भोजन मंत्र: भोजन ग्रहण करने से पूर्व उच्चारित किए जाने वाले मंत्र

भोजन मंत्र: भोजन ग्रहण करने से पूर्व उच्चारित किए जाने वाले मंत्र

भोजन मंत्र: भोजन ग्रहण करने से पूर्व उच्चारित किए जाने वाले मंत्र, जो श्रीमद्भगवद्गीता से उद्धृत किए गए हैं।

भोजन मंत्र: भोजन ग्रहण करने से पूर्व उच्चारित किए जाने वाले मंत्र

1

ब्रह्मार्पणं ब्रह्म हविर्ब्रह्माग्नौ ब्रह्मणा हुतम्।
ब्रह्मैव तेन गन्तव्यं ब्रह्मकर्मसमाधिना।। (4/14)

भगवान कृष्ण के अनुसार समस्त सृष्टि ब्रह्ममय है। सृष्टि में जो कुछ हो रहा है, वह सब यज्ञ है। इस यज्ञ में हवनकुण्ड ब्रह्म है, यज्ञ सामग्री ब्रह्म है, आहुति अर्पण करने वाला, ग्रहण करने वाला, उससे संतुष्टि प्राप्त करने वाला तथा यज्ञ कर्म का फल भी ब्रह्म ही है।

व्याख्या:

  • भोजन करने वाला ब्रह्म है क्योंकि भोजन के लिए अन्न को उगाने वाला, भोजन बनाने वाला, परोसने वाला—ये सब ब्रह्म की व्यवस्था का ही हिस्सा हैं।
  • भोजन ही ब्रह्म है क्योंकि भोजन प्रकृति की देन है, जिससे हमारा शरीर पोषित होता है।
  • जठराग्नि ब्रह्म है अर्थात् हमारे शरीर की पाचन-शक्ति भी ब्रह्म की ही शक्ति है, जो भोजन को पचाने का कार्य करती है।
  • भोजन ग्रहण करने वाला भी स्वयं ब्रह्म ही है। अतः यह अहंकार नहीं करना चाहिए कि मैं खा रहा हूँ, अपितु यह भाव रखना चाहिए कि शरीर अपनी जरूरत पूरी कर रहा है।

भोजन क्रिया एक यज्ञ है। जैसे यज्ञ शुद्धता और ऊर्जा देता है, ठीक उसी प्रकार, भोजन भी हमें स्वास्थ्य और ऊर्जा देने का साधन है। अतः भोजन की क्रिया भी एक यज्ञ है।

अतः भोजन से पूर्व इस श्लोक का उच्चारण करते हुए यज्ञ और प्रसाद की भावना के साथ भोजन ग्रहण करना चाहिए। जिनके सत्प्रयास से भोजन उपलब्ध हुआ, उनके प्रति कृतज्ञता का भाव रखें। शांत मन से आवश्यकता के अनुसार भोजन ग्रहण करें।

2

ॐ अहं वैश्वानरो भूत्वा प्राणिनां देहमाश्रितः।
प्राणापान समायुक्तः पचाम्यन्नं चतुर्विधम्।। (15/14)

मैं ही सब प्राणियों के शरीर में स्थित रहने वाला प्राण और अपान से संयुक्त वैश्वानर अग्निरूप होकर चार प्रकार के अन्न को पचाता हूँ।

भक्ष्य, भोज्य, लेह्य और चोष्य, ऐसे चार प्रकार के अन्न होते हैं। उनमें से जो चबाकर खाया जाता है, वह ‘भक्ष्य’ है – जैसे रोटी आदि। जो निगला जाता है, वह ‘भोज्य’ है – जैसे दूध आदि तथा जो चाटा जाता है, वह ‘लेह्य’ है – जैसे चटनी आदि और जो चूसा जाता है, वह ‘चोष्य’ है, जैसे ईख आदि।

Check Also

Chhapar Mela: Chhapar, Ludhiana - Dedicated to the worship of Guga Pir

Chhapar Mela: Chhapar, Ludhiana – Dedicated to the worship of Guga Pir

Chhapar Mela is organized every year at Chhapar, Ludhiana and People mainly worship snake embodiment …