महिला दिवस पर कविता - पहली नारी

महिला दिवस पर कविता: पहली नारी

मेरा प्रणाम है पहली नारी सीता को जिसने एक सीमा (लक्ष्मण रेखा) को तोडकर भले ही जीवन भर अथाह दुख सहे लेकिन आधुनिक नारी को आजादी का मार्ग दिखा दिया…

महिला दिवस पर कविता

धन्य हो तुम माँ सीता
तुमने नारी का मन जीता

बढाया था तुमने पहला कदम
जीवन भर मिला तुम्हें बस गम

पर नई राह तो दिखला दी
नारी को आज़ादी सिखला दी

तोडा था तुमने इक बंधन
और बदल दिया नारी जीवन

तुमने ही नव-पथ दिखलाया
नारी का परिचय करवाया

तुमने ही दिया नारी को नाम
हे माँ तुझे मेरा प्रणाम

पहली नारी: माँ सीता

सीता रामायण और रामचरितमानस की मुख्य पात्र है। हिंदू धर्म में इनकी देवी के रूप में पूजा की जाती है। सीता मिथिला के राजा जनक की ज्येष्ठ पुत्री थी। इनका विवाह अयोध्या के राजा दशरथ के ज्येष्ठ पुत्र राम से स्वयंवर में शिवधनुष को भंग करने के उपरांत हुआ था। इनकी स्त्री व पतिव्रता धर्म के कारण इनका नाम आदर से लिया जाता है। त्रेता युग में इन्हें सौभाग्य की देवी लक्ष्मी का अवतार मानते हैं। राजा जनक की पुत्री का नाम सीता इसलिए था कि वे जनक को हल कर्षित रेखाभूमि से प्राप्त हुई थीं। बाद में उनका विवाह भगवान राम से हुआ। वाल्मीकि रामायण में जनक जी सीता की उत्पत्ति की कथा इस प्रकार कहते हैं:

अथ मे कृषत: क्षेत्रं लांगलादुत्थिता तत:।
क्षेत्रं शोधयता लब्धा नाम्ना सीतेति विश्रुता॥
भूतकादुत्त्थिता सा तु व्यवर्द्धत ममात्मजा।
दीर्यशुक्लेति मे कन्या स्थापितेयमयोनिजा॥

मिथिला प्रदेश के राजा जनक के राज्य में एक बार अकाल पड़ने लगा। वे स्वयं हल जोतने लगे। तभी पृथ्वी को फोड़कर सीता निकल आयी। जब राजा बीज बो रहे थे तब सीता को धूल में पड़ी पाकर उन्होंने उठा लिया। उन्होंने आकाशवाणी सुनी – ‘यह तुम्हारी धर्मकन्या है।‘ तब तक राजा की कोई संतान नहीं थी। उन्होंने उसे पुत्रीवत पाला और अपनी बड़ी रानी को सौंप दिया।

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