Home » Poems For Kids » Poems In Hindi » सच झूठ – ओमप्रकाश बजाज
सच झूठ - ओमप्रकाश बजाज

सच झूठ – ओमप्रकाश बजाज

सच झूठ का फर्क पहचानो
झूठे का कहा कभी न मानो।

झूठे की संगत न करना,
झूठे से सदा बचकर रहना।

मित्रता झूठे से न करना,
झूठे का कभी साथ न देना।

झूठ कभी भी चुप न पाता,
देर-सवेर पकड़ा ही जाता।

सच्चे का होता सदा बोलबाला,
झूठे का मुँह होता काला।

~ ओमप्रकाश बजाज

Check Also

स्कूल ना जाने की हठ पर एक बाल-कविता: माँ मुझको मत भेजो शाला

स्कूल ना जाने की हठ पर एक बाल-कविता: माँ मुझको मत भेजो शाला

अभी बहुत ही छोटी हूँ मैं, माँ मुझको मत भेजो शाळा। सुबह सुबह ही मुझे …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *