based on race. This completely changed his perspective of the world after the discrimination and embracement faced by Gandhi due to his race and color, he vowed to fight and see. He decided to fight against this type of discrimination, and he made it …
Read More »डैडी जी मेरी मम्मी को सताना नहीं अच्छा: राजेंद्र कृष्ण
राजेंद्र कृष्ण का पूरा नाम राजेंद्र कृष्ण दुग्गल था। कविता का कीड़ा बचपन से काट गया था, इसलिए मन बहुत कुछ कहना चाहता था। डायरियों के पन्नों पर मन का उलझाव दर्ज करते रहे और कविता, शायरी, ग़ज़ल जैसा कुछ रचने लगे। साहित्य ठीक से पढ़ा, जब 1942 में शिमला की म्युनिसिपल कार्पोरेशन में क्लर्क हो गए। थोड़ी झिझक मिटी, …
Read More »प्रताप की प्रतिज्ञा: श्याम नारायण पांडेय की वीर रस हिंदी कविता
प्रताप की प्रतिज्ञा: श्याम नारायण पांडेय – Man Singh, a Rajput, ( “Maan” in first line of third stanza) had aligned with Emperor Akbar of Delhi and had attacked Rana Pratap’s kingdom of Mewar. Rana Pratap kept fighting and resisting this assault. His velour and that of his legendary horse “Chetak” has been immortalized by famous poet Shyam Narayan Pandey in …
Read More »कुँआरी मुट्ठी: कन्हैया लाल सेठिया वीर रस कविता
War has an important role in Nation building. A nation that has not experienced war becomes weaker. War ensures peace. This is the perspective on war provided by the well-known poet Kanhaiyalal Sethia. कुँआरी मुट्ठी: कन्हैया लाल सेठिया युद्ध नहीं है नाश मात्र ही युद्ध स्वयं निर्माता है, लड़ा न जिस ने युद्ध राष्ट्र वह कच्चा ही रह जाता है, …
Read More »पीथल और पाथल: कन्हैयालाल सेठिया की महाराणा प्रताप पर राजस्थानी वीर रस कविता
पीथल और पाथल: कन्हैयालाल सेठिया – You may have read Shyam Narayan Pandey’s classic epic “Haldighati”. Three excerpts from that great work are available on this site. Many readers had asked me to include a Rajasthani classic poem on the same theme by the great poet Kanhaiyalal Sethia, but I could not find that poem any where. Fortunately one reader …
Read More »चेतक की वीरता: श्याम नारायण पाण्डेय
चेतक की वीरता – महाराणा प्रताप के घोड़े चेतक की यशोगाथा गाती श्याम नारायण पाण्डेय की कविता। श्यामनारायण पाण्डेय का जन्म आजमगढ के डुमराँव गाँव में हुआ। इन्होंने काशी से साहित्याचार्य किया। पाण्डेयजी वीर रस के अनन्य गायक हैं। इन्होंने चार महाकाव्य रचे, जिनमें ‘हल्दीघाटी और ‘जौहर विशेष चर्चित हुए। ‘हल्दीघाटी में महाराणा प्रताप के जीवन और ‘जौहर में रानी …
Read More »वीर सिपाही: श्याम नारायण पाण्डेय की वीर रस कविता
Here is another excerpt from “” the great Veer-Ras Maha-kavya penned by Shyam Narayan Pandey. Here is a description of a soldier fighting for the Motherland. वीर सिपाही: वीर रस कविता भारत-जननी का मान किया, बलिवेदी पर बलिदान किया अपना पूरा अरमान किया, अपने को भी कुर्बान किया रक्खी गर्दन तलवारों पर थे कूद पड़े अंगारों पर, उर ताने शर-बौछारों पर …
Read More »बुद्ध और नाचघर: हरिवंशराय बच्चन
हरिवंश राय श्रीवास्तव “बच्चन” हिन्दी भाषा के एक कवि और लेखक थे। इलाहाबाद के प्रवर्तक बच्चन हिन्दी कविता के उत्तर छायावाद काल के प्रमुख कवियों मे से एक हैं। उनकी सबसे प्रसिद्ध कृति मधुशाला है। भारतीय फिल्म उद्योग के प्रख्यात अभिनेता अमिताभ बच्चन उनके सुपुत्र हैं। उन्होने इलाहाबाद विश्वविद्यालय में अध्यापन किया। बाद में भारत सरकार के विदेश मंत्रालय में …
Read More »पालनैं गोपाल झुलावैं: सूरदास
पालनैं गोपाल झुलावैं: सूरदास हिन्दी साहित्य में भक्तिकाल में कृष्ण भक्ति के भक्त कवियों में अग्रणी है। महाकवि सूरदास जी वात्सल्य रस के सम्राट माने जाते हैं। उन्होंने श्रृंगार और शान्त रसों का भी बड़ा मर्मस्पर्शी वर्णन किया है। उनका जन्म मथुरा-आगरा (Uttar Pradesh, India) मार्ग पर स्थित रुनकता नामक गांव में हुआ था। कुछ लोगों का कहना है कि …
Read More »जसोदा हरि पालनैं झुलावै: सूरदास
जसोदा हरि पालनैं झुलावै: सूरदास – गोस्वामी हरिराय के ‘भाव प्रकाश’ के अनुसार सूरदास का जन्म दिल्ली के पास सीही नाम के गाँव में एक अत्यन्त निर्धन सारस्वत ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनके तीन बड़े भाई थे। सूरदास जन्म से ही अन्धे थे, किन्तु सगुन बताने की उनमें अद्भुत शक्ति थी। 6 वर्ष की अवस्था में ही उन्होंने अपनी …
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