शाबाश गिन्नी: निरंतर प्रयास हमेशा फलदायी होते हैं

शाबाश गिन्नी: निरंतर प्रयास हमेशा फलदायी होते हैं – मेधावी छात्रा की प्रेरक कहानी

शाबाश गिन्नी: गिन्नी दसवीं कक्षा में पढ़ती थी और उसका भाई कुणाल आठवीं कक्षा का छात्र था। गिन्नी एक मेधावी छात्रा थी, जबकि कुणाल पढ़ाई में अपने आप को होशियार तो समझता था, लेकिन वह पढ़ाई में उतना अच्छा नहीं था, क्योंकि वह गिन्नी की तरह मेहनत नहीं करता था।

गिन्नी हर विषय को बहुत समझकर पढ़ती थी। जो कुछ उसे समझ में नहीं आता, उसे वह तुरंत अपने अध्यापक-अध्यापिकाओं से समझ लेती थी। कभी-कभी वह अपने मम्मी-पापा और अपनी कक्षा के बच्चों से भी मदद लेती थी।

शाबाश गिन्नी: प्रिंसिपल विजय कुमार

अपने अध्यापक-अध्यापिकाओं द्वारा बोर्ड पर लिखे जाने पर वह उसे बहुत ध्यान से लिखती थी, इसलिए उसकी कॉपियों में गलतियाँ बहुत कम होती थीं।

हर विषय के अध्यापक-अध्यापिका उसकी सुंदर लिखाई तथा शुद्ध लेखन के कारण उसकी कॉपियों पर “बहुत अच्छा” लिखकर उसकी कॉपियाँ कक्षा के अन्य बच्चों को दिखाते और उनसे प्रेरणा लेने के लिए कहते थे।

सभी भाषाओं में लिखने-पढ़ने में वह बहुत निपुण थी, लेकिन कुणाल उससे बिल्कुल उलट था।

वह उतना परिश्रमी नहीं था और केवल पास होने के लिए ही पढ़ता था। वह बोर्ड पर देखकर लिखते हुए भी गलतियाँ करता था। उसकी कॉपियों में भी गलतियाँ होती थीं। उसकी लिखाई भी सुंदर नहीं थी।

हर विषय के अध्यापक-अध्यापिकाओं से उसे डाँट पड़ती थी। भाषाओं में भी उसकी अधिक निपुणता नहीं थी, क्योंकि वह गिन्नी की तरह भाषाओं को पढ़ता-लिखता नहीं था।

उसके मम्मी-पापा जब भी उसे मेहनत करने के लिए कहते, तो उसका एक ही उत्तर होता, “मैं इससे और अधिक मेहनत क्या करूँ।”

एक दिन प्रार्थना सभा के समाप्त होने के साथ ही स्कूल के प्रधानाचार्य ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा, “बच्चों, आज छठी से दसवीं कक्षा तक के बच्चों का हिन्दी, अंग्रेज़ी तथा पंजाबी भाषा में शुद्ध शब्दों और सुंदर लेखन का टेस्ट होगा। इस टेस्ट का उद्देश्य आपकी भाषाओं के ज्ञान की परख करना है। इसमें प्रथम, द्वितीय तथा तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले बच्चों को जिले के शिक्षा अधिकारी द्वारा पुरस्कार देकर सम्मानित किया जाएगा।”

प्रधानाचार्य की बातें सुनकर परिश्रमी तथा मेधावी छात्र-छात्राएँ यह सोचकर खुश हुए कि उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने और पुरस्कार पाने का अवसर मिलेगा, परंतु पढ़ाई में रुचि न लेने वाले बच्चे एक-दूसरे से कहने लगे, “हमें इस टेस्ट के बारे में पहले तो बताया नहीं गया, हम यह टेस्ट कैसे देंगे?!”

स्कूल के अध्यापक-अध्यापिकाओं द्वारा सभी बच्चों का टेस्ट लिया गया। सभी टेस्ट जाँचने के बाद एक दिन सभी बच्चों को स्कूल के सभागार में इकट्ठा किया गया। जिला शिक्षा अधिकारी मुख्य अतिथि के रूप में वहाँ पहुँचे थे। टेस्ट में प्रथम, द्वितीय तथा तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले बच्चों के नामों की जानकारी दी गई। गिन्नी ने तीनों भाषाओं में सभी कक्षाओं के बच्चों में से सबसे अधिक अंक प्राप्त किए और प्रथम स्थान प्राप्त किया, परंतु कुणाल कोई स्थान प्राप्त नहीं कर सका। गिन्नी को विशेष पुरस्कार प्रदान किया गया।

जिला शिक्षा अधिकारी ने बच्चों को पुरस्कार देने के बाद उन्हें संबोधित करते हुए कहा, “बच्चो, इस अकस्मात लिए गए टेस्ट में प्रथम, द्वितीय तथा तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले या अच्छे अंक लेने वाले बच्चे वही हैं, जो दिल से पढ़ाई करते हैं। ऐसे बच्चे ही आगे चलकर प्रतियोगी परीक्षाओं में भी सफलता हासिल करते हैं। गिन्नी इस विद्यालय की सबसे मेधावी छात्रा है।” मुख्य अतिथि ने गिन्नी की पीठ थपथपाते हुए कहा, “शाबाश गिन्नी।”

~ ‘शाबाश गिन्नी‘ hindi story by ‘प्रिंसिपल विजय कुमार‘

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