विपरीतकरणी आसन: कहा जाता है कि सोम मंडल से जो अमृत का स्राव होता है, वह नाभि में स्थित सूर्य मंडल द्वारा भस्म हो जाता है। ऐसा होने पर व्यक्ति को जल्दी बुढ़ापा आता है। इस प्रक्रिया को रोकने का अचूक इलाज विपरीतकरणी आसन है क्योंकि इस आसन में नाभि तक ऊपर-नीचे हो जाता है अर्थात् सूर्य मंडल ऊपर व चन्द्र मंडल नीचे होने की प्रक्रिया ही विपरीतकरणी प्रक्रिया है, जिससे अमृत रस को साधक धारण करता है।

विपरीतकरणी आसन: Legs Up the Wall Pose
विधि:
- आसन पर पीठ के बल लेट जाएँ।
- एड़ी, पंजे मिलाएं। दोनों भुजाएँ शरीर के साथ, हथेलियाँ पृथ्वी की ओर।
- श्वास भरते हुए दोनों टांगों को एक साथ इस प्रकार ऊपर उठाएँ कि पंजे आँखों की सीध में आ जाएँ।
- पश्चात् दोनों हाथों को रीढ़ के निचले भाग में रखते हुए शरीर को भी इतना उठाएँ कि कंधों से 45° का कोण बन जाए।
- श्वास भरते हुए लम्बा व गहरा श्वास सावधानी से भरें तथा लम्बा व गहरा श्वास निकालें।
- श्वास भरते हुए चेतना मूलाधार चक्र से विशुद्धि चक्र तथा श्वास निकालते हुए विशुद्धि चक्र से मूलाधार चक्र तक लेकर जाएँ।
- धीरे-धीरे वापस आकर शवासन में विश्राम करें।

प्रभाव:
- इस मुद्रा में सूर्य मंडल ऊपर व चन्द्र मंडल नीचे होने से विशुद्धि चक्र पर टपकने वाले अमृत रस की बचत होती है अर्थात् वह अग्निकुण्ड में भस्म नहीं होता।
- थायरॉइड, पैराथायरॉइड, श्वसन, पीनियल तथा पिच्युटरी ग्रंथियाँ, सेरेब्रल कोर्टेक्स स्वस्थ बनते हैं।
- रक्त का प्रवाह विपरीत दिशा में होने से मस्तिष्क को रक्त की पूर्ति प्रचुर मात्रा में होती है।
- वैरीकोज वेंस, बवासीर व कब्ज़ रोग ठीक होते हैं।
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