समझदारी की 'उड़ान': सावधान रहें सतर्क रहें - अपनी सुरक्षा का खुद ख्याल रखें, किसी अन्य के भरोसे ना रहे

समझदारी की ‘उड़ान’: सावधान रहें सतर्क रहें – अपनी सुरक्षा का खुद ख्याल रखें, किसी अन्य के भरोसे ना रहे

समझदारी की ‘उड़ान’: कुछ दिनों के बाद बसंत का त्योहार आने वाला था। सुनील ने कई दिन पहले ही अपने मन में इसे मनाने की योजना बना ली थी।

उसने अपनी मम्मी को पहले ही बता दिया था कि इस बार वह जल्दी घर नहीं आएगा, बल्कि एक दिन पहले खूब सारे पतंग खरीदकर अपने दोस्तों के साथ उनके घर की छत पर चढ़कर खूब पतंग उड़ाएगा और पिछले वर्ष से भी अधिक पतंग काटकर इकट्ठा करेगा।

इस बार वह अपने सभी दोस्तों के साथ मिलकर बसंत त्योहार की पार्टी भी करेगा।

समझदारी की ‘उड़ान’: प्रिंसिपल विजय कुमार

अभी उसकी मम्मी उसे कुछ कहने ही वाली थीं कि उसने तुरंत उनकी बात काटते हुए कहा, “मम्मी, प्लीज़, हर बार मैं आपकी बात मानता हूँ, लेकिन इस बार मुझे बसंत मनाने के लिए अपने दोस्तों के घर जाने देना।”

उसकी मम्मी ने उसकी बात न सुनते हुए कहा, “तुम मेरी बात तो कभी मानते ही नहीं। अपने पापा से बात कर लेना, वही कर लेना जो वह कहेंगे।”

सुनील ने शाम को घर आते ही अपने पापा से कहना शुरू किया, “पापा! क्या आप इस बार मुझे बसंत के त्योहार पर पिछले साल से भी अधिक पतंग लेकर दोगे?”

उसके पापा ने उसकी बात सुनकर कहा, “क्या, इस बार कोई अलग बात है?”

अपने पापा का प्रश्न सुनकर वह बोला, “पापा, इस बार मैं अपने दोस्तों के घर जाकर बसंत का त्योहार मनाऊंगा।”

पापा ने कहा, “तेरी मम्मी ने मुझे सब कुछ बता दिया है। तुम उनके घर जाकर छत पर चढ़कर पतंग उड़ाओगे, कटे हुए पतंगों को पकड़ने के लिए उनके पीछे-पीछे भागोगे। क्या तुमने यह भी सोचा है कि इस बार तुम्हारी बोर्ड की परीक्षा है?”

“कहीं भागते हुए तुम्हें चोट लग गई तो क्या होगा? पतंग तुम जितनी चाहो ले लेना, पर बसंत तुम अपने घर पर ही मानना।”

पापा की बातें सुनकर सुनील कुछ नहीं बोल सका। उसने सोचा कि अभी बसंत के त्योहार में दो दिन पड़े हैं, एक दिन पहले फिर कहकर देखूँगा, शायद पापा उसकी बात मान ही लें।

वह दूसरे दिन स्कूल गया। उसका बहुत ही घनिष्ठ मित्र पुलकित स्कूल नहीं आया था। उसने उसकी गली से आने वाले लड़के अनिल से पूछा, “यार अनिल, पुलकित स्कूल क्यों नहीं आया?” आज गणित का टेस्ट था। हमारे गणित अध्यापक ने कहा था कि जो बच्चा गणित का यह टेस्ट नहीं देगा, उसे बोर्ड की परीक्षा में बैठने नहीं दिया जाएगा।”

अनिल ने आगे कहा, “सुनील, क्या तुम्हें नहीं पता कि पुलकित को कल बसंत के दिन पतंगों को पकड़ने भागते हुए एक स्कूटर टकरा कर चोट लग गई।”

उसने आगे बताया, “उसका बचाव तो हो गया है, परंतु उसके पाँव पर चोट आने के कारण वह कई दिनों तक स्कूल नहीं आ पाएगा। उसके पापा स्कूल के प्रिंसिपल को मिलने आये थे।”

पुलकित को चोट लगने की बात सुनकर सुनील स्तब्ध रह गया। वह मन ही मन सोचने लगा कि उसके मम्मी-पापा उसे ठीक ही कहते थे। जिस तरह लापरवाही के साथ वह पतंग उड़ाने की सोच रहा था, ऐसा उसके साथ भी हो सकता था।

उसने अपने मन में निर्णय लिया कि वह इस तरह बसंत नहीं मनाएगा। उसने घर आते ही पुलकित को चोट लगने की बात अपने मम्मी-पापा को बताई और बसंत अपने घर रहकर ही मनाने का निर्णय बता दिया। उसकी मम्मी ने कहा, “बेटा, तुम बहुत अच्छे बच्चे हो।”

~ समझदारी की ‘उड़ान’ Hindi story by प्रिंसिपल विजय कुमार

Check Also

कसेल शिव मंदिर: श्री राम की माता कौशल्या इसी मंदिर में पूजा करती थीं

कसेल शिव मंदिर, तरन तारन, पंजाब: श्री राम की माता कौशल्या इसी मंदिर में पूजा करती थीं

भारत की आत्मा उसके गांवों में बसती है और उन गांवों की आत्मा वहां स्थित …