मैं... पापा की लाडली: बाप बेटी के रिश्ते पर दिल छू जाने वाली हिंदी कविता

मैं… पापा की लाडली: बाप बेटी के रिश्ते पर दिल छू जाने वाली हिंदी कविता

मैं… पापा की लाडली: कहते हैं कि किस्‍मत वालों के घर बेटी पैदा होती है। बेटियां मां की तो दोस्‍त होती ही हैं लेकिन अपने पिता के भी बहुत करीब होती हैं। बाप-बेटी का रिश्‍ता बहुत प्‍यारा और अनोखा होता है। जहां बाप-बेटी के रिश्‍ते का असर पिता की पर्सनैलिटी पर पड़ता है वहीं इससे बेटी के आगे के रिश्‍ते, व्‍यवहार और सफलता जुड़ी होती है।

कहते हैं कि किस्‍मत वालों के घर बेटी पैदा होती है। बेटियां मां की तो दोस्‍त होती ही हैं लेकिन अपने पिता के भी बहुत करीब होती हैं। बाप-बेटी का रिश्‍ता बहुत प्‍यारा और अनोखा होता है। जहां बाप-बेटी के रिश्‍ते का असर पिता की पर्सनैलिटी पर पड़ता है वहीं इससे बेटी के आगे के रिश्‍ते, व्‍यवहार और सफलता जुड़ी होती है।

मैं… पापा की लाडली: डा. पूजा कपूर

पापा की लाडली परी हूं मैं,
डर को पीछे छोड़ बहुत आगे बढ़ चुकी हूं मैं,
मत कोशिश कर मुझे पकड़ कर बांधने को,
हिम्मत आ गई है मुझमें सब दीवारों को लांघने की,
क्योंकि पापा कौ लाडली परी हूं मैं।

तू ले अंगड़ाई तो… बहुत थका होगा,
मैं लूं अंगड़ाई तो जरूर कुछ पंगा होगा,
इस सेंकीर्ण समाज से अब ऊब चुको हूं मैं,
ये मत कर, वो मत कर, यहां मत जा, वहां मत जा,
ये मत पहन, वो मत पहन,
ऐसी बोसीदा बातों से अब थक चुको हूं मैं,
आज से ही अपने मन की करने की ठान चुकी हूं मैं,
क्योंकि… पापा की लाडली परी हूं मैं।

डाक्टर-इंजीनियर तो कब कौ बन चुकी,
अब जहाज भी उड़ाती
कहते थे न, ये न कर सकेगी,
देखो कोर्ट के फैसले भी सुनाती हूं मैं,
टीचर बनने तक न रुक कर,
बॉक्सिंग-कराटे भी कर जाती हूं मैं,
देख ले तू आसपास अपने, कहां नजर नहीं आती हूं मैं,

शीर्ष पर पहुंच कर, आज भी जमीन से जुड़ी हूं मैं,
मत बनाना हदें मेरी तू, हर हद से आगे बढ़ी हूं
‘फौलादी तन-मन बनाने को, बहुत ज्यादा अड़ी हूं मैं,
मां, बेटी, बहन में छुपी, आज भी एक अल्हड़ कुड़ी हूं मैं,
प्यार का अनंत सागर, वातसल्य से भरी हूं मैं,
इज्जत से तो देख एक बार, जी-जान से तुझ पे मरी हूं मैं,
जब भी तू डगमगाया है, तेरे पीछे पहाड़-सी खड़ी हूं मैं,
अपने लिए तो कम, तेरे लिए ज्यादा लड़ी हूं मैं।

मत आना आगे, अब बड़ी हूं मैं,
अपने सपनों खातिर उठ खड़ी हूं मैं,
खुल के जीने को अब अड़ी हूं मैं,
पापा की लाडली परी हूं मैं।

~ ‘मैं… पापा की लाडली’ poem by ‘डा. पूजा कपूर’

इस संसार में पिता और पुत्री का रिश्ता बहुत ही पवित्र और स्नेह भरा होता है। जहा माँ उसके स्वास्थ्य और तंदुस्र्स्ती का ध्यान रखती है, वही पिता उसके भविष्य को उज्जवल बनाने के लिए अनवरत कार्य करता रहता है। एक माँ तो अपने पुत्री से अपना प्यार व स्नेह दिखाती रहती है, लेकिन एक पिता अपनी बेटी के प्रति अपना अति स्नेह व प्यार को कभी बताता या जताता नही है। अपनी बेटी की सुख सुविधाओं के लिए हर संभव कोशिश करता रहता है। जब बिटिया बड़ी होती है, उसका विवाह कर पिता को अपने आप से बिटिया का दूर चले जाना बहुत ही दुखमय होता है। पर क्या करें दुनिया की जो रीत है उसे भी तो निभाना है। ससुराल में वह गम सब सहे पर, पिता को गाली न सह पाई कभी। स्वाभिमान जो है पिता उसका, चाहे हो जाए फिर लड़ाई। दिक हुई तो लाडली, लौट, पुनः बाबुल के घर को आई। लाड प्यार से समझा बुझा के, बाबुल ने वापिस भिजवाई।

Check Also

The End of Oak Street: 2026 Anne Hathaway Science Fiction Survival Film

The End of Oak Street: 2026 Anne Hathaway Science Fiction Survival Film

Movie Name: The End of Oak Street Directed by: David Robert Mitchell Starring: Anne Hathaway, …