भूल का एहसास: दांत साफ करने के फायदों पर बाल-कहानी

भूल का एहसास: दांत साफ करने के फायदों पर बाल-कहानी

भूल का एहसास:

“कितनी बार कह चुकी हूँ कि अपने दाँतों की देखभाल अच्छे से किया करो” मम्मी ने नीटू से कहा।

नीटू हँसते हुए बोला – “मम्मी, देखभाल तो मैं शेरू और पूसी की करता हूँ। दाँतों की भी भला कहीं देखभाल होती है”।

अपना नाम सुनते ही शेरू ख़ुशी के मारे पूँछ हिलाने लगा और पूसी कूदकर नीटू के पैरों के पास आ गई।

मम्मी ने जैसे ही नीटू को गुस्से से देखा, वह कमरा छोड़ कर भाग खड़ा हुआ।

बाहर जाते ही नीटू को उसके दोस्त मिल गए जो क्रिकेट खेल रहे थे।

भूल का एहसास: डॉ. मंजरी शुक्ला की बाल-कहानी

बस फिर क्या था नीटू ने जी भरकर क्रिकेट खेला और तभी घर लौटा जब उसे जोरों की भूख लगी।

पर मम्मी का गुस्सा अभी पूरी तरह नहीं उतरा था, ये बात नीटू घर में कदम रखते ही समझ गया था।

इसलिए वह बड़े लाड़ से मम्मी के गले में हाथ डालकर बोला – “मम्मी, आप क्या अपने प्यारे नीटू से नाराज़ हो”?

मम्मी जोरों से हँस पड़ी।

उनका आधा गुस्सा तो नीटू का मासूम चेहरा देखते ही उतर गया था पर वह उसे समझाते हुए बोली – “तुम जब भी ब्रश करते हो तो तुरंत कुल्ला कर देते हो। ब्रश पर टूथ पेस्ट लगाकर कम से कम ऊपर नीचे करते हुए सारे दाँतों को अच्छे से साफ़ किया करो”।

“अच्छा मम्मी, अब आज से मैं ऐसा ही करूँगा”।

मम्मी ने मुस्कुराते हुए नीटू के गोल मटोल टमाटर जैसे गालों पर प्यार किया और उसके लिए खाना लेने चली गई।

दिन भर में मम्मी ने कई बार याद दिलाया कि रात में ब्रश ज़रूर करके सोना और नीटू ने भी तुरंत अपनी जेब में रखा ब्रश दिखा दिया।

पर रात के खाने के बाद जब मम्मी ने नीटू से ब्रश करने के लिए कहा तो वह हमेशा की तरह ब्रश मुँह में रखते ही कुल्ला करके लौट आया।

मम्मी को समझ में नहीं आ रहा था कि वह नीटू को कैसे समझाए।

दूसरे दिन सुबह नीटू जब स्कूल गया तो वह बहुत खुश था।

आज क्लास में हर बच्चे को अपने पार्टनर के साथ मिलकर कहानी बनानी थी और फिर उसे पूरी क्लास के सामने सुनानी थी।

शर्मा सर ने कहा था कि जिसकी कहानी बच्चे सबसे ज़्यादा पसंद करेंगे, वो कहानी स्कूल की मैगज़ीन में प्रकाशित भी की जायेगी।

इसलिए पूरी क्लास में सब अपने दोस्तों के साथ मिलकर देश-विदेश की कहानियों के बारें में बात कर रहे थे।

नीटू भी अपने दोस्त पुलकित को ढूँढते हुए उसके पास गया और बोला-“पता है , मैं और मेरी दादी रोज़ रात में एक दूसरे को मन से कहानियाँ बना बनाकर सुनाते है”।

“अच्छा…” कहते हुए पुलकित थोड़ा सा दूर सरक गया

नीटू बोला-“देखना, आज हम ही फर्स्ट आएँगे”।

पर पुलकित का ध्यान तो अपने दोस्त अमोल की तरफ़ था।

उसने अमोल से पूछा – “तुम क्या मेरे साथ कहानी बोलोगे”?

“हाँ… हाँ… क्यों नहीं, कहते हुए अमोल तुरंत पुलकित के बगल में बैठ गया।

नीटू का चेहरा उतर गया।

उसने चारों ओर देखा। सभी बच्चे अपने पार्टनर के साथ कहानियाँ बना रहे थे और एक दूसरे को सुना सुनकर खूब हँस रहे थे।

उसकी आँखों में आँसूं आ गए।

तभी उसकी दोस्त टेसू उसके पास आई और बोली – “नीटू, तुम उदास मत हो पर पुलकित की कोई गलती नहीं है”।

“मैं उसे कितना प्यार करता हूँ और वह मुझे छोड़कर अमोल का पार्टनर बन गया”।

टेसू धीरे से बोली – “क्योंकि तुम कभी ब्रश करके नहीं आते हो और तुम्हारे मुँह से हमेशा बदबू आती रहती है”।

नीटू का चेहरा फक्क पड़ गया।

इसका मतलब तभी मम्मी हमेशा उसके अच्छे से ब्रश करने के लिए उसके पीछे पड़ी रहती है।

उसने टेसू से कहा – “कल से मैं रोज़ बहुत अच्छे से ब्रश करके आऊंगा”।

“कल से क्यों, आज रात से ही…” टेसू ने मुस्कुराते हुए कहा और अपनी सीट पर चली गई।

“हाँ… आज रात से ही करूँगा और अब मैं मम्मी की हर बात भी मानूँगा” नीटू बुदबुदाया।

“और इसलिए हम तीनों ही आज पार्टनर है और साथ में कहानी बोलेंगे” कहते हुए पुलकित नीटू के गले लग गया।

नीटू हँस दिया उसने टेसू की ओर देखा जो उसे देखकर मुस्कुरा रही थी।

~ ‘भूल का एहसास’ बाल-कहानी by डॉ. मंजरी शुक्ला

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