मालिक कौन? उपयोग और मोह में अंतर - Hindi Moral Story For Children

मालिक कौन? उपयोग और मोह में अंतर – Hindi Moral Story For Children

एक गांव में गोपाल नामक किसान रहता था। उसके पास एक सुंदर गाय थी, जिससे उसे बहुत लगाव था। एक दिन वह गाय को चरागाह से घर वापस ला रहा था लेकिन गाय घर जाने को तैयार नहीं थी।

गोपाल रस्सी खींचता, समझाता, कभी प्यार से पुचकारता और कभी डांटता, पर गाय एक कदम भी आगे नहीं बढ़ती। देखते-देखते काफी समय बीत गया और गोपाल पसीने से तरबतर हो गया। रास्ते से एक संत गुजर रहे थे। वह कुछ देर तक यह दृश्य देखते रहे। अचानक वह मुस्कुरा दिए।

मालिक कौन? उपयोग और मोह में अंतर

गोपाल पहले से ही परेशान था, इसलिए उसे संत की मुस्कान अच्छी नहीं लगी। उसने कहा, “महाराज, मेरी परेशानी देखकर आपको हंसी आ रही है?”

संत ने शांत स्वर में कहा, “नहीं पुत्र, मैं तुम पर नहीं, अपने ऊपर हंस रहा हूं।”

गोपाल आश्चर्य से उनकी ओर देखने लगा। संत ने अपना झोला दिखाते हुए कहा, “मैं सोच रहा था कि मैं इस झोले का मालिक हूं या यह झोला मेरा मालिक है?”

गोपाल बोला, “इसमें सोचने की क्या बात है? झोला आपका है, इसलिए आप उसके मालिक हैं। जैसे यह गाय मेरी है और मैं इसका मालिक हूं।”

संत बोले, “यदि ऐसा है तो गाय की रस्सी छोड़ दो।”

गोपाल ने जैसे ही रस्सी छोड़ी, गाय वहीं खड़ी रही और गोपाल उसकी ओर देखने लगा। संत ने कहा, “अब तुम बताओ, चिंता किसे है? गाय को या तुम्हें? यदि गाय चली जाए तो उसे कोई फर्क नहीं पड़ेगा, लेकिन तुम उसके पीछे भागोगे। इसका मतलब यह हुआ कि जिसे खोने का डर तुम्हें है, उसके तुम मालिक नहीं, बल्कि उसके गुलाम हो।”

संत की बात सुनकर गोपाल गहरी सोच में पड़ गया।

संत आगे बोले, “मनुष्य भी यही भूल करता है। वह धन, मकान, गाड़ी, पद, प्रतिष्ठा और रिश्तों को अपना समझता है। वह कहता है कि ये सब उसके हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि वही उनके बंधन में बंधा होता है। जितनी अधिक इच्छाएं और अपेक्षाएं होती हैं, उतनी ही अधिक रस्सियां हमें बांध लेती हैं।”

फिर संत ने अपना झोला जमीन पर रख दिया और बोले, “जिस दिन मनुष्य अपनी अनावश्यक आसक्तियों को छोड़ देता है, उसी दिन वह सच्चा मालिक बन जाता है। जो किसी वस्तु या व्यक्ति के बिना भी शांत और संतुष्ट रह सकता है, वही वास्तव में स्वतंत्र है।”

यह कहकर संत आगे बढ़ गए। गोपाल देर तक उनके शब्दों पर विचार करता रहा। उस दिन उसे समझ में आया कि संसार की वस्तुओं का उपयोग करना ठीक है, लेकिन उनके मोह में बंध जाना ठीक नहीं।

शिक्षा:

संसार की वस्तुएं हमारे उपयोग के लिए हैं, जीवन की मालिक बनने के लिए नहीं। जो व्यक्ति हर परिस्थिति में संतोष रखता है और अपेक्षाओं को सीमित करता है, वही सच्चे अर्थों में स्वतंत्र और सुखी रहता है। अपना भरोसा उस परमात्मा पर रखिए जो सबका मालिक है, क्योंकि जो प्राप्त है वही पर्याप्त है, और जिसका मन मस्त है, उसके पास समस्त है।

~ ललिता अरोड़ा (पूर्व डी.ई.ओ. होशियारपुर)

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